
गर्मी का मौसम, लगातार तेज धूप, जरूरत से ज्यादा वर्कआउट और शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन—ये सभी मिलकर शरीर के अंदर तापमान को असंतुलित कर सकते हैं। जब शरीर अपनी प्राकृतिक क्षमता से अधिक गर्मी सोख लेता है और उसे बाहर नहीं निकाल पाता, तो इसे मेडिकल भाषा में “बॉडी हीट” कहा जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति सिर्फ असहज ही नहीं बल्कि किडनी और पूरे शरीर के लिए खतरनाक भी साबित हो सकती है।
बॉडी हीट क्या होती है और क्यों होती है समस्या बढ़ती?
मानव शरीर का सामान्य तापमान लगभग 36.5 से 37.5 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। जब यह स्तर बढ़ जाता है तो शरीर उसे नियंत्रित करने के लिए पसीना और ब्लड सर्कुलेशन का सहारा लेता है। लेकिन जब अत्यधिक गर्मी, नमी, या पानी की कमी के कारण यह प्रक्रिया प्रभावित होती है, तो शरीर के अंदर गर्मी जमा होने लगती है और कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं शुरू हो जाती हैं।
किन कारणों से बढ़ती है बॉडी हीट?
विशेषज्ञ बताते हैं कि लंबे समय तक तेज गर्मी में रहना, धूप में काम करना या एक्सरसाइज करना बॉडी हीट बढ़ाने का सबसे बड़ा कारण है। इसके अलावा शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन होने पर पसीना कम बनता है, जिससे शरीर खुद को ठंडा नहीं कर पाता। कुछ दवाइयाँ जैसे diuretics और एंटीहिस्टामाइन भी शरीर के तापमान संतुलन को प्रभावित कर सकती हैं। शराब का अधिक सेवन और खराब लाइफस्टाइल भी इस समस्या को बढ़ाते हैं।
बॉडी हीट का किडनी और शरीर पर असर
बॉडी हीट का सीधा असर शरीर के कई अंगों पर पड़ता है, लेकिन किडनी सबसे ज्यादा प्रभावित होती है। शरीर में पानी की कमी होने पर किडनी को टॉक्सिन्स फिल्टर करने में अधिक मेहनत करनी पड़ती है, जिससे उसकी कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहने पर किडनी स्टोन या किडनी डैमेज का खतरा भी बढ़ सकता है।
इसके अलावा शरीर में अत्यधिक गर्मी से कमजोरी, सिरदर्द, चक्कर आना, उल्टी, मितली और थकान जैसे लक्षण भी दिखाई देने लगते हैं। गंभीर मामलों में हीट स्ट्रोक जैसी स्थिति भी बन सकती है, जो जानलेवा हो सकती है।
बॉडी हीट के प्रमुख लक्षण
तेज पसीना आना या बिल्कुल पसीना न आना, लगातार थकान महसूस होना, सिर में भारीपन या दर्द, उल्टी या मतली, शरीर में कमजोरी और चक्कर आना इसके प्रमुख संकेत हैं। इन लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है।
बचाव के आसान उपाय
विशेषज्ञों के अनुसार बॉडी हीट से बचने के लिए सबसे जरूरी है शरीर को हाइड्रेट रखना। दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, नारियल पानी, नींबू पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स का सेवन करना फायदेमंद है। हल्का और संतुलित आहार लेना चाहिए और ज्यादा मसालेदार या तला हुआ खाना कम करना चाहिए। दोपहर की तेज धूप से बचना, हल्के और ढीले कपड़े पहनना और कमरे को ठंडा रखना भी जरूरी है। जरूरत पड़ने पर शरीर को ठंडे पानी से आराम देना भी लाभकारी हो सकता है।
डॉक्टरों की सलाह है कि अगर लक्षण लगातार बने रहें या बढ़ जाएं तो तुरंत मेडिकल सहायता लेनी चाहिए, क्योंकि यह स्थिति किडनी और अन्य अंगों के लिए गंभीर हो सकती है।
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