
आजकल वजन घटाने और फिट रहने के लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग (Intermittent Fasting) तेजी से लोकप्रिय हो रही है। कई लोग इसे मोटापा कम करने, ब्लड शुगर कंट्रोल करने और मेटाबॉलिज्म बेहतर बनाने का आसान तरीका मानते हैं। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि फास्टिंग हर व्यक्ति के लिए समान रूप से लाभदायक नहीं होती। खासतौर पर थायरॉइड से जुड़ी समस्या से जूझ रहे लोगों को बिना डॉक्टर की सलाह लंबे समय तक उपवास या फास्टिंग नहीं करनी चाहिए।
थायरॉइड मरीजों पर क्यों पड़ सकता है फास्टिंग का असर?
थायरॉइड ग्रंथि शरीर के कई महत्वपूर्ण कार्यों को नियंत्रित करती है। यह मेटाबॉलिज्म, ऊर्जा उत्पादन, शरीर के तापमान और हार्ट रेट को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाती है। जब लंबे समय तक शरीर को पर्याप्त कैलोरी नहीं मिलती, तब हार्मोनल संतुलन प्रभावित हो सकता है। ऐसे में थायरॉइड हार्मोन के उत्पादन और उनकी सक्रियता में बदलाव देखने को मिल सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक फास्टिंग करने पर शरीर ऊर्जा बचाने की प्रक्रिया शुरू कर देता है, जिससे मेटाबॉलिज्म की गति धीमी पड़ सकती है। यही कारण है कि थायरॉइड से पीड़ित लोगों को अपनी डाइट और फास्टिंग को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।
क्या फास्टिंग से थायरॉइड की बीमारी हो सकती है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि फास्टिंग सीधे तौर पर थायरॉइड रोग पैदा नहीं करती। हालांकि यदि लंबे समय तक शरीर को पर्याप्त कैलोरी नहीं मिलती, तो इसका असर थायरॉइड हार्मोन के स्तर पर पड़ सकता है। जिन लोगों को पहले से हाइपोथायरॉइड या अन्य थायरॉइड संबंधी समस्या है, उनमें इसके प्रभाव अधिक स्पष्ट हो सकते हैं।
थायरॉइड ग्रंथि मुख्य रूप से टी3 (T3) और टी4 (T4) हार्मोन बनाती है। यही हार्मोन शरीर में ऊर्जा के उपयोग, मेटाबॉलिज्म, शरीर के तापमान और हृदय की कार्यप्रणाली को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कैलोरी की कमी से क्यों धीमा पड़ सकता है मेटाबॉलिज्म?
शरीर को जब लंबे समय तक पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिलती, तो वह ऊर्जा बचाने के लिए अपनी कार्यप्रणाली बदलना शुरू कर देता है। इसी प्रक्रिया में मेटाबॉलिज्म धीमा हो सकता है। वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार ऐसे समय में टी3 हार्मोन का स्तर कम हो सकता है, जबकि रिवर्स टी3 का स्तर बढ़ने की संभावना रहती है। यह बदलाव शरीर की ऊर्जा खपत को कम करने का प्राकृतिक प्रयास माना जाता है।
फास्टिंग के दौरान शरीर में क्या बदलाव होते हैं?
लंबे समय तक भोजन न मिलने पर शरीर तथाकथित “सर्वाइवल मोड” में काम करने लगता है। इसका उद्देश्य उपलब्ध ऊर्जा को अधिक समय तक सुरक्षित रखना होता है। इस दौरान हार्मोनल गतिविधियों में बदलाव आता है और मेटाबॉलिज्म पहले की तुलना में धीमा हो सकता है। यदि किसी व्यक्ति को पहले से थायरॉइड की समस्या है, तो ऐसे बदलाव उसके स्वास्थ्य पर अतिरिक्त प्रभाव डाल सकते हैं।
किन लोगों को फास्टिंग से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए?
यदि आप हाइपोथायरॉइड, हाइपरथायरॉइड या किसी अन्य थायरॉइड संबंधी बीमारी से पीड़ित हैं, नियमित दवा लेते हैं या हार्मोनल असंतुलन की समस्या है, तो इंटरमिटेंट फास्टिंग या लंबे समय तक उपवास शुरू करने से पहले डॉक्टर या एंडोक्राइनोलॉजिस्ट से सलाह लेना बेहतर रहेगा। हर व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति अलग होती है, इसलिए किसी भी डाइट प्लान को अपनाने से पहले विशेषज्ञ की राय महत्वपूर्ण होती है।
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। किसी भी प्रकार की फास्टिंग, डाइट या उपचार शुरू करने से पहले योग्य चिकित्सक से व्यक्तिगत सलाह अवश्य लें।
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