
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हो रहे विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव बेहद अहम हो गए हैं। शिक्षक और स्नातक कोटे के केवल 11 सीटों पर हो रहे चुनाव के लिए भाजपा और सपा दोनों तरफ से ताकत झोंकी दी गई है। खुद सीएम योगी ने भाजपा के लिए चुनाव की कमान संभाल ली है। भाजपा के एमएलसी प्रत्याशियों को जिताने के लिए मुख्यमंत्री की लगातार तीसरी जनसभा आज हो रही है। सोमवार को गोरखपुर, मंगलवार को बरेली के बाद आज बुधवार को वाराणसी में सीएम योगी एमएलसी प्रत्याशियों के लिए वोट मांगेंगे। माना जा रहा है कि 23 को होने वाली वोटिंग से पहले अन्य सीटों पर भी सीएम की जनसभा होगी।
समाजवादी पार्टी ने विधानसभा चुनाव की तरह विधान परिषद में भी अंतिम समय में दो प्रत्याशियों को बदलकर बता दिया है कि यह चुनाव उनके लिए भी कितना महत्वपूर्ण है। समाजवादी पार्टी की तरफ से भी तमाम नेता और पदाधिकारी अपने प्रत्याशियों के पक्ष में जिले-जिले जुटे हुए हैं। पहली बार सपा-भाजपा दोनों तरफ से इस चुनाव को लेकर इतनी गंभीरता दिखाई जा रही है। इस गंभीरता के पीछे तीन अहम कारण हैं।
क्यों भाजपा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है चुनाव
सपा एक तरह से इस जीत ने भाजपा पर मनोवैज्ञानिक बढ़त दिला दी है। सपा की इसी बढ़त को खत्म करने के लिए विधानसभा चुनाव से पहले एमएलसी का चुनाव जीतना भाजपा के लिए अहम हो गया है। पिछली बार भाजपा ने 11 में से छह सीटें जीती थीं। इस बार उसकी कोशिश उससे ज्यादा सीटों पर कब्जे की है। दूसरी ओर सपा किसी भी तरह लोकसभा चुनाव में बने माहौल को विधानसभा चुनाव तक बनाए रखना चाहती है। ऐसे में उसे भी एमएलसी में जीत चाहिए।
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