
कोलोरेक्टल कैंसर यानी कोलन और रेक्टम से जुड़ा कैंसर दुनियाभर में चिंता का बड़ा कारण बन रहा है। इसे लंबे समय तक मुख्य रूप से उम्रदराज लोगों से जुड़ी बीमारी माना जाता रहा, लेकिन 50 साल से कम उम्र के लोगों में भी इसके मामले बढ़ने की चिंता सामने आई है। खानपान की खराब आदतें, कम फाइबर वाला भोजन, रेड और प्रोसेस्ड मीट का ज्यादा सेवन, मोटापा, शारीरिक गतिविधि की कमी, धूम्रपान और शराब जैसे कई कारक इसके जोखिम से जुड़े हैं।
ऐसे में डाइट में कुछ आसान बदलाव लंबे समय में मददगार हो सकते हैं। विशेषज्ञ संस्थाएं फल, सब्जियां, साबुत अनाज और अन्य फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों को नियमित भोजन का हिस्सा बनाने की सलाह देती हैं। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि केवल फल-सब्जियां खाना कैंसर से बचाव की गारंटी नहीं है और डाइट के प्रभाव को दूसरे जोखिम कारकों के साथ मिलाकर देखा जाना चाहिए।
कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा क्यों बढ़ता है?
कोलोरेक्टल कैंसर का कोई एक कारण नहीं होता। उम्र और पारिवारिक इतिहास जैसे कुछ जोखिम कारकों को बदला नहीं जा सकता, जबकि डाइट, वजन, शारीरिक सक्रियता और शराब जैसी जीवनशैली से जुड़ी आदतों में बदलाव किया जा सकता है।
कम फाइबर और असंतुलित डाइट
फल, सब्जियां, दालें और साबुत अनाज कम खाना तथा रेड और प्रोसेस्ड मीट का अधिक सेवन आंतों के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकता है। अमेरिकन कैंसर सोसाइटी के अनुसार सब्जियों, फलों और साबुत अनाज से भरपूर तथा रेड और प्रोसेस्ड मीट से कम वाली डाइट कोलोरेक्टल कैंसर के कम जोखिम से जुड़ी पाई गई है।
रेड मीट में बीफ, पोर्क, लैम्ब और मटन जैसी चीजें शामिल हैं, जबकि प्रोसेस्ड मीट में सॉसेज, बेकन, हैम और कुछ तरह के पैकेज्ड मीट शामिल होते हैं। प्रोसेस्ड मीट का सेवन कोलोरेक्टल कैंसर के बढ़े हुए जोखिम से जुड़ा है।
टाइप-2 डायबिटीज और मोटापा
टाइप-2 डायबिटीज, इंसुलिन रेजिस्टेंस, अधिक वजन और मोटापा भी कोलोरेक्टल कैंसर के जोखिम से जुड़े कारकों में शामिल हैं। स्वस्थ वजन बनाए रखना और नियमित शारीरिक गतिविधि करना जोखिम कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं।
उम्र और पारिवारिक इतिहास
उम्र बढ़ने के साथ कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा बढ़ता है। इसके अलावा, परिवार में कोलोरेक्टल कैंसर या कुछ प्रकार के पॉलीप्स का इतिहास होने पर जोखिम अधिक हो सकता है। ऐसे लोगों को डॉक्टर से व्यक्तिगत जोखिम और स्क्रीनिंग के बारे में सलाह लेनी चाहिए।
धूम्रपान और शराब
धूम्रपान और शराब का सेवन भी कैंसर के जोखिम से जुड़ा है। विशेष रूप से अधिक शराब पीने और कोलोरेक्टल कैंसर के बीच संबंध कई अध्ययनों में सामने आया है। इसलिए कैंसर की रोकथाम के लिहाज से इन आदतों को सीमित करना या छोड़ना फायदेमंद हो सकता है।
फल और सब्जियां कैसे कर सकती हैं मदद?
फल और सब्जियां फाइबर, विटामिन, मिनरल और कई प्राकृतिक प्लांट कंपाउंड का स्रोत हैं। खासकर फाइबर पाचन तंत्र के लिए महत्वपूर्ण है और आंत में भोजन के अवशेषों की गति तथा गट बैक्टीरिया के वातावरण को प्रभावित करता है। विश्व कैंसर अनुसंधान कोष के अनुसार फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन बाउल कैंसर के कम जोखिम से जुड़ा है।
फाइबर के फायदों में मल को आंत से आगे बढ़ाने में मदद करना और लाभकारी आंत बैक्टीरिया को पोषण देना शामिल है। फाइबर के स्रोतों में फल, सब्जियां, दालें, बीन्स, नट्स, बीज और साबुत अनाज शामिल हैं।
हालांकि, यहां एक जरूरी बात है। नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के अनुसार केवल फल-सब्जियों और फाइबर वाली डाइट से कोलोरेक्टल कैंसर का जोखिम निश्चित रूप से कितना कम होता है, इस पर सभी शोध एकमत नहीं हैं। इसलिए इसे कैंसर से बचाव का अकेला उपाय नहीं माना जाना चाहिए।
डाइट में कौन से फल और सब्जियां शामिल करें?
