BRICS Summit 2026: सात साल बाद भारत पहुंचे शी जिनपिंग, पालम एयरपोर्ट पर हुआ स्वागत; शाम 5:45 बजे PM मोदी से मुलाकात

नई दिल्ली, 12 सितंबर 2026। भारत की मेजबानी में 18वें BRICS Summit 2026 का आगाज नई दिल्ली में हो चुका है। इसी बीच चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शनिवार को नई दिल्ली पहुंच गए। करीब सात साल बाद भारत आए चीनी राष्ट्रपति की इस यात्रा पर पूरी दुनिया की नजर है। शी जिनपिंग BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे।

पालम एयरपोर्ट पर पहुंचे शी जिनपिंग

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का विमान शनिवार को नई दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर उतरा। भारत पहुंचने पर उनका औपचारिक स्वागत किया गया। इसके बाद शी जिनपिंग BRICS Summit में हिस्सा लेने के लिए आगे रवाना हुए। उनकी भारत यात्रा इसलिए भी अहम है क्योंकि 2019 के बाद यह उनका पहला भारत दौरा है।

शी जिनपिंग के भारत दौरे को दोनों देशों के बीच पिछले कुछ वर्षों से जारी तनाव के बाद संबंधों में सुधार की कोशिशों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 2020 के गलवान संघर्ष के बाद भारत-चीन संबंधों में काफी तनाव आया था। हालांकि, पिछले कुछ समय में दोनों देशों ने रिश्तों को धीरे-धीरे सामान्य दिशा में ले जाने की कोशिश की है।

शाम 5:45 बजे PM मोदी से होगी मुलाकात

BRICS Summit के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच शनिवार शाम करीब 5:45 बजे द्विपक्षीय बैठक प्रस्तावित है। यह बैठक नई दिल्ली के भारत मंडपम में होगी। दोनों नेताओं की इस मुलाकात को भारत-चीन संबंधों के मौजूदा दौर के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

इस वार्ता में दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों, व्यापार, सीमा से जुड़े मुद्दों और क्षेत्रीय एवं वैश्विक परिस्थितियों पर बातचीत होने की संभावना है। चीन की ओर से भी भारत के साथ दीर्घकालिक संबंधों को मजबूत करने और मतभेदों को उचित तरीके से संभालने पर जोर दिया गया है।

भारत मंडपम में BRICS Summit का आगाज

भारत इस साल BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और 18वां BRICS Summit 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में होने वाले इस शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों के नेता साझा प्राथमिकताओं, वैश्विक चुनौतियों, व्यापार, निवेश और आपसी सहयोग से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श कर रहे हैं।

इस सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन समेत BRICS देशों के प्रमुख नेता शामिल हो रहे हैं। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए इस बार के सम्मेलन में आर्थिक सहयोग के साथ-साथ भू-राजनीतिक मुद्दों पर भी खास नजर है।

भारत-चीन रिश्तों के लिए क्यों अहम है शी का दौरा?

शी जिनपिंग का भारत दौरा ऐसे समय हो रहा है जब दोनों देशों के रिश्तों में धीरे-धीरे सुधार के संकेत दिखाई दे रहे हैं। 2024 में सीमा से जुड़े घटनाक्रम के बाद दोनों पक्षों के बीच तनाव कम करने की दिशा में कदम उठाए गए थे। इसके बाद शीर्ष स्तर पर संवाद बढ़ा है।

शी जिनपिंग और पीएम मोदी की मुलाकात इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों नेताओं के बीच होने वाली बातचीत को भारत-चीन संबंधों में आगे की दिशा तय करने वाली अहम कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है। दोनों देशों के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग के साथ सीमा पर शांति एवं स्थिरता का मुद्दा भी लगातार महत्वपूर्ण बना हुआ है।

BRICS के मंच पर भारत का फोकस

भारत BRICS को विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग बढ़ाने के एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में देख रहा है। नई दिल्ली में हो रहे सम्मेलन में आर्थिक सहयोग, व्यापार, निवेश, डिजिटल अर्थव्यवस्था, ऊर्जा और वैश्विक संस्थाओं में सुधार जैसे विषयों पर चर्चा प्रमुख एजेंडे में हैं।

ऐसे में शी जिनपिंग का दिल्ली पहुंचना और प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी प्रस्तावित बैठक BRICS Summit 2026 की सबसे अहम कूटनीतिक घटनाओं में से एक बन गई है। दुनिया की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि दोनों नेताओं की बातचीत से भारत-चीन संबंधों को लेकर क्या संदेश सामने आता है।

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