Sadhguru का बड़ा दावा: काले कपड़े पहनने से बढ़ सकती हैं मानसिक परेशानियां, जानिए क्या है इसके पीछे की वजह

Sadhguru Quote On Black Clothes: आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने काले रंग के कपड़ों को लेकर एक खास बात कही है। उनका कहना है कि लंबे समय तक हर परिस्थिति में काले कपड़े पहनने से कुछ लोगों में मानसिक परेशानियां बढ़ सकती हैं। सद्गुरु के अनुसार, काला रंग ऊर्जा और भावनाओं को अपने अंदर खींचने की क्षमता रखता है।

मानसिक स्वास्थ्य का सीधा संबंध हमारी भावनाओं और सोचने के तरीके से जुड़ा होता है। जब इंसान लगातार तनाव, उदासी, चिड़चिड़ापन या नकारात्मक विचारों से घिरा रहता है तो इसका असर उसकी मानसिक और शारीरिक सेहत दोनों पर पड़ सकता है। आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु जग्गी वासुदेव का मानना है कि जीवनशैली की कुछ छोटी-छोटी आदतें भी हमारी मानसिक स्थिति को प्रभावित कर सकती हैं।

काले रंग के कपड़ों को लेकर सद्गुरु ने कही ये बात

सद्गुरु के मुताबिक, काला रंग हर तरह की चीजों को अपने अंदर समाहित करने की क्षमता रखता है। उनका कहना है कि अगर कोई व्यक्ति ऐसी जगह पर जा रहा है जहां वह आसपास की ऊर्जा और भावनाओं को ग्रहण करना चाहता है तो काले रंग के कपड़े उपयोगी हो सकते हैं। लेकिन सामान्य जीवन में हर समय काले कपड़े पहनना कुछ लोगों के लिए मानसिक रूप से परेशानी का कारण बन सकता है।

उन्होंने समझाया कि कई बार लोग केवल फैशन, स्लिम दिखने या पसंद की वजह से लगातार काले कपड़े पहनते हैं, लेकिन इस दौरान वे आसपास की सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह की ऊर्जा को अपने भीतर लेने लगते हैं।

20 से 25 प्रतिशत मानसिक परेशानियों का कारण काले कपड़े?

सद्गुरु ने दावा किया कि उनके अनुसार लोगों की 20 से 25 प्रतिशत मानसिक परेशानियों के पीछे लंबे समय तक हर परिस्थिति में काले कपड़े पहनने की आदत भी एक वजह हो सकती है। हालांकि यह उनका आध्यात्मिक दृष्टिकोण है और इसे वैज्ञानिक प्रमाण के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

सद्गुरु का कहना है कि इंसान को अपनी भावनाओं को नियंत्रित करना सीखना चाहिए। जब भावनाएं संतुलित रहती हैं तो व्यक्ति जीवन में ज्यादा सकारात्मक बदलाव महसूस कर सकता है।

शोक के समय काला रंग पहनने पर सद्गुरु की राय

सद्गुरु ने काले रंग को शोक से जोड़ने की परंपरा पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि लोग अक्सर किसी की मृत्यु के बाद शोक सभा में काले कपड़े पहनते हैं, लेकिन उनके अनुसार जीवन को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी है कि इंसान खुद को पूरी तरह दुख और नकारात्मकता में न डुबोए।

उन्होंने कहा कि जो लोग दुनिया से चले गए हैं, उनका सम्मान करना चाहिए, लेकिन जो लोग जीवित हैं उन्हें जीवन को पूरी ऊर्जा के साथ जीना चाहिए।

भावनाओं पर नियंत्रण से बदल सकती है जिंदगी

सद्गुरु का मानना है कि इंसान की मानसिक स्थिति काफी हद तक उसकी भावनाओं और सोच पर निर्भर करती है। नकारात्मक भावनाओं को लंबे समय तक अपने ऊपर हावी नहीं होने देना चाहिए। ध्यान, आत्म-जागरूकता और सकारात्मक सोच के जरिए व्यक्ति अपने जीवन में बेहतर बदलाव ला सकता है।

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