Saudi Houthi War: हूतियों के मिसाइल-ड्रोन हमलों से सऊदी में हाई अलर्ट, जिजान और यानबू निशाने पर, अरामको के तेल प्रतिष्ठान पर भी बड़ा खतरा

रियाद/सना: पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। यमन के हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच मिसाइल और ड्रोन हमलों का सिलसिला तेज हो गया है। हूती विद्रोहियों की ओर से किए गए हमलों के बाद सऊदी अरब के जिजान और यानबू शहरों में सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। हालात को देखते हुए सऊदी सिविल डिफेंस ने अलर्ट जारी किया और लोगों से सतर्क रहने की अपील की। बाद में कुछ क्षेत्रों में खतरा टलने की सूचना भी दी गई, लेकिन यानबू को लेकर सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी बनाए हुए हैं।

जिजान और यानबू पर बढ़ी सुरक्षा, प्रशासन लगातार कर रहा निगरानी

सऊदी सिविल डिफेंस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए लगातार स्थिति की जानकारी साझा की। शुक्रवार रात से शुरू हुए अलर्ट के बाद शनिवार सुबह कई अपडेट जारी किए गए। शुरुआती संदेशों में संभावित खतरे को लेकर लोगों को सावधान किया गया, जबकि बाद में कुछ इलाकों में स्थिति सामान्य होने की जानकारी दी गई। हालांकि ताजा अपडेट में यानबू क्षेत्र को लेकर फिर सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।

क्यों अहम है यानबू, रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण

यानबू पश्चिमी सऊदी अरब के मदीना प्रांत में लाल सागर के तट पर स्थित एक प्रमुख औद्योगिक और बंदरगाह शहर है। जेद्दा के बाद यह लाल सागर का दूसरा सबसे बड़ा बंदरगाह माना जाता है। यह शहर केवल व्यापारिक गतिविधियों के लिए ही नहीं, बल्कि पर्यटन के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण है। यहां के द्वीप, कोरल रीफ्स, स्कूबा डाइविंग और समुद्री पर्यटन दुनियाभर के पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। ऐसे में यमन के साथ बढ़ते सैन्य तनाव के बीच इस क्षेत्र की सुरक्षा सऊदी अरब के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।

अरामको के तेल प्रतिष्ठान को बनाया निशाना, बिजली आपूर्ति भी प्रभावित

हूती विद्रोहियों ने जिजान औद्योगिक क्षेत्र के महत्वपूर्ण ठिकानों के साथ दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी अरामको से जुड़े एक तेल प्रतिष्ठान को भी निशाना बनाया। हमलों के बाद कुछ इलाकों में बिजली आपूर्ति प्रभावित होने की खबर सामने आई। हालांकि नुकसान का आधिकारिक आकलन अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। अरामको वैश्विक ऊर्जा बाजार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, इसलिए उसके प्रतिष्ठानों पर किसी भी हमले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर माना जाता है।

दोनों पक्ष कर रहे जवाबी कार्रवाई, बढ़ सकता है क्षेत्रीय तनाव

मौजूदा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोही एक-दूसरे पर मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहे हैं। लगातार बढ़ रहे सैन्य टकराव ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा चिंताएं बढ़ा दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष और तेज होता है तो इसका असर पश्चिम एशिया की सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ वैश्विक तेल आपूर्ति और ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है।

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