पैरों में दर्द और जलन को न करें नजरअंदाज, लाल होकर तपने लगते हैं पैर तो हो सकती है एरिथ्रोमेलैल्जिया; जानें लक्षण, कारण और इलाज

पैरों में दर्द, जलन या गर्माहट को अक्सर थकान, ज्यादा चलने या मौसम का असर समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। लेकिन अगर पैरों में बार-बार तेज जलन के साथ त्वचा लाल पड़ने लगे, पैर असामान्य रूप से गर्म महसूस हों और कभी-कभी सूजन भी दिखाई दे, तो इसे केवल सामान्य समस्या मानना ठीक नहीं है। ऐसे लक्षण एक दुर्लभ बीमारी एरिथ्रोमेलैल्जिया (Erythromelalgia) से जुड़े हो सकते हैं। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें पैरों या हाथों में दर्द, जलन, लालिमा और त्वचा का तापमान बढ़ने जैसी समस्या हो सकती है।

क्या है एरिथ्रोमेलैल्जिया?

एरिथ्रोमेलैल्जिया एक दुर्लभ न्यूरोवैस्कुलर विकार है, जिसमें शरीर के प्रभावित हिस्से में रक्त प्रवाह और दर्द से जुड़ी नसों की कार्यप्रणाली में असामान्यता के कारण लक्षण उभर सकते हैं। यह बीमारी सबसे ज्यादा पैरों को प्रभावित करती है, हालांकि हाथ, पैर के निचले हिस्से, चेहरे या शरीर के अन्य हिस्सों में भी इसके लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इसके लक्षण कुछ समय के लिए उभर सकते हैं और फिर कम हो सकते हैं।

इस बीमारी की खासियत यह है कि इसके दौरान प्रभावित हिस्से में त्वचा लाल होने के साथ तेज जलन और गर्माहट महसूस हो सकती है। कई लोगों में दर्द इतना ज्यादा हो सकता है कि चलने, सोने या रोजमर्रा के काम करने में परेशानी होने लगती है।

पैरों में जलन के साथ दिखें ये लक्षण तो रहें सतर्क

एरिथ्रोमेलैल्जिया के तीन प्रमुख लक्षणों में त्वचा का लाल होना, त्वचा का तापमान बढ़ना और जलन वाला दर्द शामिल हैं। इसके अलावा प्रभावित हिस्से में सूजन, संवेदनशीलता, झुनझुनी, खुजली और अधिक पसीना आने जैसी शिकायत भी हो सकती है। लक्षण एक पैर या दोनों पैरों में दिखाई दे सकते हैं।

कुछ लोगों में यह समस्या अचानक बढ़ जाती है। गर्म वातावरण, व्यायाम, तनाव, शराब, कैफीन, मसालेदार भोजन या शरीर का तापमान बढ़ाने वाली परिस्थितियां लक्षणों को ट्रिगर कर सकती हैं। प्रभावित पैर को नीचे रखने से भी कुछ लोगों में परेशानी बढ़ सकती है, जबकि ठंडे वातावरण और पैर ऊपर रखने से राहत मिल सकती है।

हर बार पैरों में जलन का मतलब एरिथ्रोमेलैल्जिया नहीं

पैरों में जलन कई दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत भी हो सकती है। उदाहरण के लिए डायबिटीज से जुड़ा नर्व डैमेज यानी डायबिटिक न्यूरोपैथी, विटामिन की कमी, थायरॉयड की समस्या, किडनी की बीमारी, फंगल इंफेक्शन और दूसरी नसों से संबंधित समस्याएं भी पैरों में जलन पैदा कर सकती हैं। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर खुद से एरिथ्रोमेलैल्जिया का निष्कर्ष निकालना सही नहीं है।

मायो क्लिनिक के अनुसार पैरों में लगातार या बढ़ती हुई जलन कई बार पेरिफेरल न्यूरोपैथी से जुड़ी हो सकती है, जिसमें पैरों में जलन, झुनझुनी, सुन्नपन या तेज दर्द महसूस हो सकता है। इसलिए लगातार बने रहने वाले लक्षणों की चिकित्सकीय जांच जरूरी है।

क्यों होती है यह बीमारी?

