संयुक्त राष्ट्र (United Nations) ने भारत में बाल विवाह को रोकने, बेटियों की शिक्षा के स्तर में सुधार लाने और महिलाओं को सामाजिक-आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में चलाए जा रहे राष्ट्रीय अभियानों की जमकर सराहना की है। वैश्विक मंच से भारत के ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ और बाल विवाह मुक्त भारत अभियानों के सकारात्मक और दूरगामी परिणामों की सराहना करते हुए इसे अन्य विकासशील देशों के लिए एक अनुकरणीय मॉडल बताया गया है।
बाल विवाह में दर्ज की गई ऐतिहासिक गिरावट
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में बीते एक दशक में बाल विवाह के मामलों में उल्लेखनीय कमी आई है। जमीनी स्तर पर चलाए गए जागरूकता अभियानों, कड़ी कानूनी कार्रवाई और बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा देने वाली सरकारी योजनाओं के कारण बाल विवाह की कुप्रथा पर प्रभावी रोक लगी है। यूएन के प्रतिनिधियों ने माना कि बाल विवाह रोकने की दिशा में भारत द्वारा उठाए गए कड़े कदम और सामाजिक चेतना ने लाखों बेटियों का भविष्य सुरक्षित किया है।
‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ ने बदला सामाजिक नजरिया
यूएन ने भारत के ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि इस पहल ने न केवल लिंगानुपात में सुधार किया है, बल्कि समाज की सोच को बदलने में भी अहम भूमिका निभाई है। आज बेटियां न केवल स्कूलों और कॉलेजों में दाखिला ले रही हैं, बल्कि उच्च शिक्षा से लेकर खेल, विज्ञान और सुरक्षा बलों तक हर क्षेत्र में देश का नाम रोशन कर रही हैं। संयुक्त राष्ट्र ने भारत सरकार की इस प्रतिबद्धता की प्रशंसा करते हुए इसे लैंगिक समानता (Gender Equality) की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि करार दिया है।
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