पेट की समस्या को न करें नजरअंदाज, बार-बार हो रही है दिक्कत तो हो सकता है ग्लूटेन इन्टॉलरेंस; जानें लक्षण, कारण और बचाव

फिजिकल हेल्थ: क्या आपका पेट अक्सर खराब रहता है? खाना खाने के बाद पेट फूलना, गैस, दस्त, पेट दर्द या भारीपन जैसी शिकायत बार-बार होती है और आपको समझ नहीं आता कि आखिर इसकी वजह क्या है? अगर ऐसी समस्या लगातार बनी रहती है तो इसे केवल सामान्य अपच मानकर नजरअंदाज करना सही नहीं है। कुछ लोगों में गेहूं, जौ और राई जैसे अनाजों में पाए जाने वाले ग्लूटेन को पचाने या सहन करने में परेशानी हो सकती है। इसे ग्लूटेन इन्टॉलरेंस कहा जाता है।

हालांकि, पेट से जुड़ी इन समस्याओं के पीछे कई अन्य कारण भी हो सकते हैं। ग्लूटेन से संबंधित परेशानी, सीलिएक डिजीज, इरिटेबल बाउल सिंड्रोम और दूसरी पाचन संबंधी स्थितियों के लक्षण आपस में मिल सकते हैं। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर खुद से किसी बीमारी का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। लगातार परेशानी होने पर डॉक्टर से सलाह और जरूरी जांच कराना महत्वपूर्ण है।

ग्लूटेन इन्टॉलरेंस क्या होता है?

ग्लूटेन गेहूं, जौ और राई जैसे अनाजों में पाया जाने वाला प्रोटीन है। कुछ लोगों का शरीर ग्लूटेन को आसानी से सहन नहीं कर पाता। ऐसे में ग्लूटेन युक्त भोजन लेने के बाद पाचन तंत्र से जुड़ी कई परेशानियां महसूस हो सकती हैं।

यह समझना जरूरी है कि ग्लूटेन इन्टॉलरेंस और सीलिएक डिजीज एक ही स्थिति नहीं हैं। सीलिएक डिजीज एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें ग्लूटेन के सेवन से शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली छोटी आंत को नुकसान पहुंचा सकती है। वहीं कुछ लोगों में सीलिएक डिजीज या गेहूं से एलर्जी के बिना भी ग्लूटेन खाने के बाद लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इसी वजह से सही पहचान के लिए चिकित्सकीय सलाह जरूरी होती है।

खाना खाने के बाद ये लक्षण दिखें तो रहें सतर्क

ग्लूटेन से संवेदनशीलता वाले लोगों में लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। कुछ लोगों को भोजन के बाद पेट फूलने और गैस की समस्या हो सकती है, जबकि कुछ लोगों में पेट दर्द, दस्त या मल त्याग में बदलाव देखने को मिल सकता है।

इसके अलावा कुछ लोगों को मितली, थकान या शरीर में असहजता जैसी समस्याएं भी महसूस हो सकती हैं। अगर किसी खास तरह के भोजन के बाद बार-बार एक जैसे लक्षण दिखाई देते हैं और भोजन का संबंध समझ में आ रहा है, तो डॉक्टर को इसकी जानकारी देना उपयोगी हो सकता है।

ग्लूटेन इन्टॉलरेंस होने के पीछे क्या वजह हो सकती है?

ग्लूटेन को लेकर शरीर की प्रतिक्रिया हर व्यक्ति में अलग हो सकती है। कुछ मामलों में आनुवंशिक और प्रतिरक्षा संबंधी कारक भूमिका निभा सकते हैं, जबकि कई बार पाचन तंत्र से जुड़ी दूसरी स्थितियां भी इसी तरह के लक्षण पैदा करती हैं।

यही कारण है कि सिर्फ पेट फूलने या गैस होने के आधार पर ग्लूटेन इन्टॉलरेंस मान लेना सही नहीं है। यदि समस्या लंबे समय से बनी हुई है, बार-बार लौटती है या रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित कर रही है, तो डॉक्टर से जांच कराना बेहतर विकल्प है।

बिना सलाह के ग्लूटेन पूरी तरह बंद करना सही है?

पेट खराब होने पर कई लोग इंटरनेट या सोशल मीडिया की जानकारी देखकर तुरंत गेहूं और ग्लूटेन वाले सभी खाद्य पदार्थ बंद कर देते हैं। ऐसा करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है। खासतौर पर अगर सीलिएक डिजीज की आशंका हो तो जांच से पहले लंबे समय तक ग्लूटेन छोड़ देना कुछ परीक्षणों के परिणाम को प्रभावित कर सकता है।

इसलिए डॉक्टर को अपने लक्षण, भोजन की आदतें और समस्या कितने समय से है, इसकी पूरी जानकारी दें। जरूरत पड़ने पर चिकित्सक रक्त जांच या अन्य परीक्षणों की सलाह दे सकते हैं।

बचाव के लिए खानपान पर दें ध्यान

अगर डॉक्टर किसी विशेष खाद्य पदार्थ या ग्लूटेन से जुड़ी समस्या की पुष्टि करते हैं, तो उनकी सलाह के अनुसार डाइट में बदलाव किया जा सकता है। पैकेज्ड फूड खरीदते समय उसके लेबल को ध्यान से पढ़ना भी जरूरी है, क्योंकि कई प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों में गेहूं या ग्लूटेन से जुड़े घटक मौजूद हो सकते हैं।

संतुलित आहार लेना भी महत्वपूर्ण है। ग्लूटेन वाले खाद्य पदार्थों को हटाने की स्थिति में यह ध्यान रखना चाहिए कि शरीर को पर्याप्त फाइबर, प्रोटीन, विटामिन और खनिज मिलते रहें। जरूरत पड़ने पर डाइटीशियन की मदद ली जा सकती है।

कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

अगर पेट की समस्या लगातार बनी रहती है, बार-बार दस्त या कब्ज होता है, वजन बिना वजह कम हो रहा है, अत्यधिक थकान रहती है या भोजन के बाद नियमित रूप से परेशानी होती है तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। गंभीर या लंबे समय से चल रहे लक्षणों को केवल गैस या अपच समझकर टालना ठीक नहीं है।

डिस्क्लेमर: यह खबर सामान्य स्वास्थ्य जानकारी पर आधारित है। ग्लूटेन इन्टॉलरेंस, सीलिएक डिजीज या किसी अन्य पाचन संबंधी बीमारी की पुष्टि केवल लक्षणों से नहीं की जा सकती। किसी भी डाइट में बड़ा बदलाव करने या उपचार शुरू करने से पहले योग्य डॉक्टर से सलाह लें।

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