
सुबह की शुरुआत चाय या कॉफी के बिना अधूरी लगना आज के समय में आम बात है। काम के दबाव, मानसिक थकान और नींद की कमी के बीच कई लोग खुद को एक्टिव रखने के लिए दिन में कई बार चाय या कॉफी का सेवन करते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि सीमित मात्रा में कैफीन का सेवन सामान्य तौर पर ठीक माना जाता है, लेकिन इसकी अधिक मात्रा दिमाग और शरीर पर नकारात्मक असर डाल सकती है।
चाय और कॉफी में मौजूद कैफीन मस्तिष्क की गतिविधियों को प्रभावित करती है। यह दिमाग में मौजूद एडेनोसिन (Adenosine) नामक रसायन के प्रभाव को रोक देती है, जिससे व्यक्ति कुछ समय के लिए ज्यादा सतर्क और ऊर्जावान महसूस करता है। लेकिन लगातार अधिक मात्रा में कैफीन लेने से तनाव से जुड़े हार्मोन बढ़ सकते हैं और बेचैनी, घबराहट जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
कैफीन दिमाग तक पहुंचकर कैसे करती है असर?
विशेषज्ञों के अनुसार कैफीन शरीर में पहुंचने के बाद तेजी से अवशोषित होती है और करीब 30 से 60 मिनट के अंदर मस्तिष्क तक पहुंच सकती है। यहां पहुंचकर यह एडेनोसिन न्यूरोट्रांसमीटर के रिसेप्टर को ब्लॉक कर देती है।
सामान्य स्थिति में एडेनोसिन दिमाग को शांत रखने, थकान महसूस कराने और नींद लाने में मदद करता है। लेकिन जब कैफीन इसके प्रभाव को रोकती है तो दिमाग ज्यादा सक्रिय हो जाता है। इसके कारण डोपामिन, नॉरएड्रेनालिन और एड्रेनालिन जैसे रसायनों की गतिविधि बढ़ सकती है।
यही वजह है कि कैफीन लेने के बाद व्यक्ति खुद को ज्यादा अलर्ट महसूस करता है, लेकिन ज्यादा मात्रा में सेवन करने पर यही प्रक्रिया तनाव, घबराहट और बेचैनी को बढ़ा सकती है।
ज्यादा चाय-कॉफी पीने से बढ़ सकता है एंग्जायटी का खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि ज्यादा मात्रा में कैफीन का सेवन कुछ लोगों में एंग्जायटी (Anxiety) और पैनिक अटैक जैसी समस्याओं को ट्रिगर कर सकता है। खासतौर पर जिन लोगों को पहले से जनरलाइज्ड एंग्जायटी डिसऑर्डर, पैनिक डिसऑर्डर या सोशल एंग्जायटी की समस्या है, उनमें कैफीन के कारण लक्षण और ज्यादा महसूस हो सकते हैं।
अधिक कैफीन लेने के बाद कुछ लोगों में दिल की धड़कन तेज होना, घबराहट, हाथ कांपना, पसीना आना, सांस तेज चलना, बेचैनी और चक्कर आने जैसी परेशानियां दिखाई दे सकती हैं।
हर व्यक्ति पर अलग होता है कैफीन का असर
विशेषज्ञों के अनुसार हर व्यक्ति का शरीर कैफीन को अलग-अलग तरीके से प्रोसेस करता है। कुछ लोगों के शरीर में कैफीन जल्दी टूट जाती है, जबकि कुछ लोगों में इसका असर लंबे समय तक बना रह सकता है। इसलिए किसी व्यक्ति के लिए कम मात्रा में ली गई कॉफी सामान्य हो सकती है, वहीं दूसरे व्यक्ति में वही मात्रा बेचैनी पैदा कर सकती है।
इन लोगों को कैफीन से ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए
एंग्जायटी डिसऑर्डर से जूझ रहे लोग
जिन लोगों को पहले से चिंता संबंधी समस्या होती है, उनमें कैफीन तनाव और बेचैनी की भावना को बढ़ा सकती है।
पैनिक डिसऑर्डर वाले व्यक्ति
रिसर्च के मुताबिक ज्यादा कैफीन लेने से पैनिक अटैक जैसी स्थिति को बढ़ावा मिल सकता है। ऐसे लोगों को कैफीन की मात्रा नियंत्रित रखने की सलाह दी जाती है।
गर्भवती महिलाएं
गर्भावस्था के दौरान शरीर में कैफीन का मेटाबोलिज्म धीमा हो सकता है। इसलिए विशेषज्ञ गर्भवती महिलाओं को कैफीन का सेवन सीमित मात्रा में करने की सलाह देते हैं।
किशोर और युवा
एनर्जी ड्रिंक, कॉफी और अन्य कैफीन युक्त पेय पदार्थों का अधिक सेवन युवाओं में दिल की धड़कन बढ़ने और बेचैनी जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है।
क्या चाय और कॉफी पूरी तरह छोड़ना जरूरी है?
विशेषज्ञों का मानना है कि हर व्यक्ति को चाय या कॉफी पूरी तरह बंद करने की जरूरत नहीं होती। लेकिन अगर कैफीन लेने के बाद घबराहट, नींद में परेशानी, दिल की धड़कन तेज होना या बेचैनी जैसी समस्याएं महसूस होती हैं तो इसकी मात्रा कम करना फायदेमंद हो सकता है।
संतुलित मात्रा में कैफीन का सेवन और अपनी शारीरिक प्रतिक्रिया पर ध्यान देना सबसे जरूरी है। खासतौर पर मानसिक स्वास्थ्य या हृदय संबंधी समस्या वाले लोगों को कैफीन की मात्रा को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए।
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