
नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच छह महीने से जारी संघर्ष के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने बड़ा दावा किया है। भारत में BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचे पेजेशकियान ने ‘आजतक’ से खास बातचीत में कहा कि इतने लंबे युद्ध के बावजूद ईरान कमजोर नहीं पड़ा, बल्कि इस संकट ने देश को और ज्यादा एकजुट कर दिया।
पेजेशकियान के मुताबिक, अमेरिका को उम्मीद थी कि सैन्य हमलों और ईरान के शीर्ष नेताओं तथा कमांडरों को निशाना बनाए जाने के बाद देश की ताकत टूट जाएगी। उन्हें यह भी उम्मीद थी कि जनता अपनी सरकार से दूरी बना लेगी, लेकिन ईरानी राष्ट्रपति का कहना है कि परिणाम इसके बिल्कुल उलट रहा।
अमेरिका को क्या उम्मीद थी और हुआ क्या?
ईरानी राष्ट्रपति ने बातचीत में कहा कि अमेरिका ने बिना किसी उकसावे के ईरान पर हमला किया और उसे अपनी सैन्य क्षमता पर भरोसा था। अमेरिकी रणनीति के पीछे यह अनुमान था कि लगातार सैन्य दबाव के बाद ईरान की सरकार कमजोर होगी और जनता का समर्थन उसके साथ नहीं रहेगा।पेजेशकियान ने दावा किया कि अमेरिका को लगा था कि वह वेनेजुएला जैसी स्थिति ईरान में भी पैदा कर सकता है और वहां अपनी पसंद की सरकार स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ सकता है। लेकिन ईरान के राष्ट्रपति के मुताबिक, युद्ध के दौरान जनता सरकार से अलग होने के बजाय देश के साथ मजबूती से खड़ी रही।
‘ईरान कमजोर नहीं, और मजबूत हुआ’
मसूद पेजेशकियान ने छह महीने के संघर्ष का आकलन करते हुए कहा कि युद्ध ने ईरानी समाज में विभाजन पैदा करने के बजाय लोगों को एकजुट किया। उनका कहना है कि ईरान की सेना और सुरक्षा बलों ने भी पूरी क्षमता के साथ जवाब दिया।
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका और उसके सहयोगियों के पास अत्याधुनिक तकनीक तथा बड़ी सैन्य ताकत थी, लेकिन इसके बावजूद ईरान संघर्ष में डटा रहा। उनके अनुसार, ईरानी सरकार को कमजोर करने की कोशिश सफल नहीं हुई और संकट के दौरान देश के भीतर एकता और मजबूत हुई।
BRICS समिट के लिए भारत पहुंचे हैं पेजेशकियान
मसूद पेजेशकियान राष्ट्रपति बनने के बाद 2024 में भारत की अपनी पहली BRICS शिखर सम्मेलन यात्रा पर पहुंचे हैं। उनकी यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष एक बार फिर तेज हुआ है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त के अधिकांश हिस्से में जारी लड़ाई के बाद कुछ समय के लिए तनाव में कमी आई थी, लेकिन इसके बाद दोनों पक्षों के बीच फिर हमले शुरू हो गए। मौजूदा टकराव में होर्मुज जलडमरूमध्य एक अहम मुद्दा बनकर सामने आया है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है और इसके जरिए दुनिया की करीब 20 प्रतिशत ऊर्जा आपूर्ति गुजरती है।
भारत के साथ रिश्तों पर क्या बोले ईरानी राष्ट्रपति?
अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच भारत ने तेहरान के साथ अपने संबंधों को बनाए रखा है। इसके साथ ही नई दिल्ली ने खाड़ी देशों के साथ अपने रणनीतिक और व्यापारिक रिश्तों को भी जारी रखा है।
पेजेशकियान का भारत दौरा ऐसे वक्त में हो रहा है जब पश्चिम एशिया का संकट लगातार व्यापक क्षेत्रीय प्रभाव डाल रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच टकराव के साथ-साथ होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ता तनाव दुनिया के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
छह महीने की जंग के बाद पेजेशकियान का संदेश साफ है कि ईरान अमेरिकी सैन्य दबाव के सामने पीछे हटने के बजाय अपने देश के भीतर बढ़ी एकजुटता को अपनी बड़ी ताकत मान रहा है। वहीं, संघर्ष का आगे क्या रुख होगा और अमेरिका-ईरान के बीच तनाव किस दिशा में जाएगा, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।
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