Butter Side Effects: क्या रोजाना मक्खन खाना बढ़ा सकता है बैड कोलेस्ट्रॉल? जानिए किन लोगों के लिए बन सकता है दिल का सबसे बड़ा दुश्मन

Butter and Cholesterol: मक्खन भारतीय रसोई का अहम हिस्सा है। पराठे से लेकर टोस्ट और कई व्यंजनों का स्वाद बढ़ाने वाला यह खाद्य पदार्थ सेहत के लिए कितना सुरक्षित है, इसे लेकर अक्सर सवाल उठते रहते हैं। खासकर उन लोगों के मन में यह चिंता अधिक रहती है जिनका कोलेस्ट्रॉल पहले से बढ़ा हुआ है या जो हृदय संबंधी बीमारियों के जोखिम में हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मक्खन पूरी तरह नुकसानदायक नहीं है, लेकिन इसका अधिक सेवन कई लोगों के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है।

मक्खन में मौजूद फैट क्यों बढ़ा सकता है जोखिम?

हृदय रोग विशेषज्ञों के अनुसार मक्खन में सैचुरेटेड फैट अच्छी मात्रा में पाया जाता है। यदि इसे नियमित रूप से अधिक मात्रा में खाया जाए तो शरीर में LDL यानी बैड कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ सकता है। यही बैड कोलेस्ट्रॉल धमनियों में जमा होकर हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ा सकता है।

हालांकि, यदि कोई व्यक्ति संतुलित आहार लेता है, नियमित व्यायाम करता है और सीमित मात्रा में मक्खन का सेवन करता है, तो अधिकांश स्वस्थ लोगों के लिए यह बड़ी समस्या नहीं बनता।

किन लोगों को सबसे ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए?

विशेषज्ञों का कहना है कि जिन लोगों को पहले से हाई कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, मोटापा या हृदय रोग है, उन्हें मक्खन का सेवन सोच-समझकर करना चाहिए। जिनके परिवार में हार्ट डिजीज की हिस्ट्री रही है, उनके लिए भी अधिक मात्रा में मक्खन खाना जोखिम बढ़ा सकता है।

इसके अलावा, यदि किसी व्यक्ति की जीवनशैली निष्क्रिय है, वह नियमित एक्सरसाइज नहीं करता और अक्सर ज्यादा फैट वाले खाद्य पदार्थ खाता है, तो मक्खन उसके लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।

बाजार का मक्खन या घर का, किसे माना जाता है बेहतर?

विशेषज्ञों का मानना है कि बाहर मिलने वाले कई खाद्य पदार्थों में जरूरत से ज्यादा मक्खन का इस्तेमाल किया जाता है। स्ट्रीट फूड या रेस्टोरेंट में इस्तेमाल होने वाला अतिरिक्त मक्खन शरीर में कैलोरी और फैट की मात्रा बढ़ा सकता है। ऐसे में यदि मक्खन खाना ही हो तो सीमित मात्रा में घर का बना या नियंत्रित मात्रा में इस्तेमाल किया गया मक्खन बेहतर विकल्प माना जाता है।

हेल्दी फैट को दें प्राथमिकता

डॉक्टर सलाह देते हैं कि रोजमर्रा की डाइट में अनसैचुरेटेड फैट को अधिक महत्व देना चाहिए। इसके लिए सरसों का तेल, ऑलिव ऑयल, मूंगफली का तेल, बादाम, अखरोट और विभिन्न बीज बेहतर विकल्प माने जाते हैं। ये हृदय स्वास्थ्य के लिए अपेक्षाकृत अधिक लाभकारी हो सकते हैं।

कब बढ़ जाता है हार्ट डिजीज का खतरा?

विशेषज्ञों के मुताबिक यदि कुल कोलेस्ट्रॉल 200 mg/dL या उससे अधिक हो जाए तो सावधानी जरूरी हो जाती है। वहीं LDL का स्तर 100 mg/dL से ऊपर जाने पर जीवनशैली और खानपान पर विशेष ध्यान देना चाहिए। यदि यह काफी अधिक बढ़ जाए तो डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी माना जाता है।

कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल रखने के आसान उपाय

  • रोज कम से कम 30 मिनट शारीरिक गतिविधि या एक्सरसाइज करें।
  • मक्खन, घी और ज्यादा फैट वाले खाद्य पदार्थ सीमित मात्रा में खाएं।
  • जंक फूड और स्ट्रीट फूड का सेवन कम करें।
  • वजन नियंत्रित रखें।
  • संतुलित और पौष्टिक आहार अपनाएं।
  • समय-समय पर लिपिड प्रोफाइल की जांच कराते रहें।

निष्कर्ष

मक्खन पूरी तरह से नुकसानदायक नहीं है, लेकिन इसकी मात्रा और आपकी जीवनशैली तय करती है कि यह शरीर के लिए फायदेमंद रहेगा या नुकसान पहुंचाएगा। यदि पहले से हाई कोलेस्ट्रॉल या हृदय रोग की समस्या है, तो मक्खन का सेवन डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही करना बेहतर माना जाता है।

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