Indus Waters Treaty: पानी पर पाकिस्तान की बढ़ी बेचैनी, ब्रिटेन-अमेरिका तक पहुंचा मामला; भारत ने साफ किया अपना रुख

नई दिल्ली/इस्लामाबाद: सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। पाकिस्तान इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की कोशिश कर रहा है और ब्रिटेन से लेकर अमेरिका तक अपनी चिंता सामने रख रहा है। इसी बीच पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मुहम्मद इशाक डार ने भारत को चेतावनी दी है कि सिंधु जल संधि के तहत पाकिस्तान के हिस्से में आने वाले पानी को रोकने या उससे वंचित करने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए।

भारत की ओर से पाकिस्तान के इस रुख पर दो टूक जवाब दिया गया है। भारत सरकार के एक वरिष्ठ सूत्र ने कहा है कि पाकिस्तान भारतीय नागरिकों और सुरक्षा बलों को निशाना बनाते हुए यह उम्मीद नहीं कर सकता कि उसे पहले की तरह बिना किसी बदलाव के डेटा साझा किया जाता रहे। भारत के इस रुख से साफ है कि वह सिंधु जल संधि को लेकर अपने मौजूदा स्टैंड से पीछे हटने के मूड में नहीं है।

इशाक डार ने सिंधु जल संधि को लेकर क्या कहा?

पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने सिंधु जल संधि के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि यह समझौता इसलिए लंबे समय तक कायम रहा क्योंकि दोनों देशों को यह अहसास था कि जिन जल स्रोतों पर करोड़ों लोगों का जीवन निर्भर है, वे बेहद महत्वपूर्ण हैं। उनके मुताबिक ऐसे जल स्रोतों को दोनों देशों के राजनीतिक रिश्तों में आने वाले उतार-चढ़ाव से अलग रखा जाना चाहिए।

डार ने इसी आधार पर भारत को संधि के तहत पाकिस्तान के लिए निर्धारित पानी से उसे वंचित करने की किसी भी कोशिश के खिलाफ चेतावनी दी है। पाकिस्तान की ओर से यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच पहले से ही गंभीर तनाव बना हुआ है।

भारत ने पाकिस्तान की मांग पर क्यों दिया कड़ा जवाब?

भारत का कहना है कि पाकिस्तान भारतीय नागरिकों और सुरक्षा बलों को निशाना बनाने की अपनी गतिविधियां जारी रखते हुए दूसरी ओर भारत से पहले की तरह सहयोग और डेटा-शेयरिंग की उम्मीद नहीं कर सकता। वरिष्ठ भारतीय सूत्र की टिप्पणी इसी रुख को स्पष्ट करती है।

भारत का संदेश यह है कि पाकिस्तान जिस तरह सुरक्षा और आतंकवाद से जुड़े मुद्दों पर भारत के खिलाफ गतिविधियां जारी रखता है, उसके साथ जल संसाधनों से संबंधित सहयोग को सामान्य परिस्थितियों की तरह नहीं देखा जा सकता।

‘खून और पानी साथ नहीं बह सकते’ पर कायम भारत

भारत की ओर से सामने आया बयान उस नीति की ओर भी इशारा करता है जिसके तहत भारत ने यह स्पष्ट किया है कि आतंकवाद और सामान्य संबंधों को अलग-अलग करके नहीं देखा जा सकता। इसी संदर्भ में भारत का चर्चित रुख रहा है कि ‘खून और पानी साथ नहीं बह सकते।’

सिंधु जल संधि को लेकर मौजूदा विवाद में भी भारत इसी सख्त रुख पर कायम दिखाई दे रहा है। दूसरी तरफ पाकिस्तान इस मामले को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाकर भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन फिलहाल उसे भारत की ओर से किसी तरह की राहत मिलती नजर नहीं आ रही है।

ब्रिटेन से अमेरिका तक पाकिस्तान की कोशिश

पाकिस्तान सिंधु जल संधि के मुद्दे को केवल भारत के साथ द्विपक्षीय विवाद के तौर पर नहीं देख रहा है। इस विषय पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्थिति रखने की उसकी कोशिश भी सामने आ रही है। ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देशों तक अपनी चिंता पहुंचाने का उद्देश्य भारत पर राजनयिक दबाव बनाने की दिशा में देखा जा रहा है।

हालांकि भारत की ओर से दिए गए जवाब से संकेत मिलता है कि नई दिल्ली फिलहाल पाकिस्तान के दबाव में अपना रुख बदलने के लिए तैयार नहीं है। भारत का जोर इस बात पर है कि सुरक्षा और आतंकवाद से जुड़े मुद्दों को नजरअंदाज करके पानी और डेटा-शेयरिंग से संबंधित पुराने तौर-तरीकों को जारी नहीं रखा जा सकता।

क्या है सिंधु जल संधि का विवाद?

सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच जल बंटवारे से जुड़ा महत्वपूर्ण समझौता है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से यह संधि द्विपक्षीय संबंधों का एक अहम हिस्सा रही है। लेकिन भारत-पाकिस्तान संबंधों में बढ़ते तनाव के बीच अब इसके संचालन और इससे जुड़े सहयोग को लेकर भी विवाद गहरा गया है।

मौजूदा घटनाक्रम में पाकिस्तान अपने हिस्से के पानी को लेकर आश्वासन चाहता है, जबकि भारत सुरक्षा संबंधी परिस्थितियों और पाकिस्तान के रवैये को देखते हुए पुराने ढर्रे पर सहयोग जारी रखने से इनकार कर रहा है। यही वजह है कि सिंधु जल संधि एक बार फिर भारत-पाकिस्तान संबंधों के केंद्र में आ गई है।

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