एरिथ्रोमेलैल्जिया के सभी मामलों में एक ही कारण नहीं होता। यह बीमारी प्राथमिक या द्वितीयक रूप में सामने आ सकती है। प्राथमिक एरिथ्रोमेलैल्जिया कुछ मामलों में आनुवंशिक बदलाव से जुड़ी हो सकती है, जबकि कुछ मामलों में इसका स्पष्ट कारण पता नहीं चलता। वहीं सेकेंडरी एरिथ्रोमेलैल्जिया किसी अन्य बीमारी या स्वास्थ्य समस्या से जुड़ी हो सकती है।

कुछ मामलों में रक्त संबंधी बीमारियां, ऑटोइम्यून स्थितियां, न्यूरोपैथी और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं इसके साथ जुड़ी पाई गई हैं। इसलिए डॉक्टर मरीज के लक्षणों के साथ उसकी पूरी मेडिकल हिस्ट्री को ध्यान में रखकर कारण तलाशते हैं।

डॉक्टर कैसे करते हैं एरिथ्रोमेलैल्जिया की पहचान?

एरिथ्रोमेलैल्जिया की पहचान के लिए कोई एक ऐसा टेस्ट नहीं है जो अकेले बीमारी की पुष्टि कर दे। डॉक्टर आमतौर पर मरीज के लक्षणों, मेडिकल हिस्ट्री और शारीरिक जांच के आधार पर स्थिति को समझते हैं। यदि उस समय लक्षण दिखाई दे रहे हों तो प्रभावित हिस्से की लालिमा, गर्माहट और अन्य बदलावों की जांच की जा सकती है। कई बार मरीज को लक्षणों के दौरान त्वचा की तस्वीरें रखने की सलाह भी दी जा सकती है।

डॉक्टर जरूरत के अनुसार ब्लड टेस्ट, जेनेटिक टेस्ट, थर्मोग्राफी या अन्य जांचों की मदद ले सकते हैं। इन जांचों का उद्देश्य एरिथ्रोमेलैल्जिया से जुड़ी संभावित वजहों को तलाशने और दूसरी बीमारियों को बाहर करने में मदद करना होता है।

इलाज कैसे होता है?

एरिथ्रोमेलैल्जिया का इलाज हर मरीज में एक जैसा नहीं होता। यदि यह किसी दूसरी बीमारी के कारण सेकेंडरी रूप में हुआ है, तो डॉक्टर सबसे पहले उस मूल समस्या का इलाज करने की कोशिश कर सकते हैं। प्राथमिक एरिथ्रोमेलैल्जिया में लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए अलग-अलग दवाओं और दर्द प्रबंधन की रणनीतियों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

डॉक्टर कुछ मरीजों में नसों के दर्द को कम करने वाली दवाएं, एंटीडिप्रेसेंट, एंटीहिस्टामिन, रक्त प्रवाह को प्रभावित करने वाली दवाएं या अन्य उपचार विकल्पों पर विचार कर सकते हैं। कुछ मामलों में स्थानीय दवाएं, लिडोकेन जैसी थेरेपी या दर्द प्रबंधन से जुड़े उपचार भी इस्तेमाल किए जाते हैं। कौन-सा उपचार उपयुक्त होगा, यह बीमारी के कारण और मरीज की स्थिति पर निर्भर करता है।

राहत के लिए क्या सावधानी बरतें?

लक्षणों को बढ़ाने वाली परिस्थितियों की पहचान करना उपयोगी हो सकता है। गर्म वातावरण, अत्यधिक व्यायाम, शराब, कैफीन और मसालेदार भोजन कुछ लोगों में फ्लेयर-अप को बढ़ा सकते हैं। हल्की गतिविधियां, शरीर को ज्यादा गर्म होने से बचाना और प्रभावित हिस्से को आराम देना कुछ लोगों में मददगार हो सकता है।

हालांकि दर्द या जलन होने पर पैरों को सीधे बर्फ या बर्फीले पानी में रखने से बचना चाहिए। बहुत ज्यादा ठंड त्वचा को नुकसान पहुंचा सकती है और घाव या अन्य जटिलताओं का जोखिम बढ़ा सकती है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह के अनुसार सुरक्षित तरीके से ठंडक दी जा सकती है।

कब डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए?

अगर पैरों में जलन लगातार बनी रहती है, तेजी से बढ़ रही है, पैरों या उंगलियों में सुन्नपन आने लगा है या जलन ऊपर की ओर फैल रही है, तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। अचानक शुरू हुई तेज जलन, खासकर किसी जहरीले पदार्थ के संपर्क के बाद, या डायबिटीज के साथ पैर में संक्रमित घाव होने पर तत्काल चिकित्सा सहायता की जरूरत हो सकती है।

जरूरी बात: पैरों में दर्द और जलन कई अलग-अलग कारणों से हो सकती है। इसलिए इसे देखकर खुद से एरिथ्रोमेलैल्जिया की दवा लेना उचित नहीं है। सही कारण जानने के लिए डॉक्टर से जांच कराना सबसे सुरक्षित तरीका है।

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