रोजाना अलग-अलग रंगों और किस्मों के फल-सब्जियां खाने से कई तरह के पोषक तत्व और फाइबर मिल सकते हैं। डाइट में कीवी, सेब, अमरूद, संतरा, पपीता, बेरीज, गाजर, पालक, ब्रोकली, फूलगोभी, पत्तागोभी, टमाटर और अन्य गैर-स्टार्च वाली सब्जियों को शामिल किया जा सकता है।
कीवी
कीवी फाइबर और विटामिन सी का स्रोत है। इसे संतुलित डाइट में शामिल करने से फाइबर का सेवन बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
हरी पत्तेदार सब्जियां
पालक और दूसरी हरी पत्तेदार सब्जियां फाइबर तथा विभिन्न माइक्रोन्यूट्रिएंट्स उपलब्ध कराती हैं। इन्हें सलाद, सब्जी या अन्य संतुलित भोजन का हिस्सा बनाया जा सकता है।
ब्रोकली और दूसरी क्रूसीफेरस सब्जियां
ब्रोकली, फूलगोभी और पत्तागोभी जैसी सब्जियां फाइबर और विभिन्न प्राकृतिक प्लांट कंपाउंड का स्रोत हैं। विश्व कैंसर अनुसंधान कोष भी गैर-स्टार्च वाली सब्जियों को नियमित डाइट का हिस्सा बनाने की सलाह देता है।
फल के साथ साबुत अनाज और दालें भी जरूरी
सिर्फ फलों पर निर्भर रहने के बजाय डाइट में साबुत अनाज, दालें, बीन्स और अन्य फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ भी शामिल करना बेहतर है। विश्व कैंसर अनुसंधान कोष रोजाना भोजन में साबुत अनाज, सब्जियां, फल और दालों को प्रमुख स्थान देने की सलाह देता है और भोजन से करीब 30 ग्राम फाइबर प्रतिदिन लेने का लक्ष्य बताता है।
सिर्फ डाइट नहीं, ये आदतें भी हैं जरूरी
कोलोरेक्टल कैंसर के जोखिम को कम करने के लिए संतुलित भोजन के साथ नियमित शारीरिक गतिविधि, स्वस्थ वजन बनाए रखना, धूम्रपान से दूरी और शराब से परहेज या उसका सेवन कम करना भी महत्वपूर्ण है। अमेरिकन कैंसर सोसाइटी के अनुसार नियमित मध्यम से तेज शारीरिक गतिविधि कोलोरेक्टल कैंसर और पॉलीप्स के कम जोखिम से जुड़ी है।
इसके अलावा उम्र और व्यक्तिगत जोखिम के अनुसार स्क्रीनिंग भी बेहद महत्वपूर्ण है। अमेरिकन कैंसर सोसाइटी औसत जोखिम वाले लोगों के लिए 45 वर्ष की उम्र से कोलोरेक्टल कैंसर स्क्रीनिंग शुरू करने की सलाह देती है। पारिवारिक इतिहास या अन्य जोखिम होने पर डॉक्टर से पहले स्क्रीनिंग की जरूरत के बारे में बात करनी चाहिए।
निष्कर्ष
कोलोरेक्टल कैंसर से बचाव के लिए कोई एक जादुई भोजन या एक आसान नुस्खा नहीं है। लेकिन रोजाना फल, सब्जियां, साबुत अनाज और दालों जैसे फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों को डाइट का अहम हिस्सा बनाना, रेड और प्रोसेस्ड मीट को सीमित करना, शारीरिक रूप से सक्रिय रहना और स्वस्थ वजन बनाए रखना समग्र जोखिम कम करने की दिशा में उपयोगी कदम हो सकते हैं। उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाणों में फाइबर और साबुत अनाज के लिए बाउल/कोलोरेक्टल कैंसर के जोखिम को कम करने का मजबूत समर्थन मिलता है, जबकि फल-सब्जियों के सीधे प्रभाव को लेकर प्रमाण अधिक मिश्रित हैं।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। कैंसर के लक्षण, पारिवारिक इतिहास या व्यक्तिगत जोखिम होने पर डॉक्टर से सलाह और उचित स्क्रीनिंग कराना जरूरी है।
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