
काठमांडू। नेपाल-तिब्बत सीमा पर ग्लेशियर टूटने के बाद आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। हादसे के 11 दिन बाद पहली बार अंतरराष्ट्रीय मीडिया को आपदा से प्रभावित तिब्बत के इलाकों का दौरा करने की अनुमति मिली है। चीन के विदेश मंत्रालय की ओर से रविवार को रॉयटर्स समेत कई विदेशी मीडिया संस्थानों के पत्रकारों को ग्यिरोंग बॉर्डर क्रॉसिंग का दौरा कराया गया।
26 अगस्त को पानी, कीचड़ और मलबे की बेहद तेज लहर ने सीमा से सटे इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया था। इस प्राकृतिक आपदा का असर चीन के तिब्बत क्षेत्र से लेकर नेपाल तक देखा गया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, चीन और नेपाल को मिलाकर हादसे में 1,300 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 5,000 से ज्यादा लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।
ग्यिरोंग पोर्ट पर हर तरफ दिखी तबाही
विदेशी पत्रकारों को जिस ग्यिरोंग बॉर्डर क्रॉसिंग और पोर्ट का दौरा कराया गया, वह बाढ़ और मलबे से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। घटनास्थल पर बड़े पैमाने पर मलबा जमा है और बचावकर्मी लगातार उसमें लोगों की तलाश कर रहे हैं। कई हिस्सों में बाढ़ के बाद हुए नुकसान के निशान अब भी साफ दिखाई दे रहे हैं।
चीनी अधिकारियों ने विदेशी पत्रकारों को आपदा की स्थिति और राहत-बचाव अभियान के बारे में जानकारी दी। दौरे के दौरान अधिकारियों और वैज्ञानिकों ने प्रभावित क्षेत्र का नक्शा दिखाकर हादसे से जुड़े घटनाक्रम को समझाया।
26 अगस्त को आई थी मलबे की तेज लहर
नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में 26 अगस्त को ग्लेशियर टूटने के बाद पानी और मलबे की तेज धार ने व्यापक नुकसान पहुंचाया। अचानक आई बाढ़ ने अपने रास्ते में आने वाले इलाकों को प्रभावित किया और बड़ी संख्या में लोग इसकी चपेट में आए।
हादसे के बाद से ही लापता लोगों की तलाश जारी है। नेपाल में हजारों लोगों के अब तक नहीं मिलने से राहत और बचाव अभियान पर दबाव बना हुआ है। चीन की ओर से भी प्रभावित क्षेत्र में बचावकर्मियों को तैनात किया गया है।
चीनी अधिकारियों ने विदेशी मीडिया को दी जानकारी
चीन के विदेश मंत्रालय की ओर से कराए गए इस दौरे के दौरान पत्रकारों को प्रभावित क्षेत्र की स्थिति को करीब से देखने का मौका मिला। चीनी अधिकारियों ने ग्यिरोंग पोर्ट में हुई तबाही के बारे में जानकारी दी। चीनी वैज्ञानिक सु पेंगचेंग ने भी आपदा से जुड़े पहलुओं और सीमा क्षेत्र की स्थिति के बारे में पत्रकारों को बताया।
ग्यिरोंग पोर्ट के सबसे ज्यादा प्रभावित हिस्सों में बचावकर्मी मलबे के बीच तलाश अभियान चलाते नजर आए। इलाके में जगह-जगह बाढ़ के कारण जमा हुआ मलबा आपदा की गंभीरता को दिखा रहा है।
नेपाल में 5 हजार से ज्यादा लोगों का अब भी पता नहीं
इस आपदा के बाद नेपाल में लापता लोगों की संख्या चिंता का बड़ा कारण बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल और चीन में कुल मिलाकर 1,300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 5,000 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं।
नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई इस बाढ़ ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर से जुड़ी प्राकृतिक आपदाओं के खतरे को सामने ला दिया है। फिलहाल प्रभावित इलाकों में बचावकर्मी मलबे में फंसे या लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं।
तस्वीरों में दिखी ग्यिरोंग पोर्ट की भयावह स्थिति
ग्यिरोंग पोर्ट से सामने आई तस्वीरों में चीनी अधिकारी विदेशी पत्रकारों को बाढ़ से हुए नुकसान की जानकारी देते दिखाई दिए। एक तस्वीर में चीनी वैज्ञानिक सु पेंगचेंग सीमा क्षेत्र का नक्शा दिखाते नजर आए। वहीं दूसरी तस्वीरों में बचावकर्मी चीनी झंडे के पास और सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में मलबे के बीच लोगों की तलाश करते दिखे।
बाढ़ के कई दिन बीत जाने के बावजूद प्रभावित क्षेत्र में मलबा बड़े पैमाने पर मौजूद है। ऐसे में लापता लोगों की तलाश अभी भी बचाव अभियान का सबसे अहम हिस्सा बनी हुई है।
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