
नई दिल्ली: दक्षिण एशिया की बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच अमेरिका की रणनीति को लेकर नई बहस छिड़ गई है। विदेश मामलों के विशेषज्ञ और जियोपॉलिटिकल विश्लेषक ब्रह्म चेलानी ने दावा किया है कि अमेरिका भविष्य में भारत को एक संभावित आर्थिक और रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी के रूप में देख रहा है। उनका कहना है कि इसी वजह से वॉशिंगटन एक बार फिर पाकिस्तान के साथ अपने संबंध मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
भारत के बढ़ते प्रभाव को लेकर जताई चिंता
ब्रह्म चेलानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किए गए अपने विचारों में कहा कि दक्षिण एशिया के प्रति अमेरिका की नीति एक बार फिर शीत युद्ध के दौर की रणनीति जैसी दिखाई देने लगी है। उनके अनुसार, अमेरिका क्षेत्रीय समीकरणों को इस तरह से साधने की कोशिश कर रहा है जिससे भारत के बढ़ते प्रभाव को सीमित किया जा सके।
उन्होंने लिखा कि वॉशिंगटन पाकिस्तान के साथ रिश्तों को फिर से मजबूत कर रहा है और इसके पीछे व्यापक क्षेत्रीय रणनीति काम कर रही है। उनका मानना है कि अमेरिका नहीं चाहता कि भारत भविष्य में चीन की तरह आर्थिक और रणनीतिक चुनौती बनकर उभरे।
अमेरिकी उप विदेश मंत्री के बयान का किया उल्लेख
ब्रह्म चेलानी ने अपने पोस्ट में मार्च महीने में भारत दौरे पर आए अमेरिकी उप विदेश मंत्री के एक बयान का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, उस दौरान यह संकेत दिया गया था कि अमेरिका चीन के मामले में हुई अपनी पिछली रणनीतिक भूल को दोहराना नहीं चाहता और भारत को भी भविष्य में अमेरिका का बड़ा आर्थिक प्रतिद्वंद्वी बनने से रोकने की दिशा में सोच रहा है।
विशेषज्ञ का कहना है कि इस तरह के बयान रणनीतिक हलकों में गंभीर चर्चा का विषय बने हुए हैं।
क्या बदल रही है अमेरिका-भारत संबंधों की दिशा?
ब्रह्म चेलानी का मानना है कि हालिया घटनाक्रम यह संकेत देते हैं कि अमेरिका की विदेश नीति में बदलाव देखने को मिल सकता है। उन्होंने कहा कि चीन के प्रति अपेक्षाकृत नरम रुख और पाकिस्तान के साथ बढ़ती नजदीकियां यह दर्शाती हैं कि वॉशिंगटन अब उन साझा लोकतांत्रिक मूल्यों को पहले जैसी प्राथमिकता नहीं दे रहा, जिनके आधार पर पिछले दो दशकों में भारत और अमेरिका के रिश्ते मजबूत हुए थे।
उनके अनुसार, यदि यह रणनीतिक बदलाव आगे भी जारी रहता है तो दक्षिण एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति और भारत-अमेरिका संबंधों पर इसका असर देखने को मिल सकता है।
विशेषज्ञ के दावों पर आधिकारिक पुष्टि नहीं
हालांकि, यह ध्यान देने योग्य है कि ब्रह्म चेलानी द्वारा व्यक्त किए गए विचार उनके व्यक्तिगत रणनीतिक विश्लेषण हैं। अमेरिका या भारत सरकार की ओर से इन दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में इन टिप्पणियों को विशेषज्ञ की राय के रूप में देखा जाना चाहिए।
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