
नई दिल्ली: परिवार में किसी सदस्य की मृत्यु के बाद उसकी संपत्ति, बैंक खाते, शेयर, म्यूचुअल फंड और गहने उत्तराधिकारियों के नाम कराने की प्रक्रिया को लेकर बड़ी संख्या में परिवारों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लोकल सर्किल्स के एक सर्वे में सामने आया है कि मृतक की संपत्ति अपने नाम कराने की प्रक्रिया हर परिवार के लिए आसान नहीं रही। सर्वे में शामिल 32 हजार से अधिक लोगों के जवाबों में सिर्फ 32 प्रतिशत परिवारों ने कहा कि वे बिना खास परेशानी के संपत्ति ट्रांसफर करा सके। वहीं, 58 प्रतिशत परिवारों ने दावा किया कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान उन्हें किसी न किसी स्तर पर रिश्वत देनी पड़ी।
58% परिवारों ने रिश्वत देने का किया दावा
सर्वे के मुताबिक, संपत्ति ट्रांसफर कराने की प्रक्रिया से गुजरने वाले परिवारों में 58 प्रतिशत ने किसी न किसी जगह रिश्वत दिए जाने की बात कही। इनमें 29 प्रतिशत परिवारों का कहना था कि उन्हें एक या दो जगह भुगतान करना पड़ा, जबकि अन्य 29 प्रतिशत परिवारों ने दावा किया कि प्रक्रिया पूरी कराने के लिए उन्हें कई जगह रिश्वत देनी पड़ी। ये आंकड़े बताते हैं कि परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु के बाद उत्तराधिकार संबंधी औपचारिकताएं पूरी करना कई लोगों के लिए प्रशासनिक और प्रक्रियात्मक चुनौती बनी हुई हैं।
रजिस्टर्ड वसीयत से कई परिवारों का काम हुआ आसान
सर्वे में वसीयत की भूमिका को लेकर भी महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आए। 21 प्रतिशत परिवारों ने बताया कि मृतक की रजिस्टर्ड वसीयत होने के कारण संपत्ति ट्रांसफर कराने की प्रक्रिया उनके लिए आसान रही। इससे संकेत मिलता है कि पहले से तैयार और पंजीकृत वसीयत उत्तराधिकार से जुड़े कई मामलों में प्रक्रिया को सरल बनाने में मदद कर सकती है।
हालांकि, सिर्फ वसीयत का मौजूद होना हर मामले में पर्याप्त साबित नहीं हुआ। सर्वे में 21 प्रतिशत परिवार ऐसे भी थे, जिन्होंने बताया कि रजिस्टर्ड वसीयत होने के बावजूद संपत्ति ट्रांसफर की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हो सकी है।
वसीयत नहीं होने पर बढ़ी परेशानी
वसीयत न होने का असर भी सर्वे के आंकड़ों में साफ दिखाई देता है। 16 प्रतिशत परिवारों ने बताया कि रजिस्टर्ड वसीयत नहीं होने के कारण उन्हें संपत्ति ट्रांसफर कराने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। वहीं, 16 प्रतिशत अन्य मामलों में वसीयत के अभाव में ट्रांसफर की प्रक्रिया ही रुक गई।
इससे पता चलता है कि उत्तराधिकार से जुड़े दस्तावेजों की कमी परिवारों के लिए बाद में बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है। संपत्ति के अलावा बैंक खातों, शेयर और अन्य वित्तीय निवेशों को उत्तराधिकारी के नाम कराने में भी जरूरी दस्तावेज और प्रक्रियाएं पूरी करनी पड़ती हैं।
11% मामलों में वसीयत नहीं थी, फिर भी ट्रांसफर हुआ
सर्वे में कुछ ऐसे मामले भी सामने आए जहां रजिस्टर्ड वसीयत मौजूद नहीं थी, लेकिन परिवार संपत्ति ट्रांसफर कराने में सफल रहा। 11 प्रतिशत परिवारों ने बताया कि उनके पास रजिस्टर्ड वसीयत नहीं थी, इसके बावजूद संपत्ति का ट्रांसफर हो गया।
वहीं, 10 प्रतिशत परिवारों ने कहा कि उन्होंने अभी तक संपत्ति ट्रांसफर कराने की प्रक्रिया शुरू ही नहीं की है। जबकि 5 प्रतिशत लोग इस सवाल पर स्पष्ट जानकारी नहीं दे सके।
सर्वे में सामने आई उत्तराधिकार प्रक्रिया की तस्वीर
लोकल सर्किल्स के इस सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि किसी परिजन की मृत्यु के बाद उनकी संपत्ति और वित्तीय परिसंपत्तियों को उत्तराधिकारियों के नाम कराने की प्रक्रिया कई परिवारों के लिए जटिल बनी हुई है। एक तरफ रजिस्टर्ड वसीयत होने से कुछ परिवारों को राहत मिली, वहीं कई मामलों में वसीयत होने के बावजूद प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। दूसरी ओर, वसीयत न होने पर बड़ी संख्या में परिवारों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
सर्वे में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक 32 प्रतिशत परिवारों ने संपत्ति ट्रांसफर की प्रक्रिया को आसान बताया, जबकि 58 प्रतिशत ने किसी न किसी स्तर पर रिश्वत दिए जाने का दावा किया। ऐसे में उत्तराधिकार प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सरल बनाने की जरूरत पर सवाल उठते हैं।
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