
Bach Baras 2026: आज यानी 7 सितंबर 2026 को बछ बारस का पर्व मनाया जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह पर्व भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाया जाता है। इसे गोवत्स द्वादशी और कई स्थानों पर बछ वारस के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन गाय और उसके बछड़े की पूजा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बछ बारस का संबंध भगवान श्रीकृष्ण की गोचारण लीला से भी जुड़ा है। माना जाता है कि इसी दिन बाल कृष्ण पहली बार गायों को चराने के लिए गए थे।
भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी है बछ बारस की मान्यता
धार्मिक परंपराओं में बछ बारस को भगवान श्रीकृष्ण की गोचारण लीला से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि बाल्यकाल में श्रीकृष्ण ने इसी अवसर पर पहली बार गायों को चराने की शुरुआत की थी। यही वजह है कि इस पर्व पर गौ माता के साथ भगवान श्रीकृष्ण की पूजा का भी विशेष महत्व माना जाता है। कई कृष्ण मंदिरों में इस दिन भगवान की गोचारण लीला से जुड़ी झांकियां भी सजाई जाती हैं।
संतान की लंबी आयु के लिए रखा जाता है व्रत
बछ बारस का व्रत विशेष रूप से माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना से रखती हैं। इस दिन श्रद्धालु गाय और बछड़े की पूजा कर परिवार के कल्याण की प्रार्थना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं में गाय को पूजनीय माना गया है और गोवत्स यानी गाय-बछड़े की पूजा को संतान की रक्षा और परिवार की खुशहाली से जोड़कर देखा जाता है।
गाय और बछड़े की पूजा का विधान
बछ बारस के दिन सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प लिया जाता है। इसके बाद गाय और बछड़े को स्वच्छ जल से स्नान कराया जाता है या जल का छिड़काव किया जाता है। उनके माथे पर रोली-अक्षत से तिलक लगाने, माला और वस्त्र अर्पित करने तथा श्रद्धापूर्वक पूजा करने की परंपरा है। पूजा के दौरान अंकुरित मूंग, मोठ और बाजरा जैसे अनाज का नैवेद्य अर्पित किया जाता है। इसके बाद कथा सुनकर आरती की जाती है।
बछ बारस पर खान-पान के भी हैं नियम
इस पर्व से जुड़ी परंपराओं में खान-पान के कुछ विशेष नियम बताए गए हैं। कई मान्यताओं के अनुसार व्रत रखने वाले लोग मूंग, मोठ और बाजरे जैसे अनाज का सेवन करते हैं। गाय के दूध और उससे बने उत्पादों से परहेज करने की परंपरा भी बताई गई है। कुछ क्षेत्रों में गेहूं तथा चाकू से काटी गई चीजों का सेवन न करने की मान्यता है। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में व्रत के नियमों में अंतर हो सकता है।
बछ बारस 2026 की तिथि और द्वादशी का समय
पंचांग संबंधी गणना के अनुसार इस वर्ष बछ बारस 7 सितंबर 2026 को है। द्वादशी तिथि 7 सितंबर की शाम करीब 5:03 बजे शुरू होकर 8 सितंबर को दोपहर 2:42 बजे तक रहने की जानकारी दी गई है। अलग-अलग शहरों में पूजा के मुहूर्त में थोड़ा अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग के अनुसार समय देखना उचित माना जाता है। बछ बारस केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि गौ सेवा, मातृत्व और संतान के कल्याण की कामना से जुड़ी परंपराओं का भी प्रतीक माना जाता है। इसी कारण देश के अलग-अलग हिस्सों में इसे श्रद्धा और पारंपरिक विधि-विधान के साथ मनाया जाता है।
Hindustan Awaaz – Hindustan Newspaper, ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, देश-दुनिया