Jyeshtha Purnima 2026: हिंदू धर्म में ज्येष्ठ पूर्णिमा का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। यह दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और चंद्र देव की पूजा-अर्चना के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इसी दिन वट पूर्णिमा व्रत भी रखा जाता है, जिसमें विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना के साथ बरगद के वृक्ष की पूजा करती हैं।
ज्येष्ठ पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
सनातन परंपरा के अनुसार ज्येष्ठ पूर्णिमा पुण्य फल प्रदान करने वाली तिथियों में शामिल है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से घर में सुख, समृद्धि और धन-धान्य की वृद्धि होती है। वहीं चंद्र देव की आराधना करने से मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और जीवन में संतुलन बना रहता है।
वट पूर्णिमा के रूप में भी मनाई जाती है यह तिथि
ज्येष्ठ पूर्णिमा को कई स्थानों पर वट पूर्णिमा के रूप में मनाने की परंपरा है। इस अवसर पर सुहागिन महिलाएं बरगद के वृक्ष की विधि-विधान से पूजा करती हैं और उसके चारों ओर धागा बांधकर पति की लंबी उम्र तथा वैवाहिक जीवन की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत का पालन करने से दांपत्य जीवन में खुशहाली बनी रहती है।
ज्येष्ठ पूर्णिमा 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
- तिथि: 29 जून 2026, सोमवार
- पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 29 जून को सुबह 03:06 बजे
धार्मिक कार्यों, पूजा-पाठ और व्रत के लिए पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। श्रद्धालु इस दिन स्नान, दान, जप और पूजा कर पुण्य लाभ प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।
इस दिन किन देवी-देवताओं की करें पूजा
ज्येष्ठ पूर्णिमा पर भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और चंद्र देव की पूजा करना शुभ माना जाता है। इसके साथ ही वट वृक्ष की पूजा का भी विशेष महत्व है। मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से की गई पूजा से परिवार में सुख-समृद्धि, आर्थिक उन्नति और वैवाहिक जीवन में खुशहाली बनी रहती है।
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