
हिंदी सिनेमा और टीवी इंडस्ट्री से जुड़े कलाकारों की संस्था CINTAA यानी Cine & TV Artistes Association एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। संस्था के भीतर नेतृत्व, फैसले लेने के तरीके और कलाकारों के हितों को लेकर लंबे समय से मतभेद सामने आते रहे हैं। अब पुराने विवादों का जिक्र होने के साथ पद्मिनी कोल्हापुरे, प्रीति सप्रू और अभिनेत्री कुनिका के नाम भी चर्चा में हैं।
CINTAA से जुड़े इस पूरे घटनाक्रम ने इसलिए भी ध्यान खींचा है क्योंकि संस्था में कई वरिष्ठ कलाकार अहम जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। हालिया विवाद के बीच पद्मिनी कोल्हापुरे ने संगठन के कामकाज और फैसलों को लेकर लगाए गए आरोपों पर अपना पक्ष रखा है। वहीं, प्रीति सप्रू की भूमिका को लेकर भी सवाल और चर्चाएं सामने आई हैं।
आखिर CINTAA में विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
CINTAA में विवाद कोई नया नहीं है। 2024 में हुए संगठन के चुनाव के दौरान भी संस्था के भीतर मतभेद खुलकर सामने आए थे। चुनाव में प्रीति सप्रू और मुकेश ऋषि के नेतृत्व वाले Actors Care समूह को 15 सदस्यीय कार्यकारिणी में 10 सीटों पर जीत मिली थी। इसके बाद नई कार्यकारिणी में पद्मिनी कोल्हापुरे को वरिष्ठ उपाध्यक्ष और पूनम ढिल्लों को अध्यक्ष चुना गया था।
उस समय भी संस्था के कामकाज और पदाधिकारियों की कार्यशैली को लेकर सवाल उठे थे। चुनाव से पहले CINTAA में अंदरूनी खींचतान की खबरें भी सामने आई थीं। प्रीति सप्रू ने संगठन के तत्कालीन पदाधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे और कुछ कलाकारों के समर्थन में अपनी भूमिका निभाई थी।
पद्मिनी कोल्हापुरे ने क्या कहा?
मौजूदा विवाद के बीच पद्मिनी कोल्हापुरे ने संगठन में कथित ‘तानाशाही’ के आरोपों को खारिज किया है। अगस्त 2026 में दिए गए अपने बयान में उन्होंने समझाया कि CINTAA में कोई भी व्यक्ति अकेले फैसला नहीं ले सकता। उनके मुताबिक किसी बैठक के लिए निर्धारित संख्या में सदस्यों की मौजूदगी जरूरी होती है और निर्णय बहुमत के आधार पर लिए जाते हैं।
पद्मिनी ने यह भी स्पष्ट किया कि वह या पूनम ढिल्लों अपनी इच्छा से संगठन पर कोई फैसला नहीं थोप सकतीं। उन्होंने कहा कि प्रेस कॉन्फ्रेंस तक आयोजित करने के लिए कार्यकारिणी की बैठक में मंजूरी ली गई थी। इस तरह उन्होंने उन आरोपों पर सवाल उठाया, जिनमें संगठन के नेतृत्व पर एकतरफा तरीके से फैसले लेने की बात कही गई थी।
प्रीति सप्रू की क्या रही भूमिका?
प्रीति सप्रू CINTAA से लंबे समय से जुड़ी रही हैं और संगठन के कामकाज को लेकर अपनी राय सार्वजनिक रूप से रखती रही हैं। 2024 के चुनाव में वह खुद चुनावी मैदान में नहीं उतरी थीं, लेकिन उन्होंने Actors Care समूह के उम्मीदवारों का समर्थन किया था। उस चुनाव में समूह ने कार्यकारिणी की 15 में से 10 सीटें जीती थीं।
यही वजह है कि बाद में संगठन की दिशा और नेतृत्व को लेकर सामने आए मतभेदों में प्रीति सप्रू का नाम भी लगातार चर्चा में रहा। पद्मिनी कोल्हापुरे ने हालिया बयान में बताया कि शुरुआत में उन्हें और पूनम ढिल्लों को CINTAA से सक्रिय रूप से जुड़ने के लिए मनाने वालों में प्रीति सप्रू और मनोज जोशी भी शामिल थे।
कुनिका के आरोपों ने क्यों बढ़ाई हलचल?
इस पूरे विवाद में अभिनेत्री कुनिका के आरोपों ने भी चर्चा को तेज कर दिया है। उनके लगाए आरोपों के कारण मामला केवल संगठन के प्रशासनिक मतभेद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पुराने घटनाक्रम और कलाकारों के बीच संबंधों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
हालांकि, किसी भी व्यक्ति पर लगाए गए आरोपों को तथ्य के तौर पर पेश करने के बजाय उन्हें संबंधित व्यक्ति के दावे के रूप में देखना जरूरी है। विवाद से जुड़े सभी पक्षों के आधिकारिक और विस्तृत बयान सामने आने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट हो सकती है।
चुनाव के बाद भी जारी रही अंदरूनी खींचतान
CINTAA के 2024 चुनाव में कई नए चेहरों को कार्यकारिणी में जगह मिली थी। मुकेश ऋषि को सबसे ज्यादा वोट मिले थे, जबकि हेमंत पांडे और पद्मिनी कोल्हापुरे भी शीर्ष वोट पाने वाले उम्मीदवारों में शामिल थे। चुनाव के बाद पूनम ढिल्लों अध्यक्ष और पद्मिनी कोल्हापुरे वरिष्ठ उपाध्यक्ष बनीं।
इसके बावजूद संस्था के भीतर मतभेद पूरी तरह खत्म नहीं हुए। बाद के वर्षों में नेतृत्व की कार्यशैली और निर्णय प्रक्रिया को लेकर सवाल उठते रहे। अगस्त 2026 में पद्मिनी कोल्हापुरे का बयान इसी लंबे विवाद की अगली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
क्यों अहम है CINTAA का यह विवाद?
CINTAA फिल्म और टेलीविजन कलाकारों से जुड़ा एक प्रमुख संगठन है। ऐसे में संस्था के भीतर होने वाली किसी भी बड़ी उठापटक का असर इंडस्ट्री के कलाकारों और उनके अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर पड़ सकता है। यही कारण है कि पद्मिनी कोल्हापुरे, प्रीति सप्रू और अन्य कलाकारों के बीच सामने आए मतभेद लगातार सुर्खियां बटोर रहे हैं।
फिलहाल इस विवाद में अलग-अलग कलाकारों की ओर से सामने आए दावों और बयानों को अलग-अलग देखना जरूरी है। संगठन के कामकाज को लेकर आरोप-प्रत्यारोप के बीच आने वाले दिनों में यदि दूसरे पक्ष की ओर से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया आती है, तो मामला और स्पष्ट हो सकता है।
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