
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रारंभिक शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने 15 अगस्त तक प्रदेश के 15,613 आंगनबाड़ी केंद्रों को परिषदीय विद्यालय परिसरों में स्थानांतरित करने का लक्ष्य तय किया है। इस पहल का उद्देश्य छोटे बच्चों को सुरक्षित, सुविधायुक्त और बेहतर प्रारंभिक शिक्षण वातावरण उपलब्ध कराना है, जिससे उनकी शुरुआती शिक्षा अधिक प्रभावी बन सके।
200 मीटर के दायरे वाले केंद्रों को किया जाएगा स्थानांतरित
सरकार के अनुसार जिन आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन वर्तमान में गैर-विभागीय भवनों में हो रहा है और जो परिषदीय विद्यालयों से 200 मीटर की परिधि के भीतर स्थित हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर स्कूल परिसरों में शिफ्ट किया जाएगा। इससे बच्चों को विद्यालयों की उपलब्ध आधारभूत सुविधाओं का सीधा लाभ मिल सकेगा।
मिशन मोड में चल रहा अभियान
प्रदेश सरकार इस अभियान को मिशन मोड में संचालित कर रही है। स्कूल परिसरों में स्थानांतरित होने वाले आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों को निर्धारित कक्षाओं में पढ़ाई, स्वच्छ पेयजल, शौचालय, बिजली, खेलकूद के लिए खुला स्थान और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। सरकार का मानना है कि इससे प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा और बुनियादी शिक्षा के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा।
प्रदेश में पूरी हुई आंगनबाड़ी केंद्रों की मैपिंग
सरकारी आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में कुल 1,89,208 आंगनबाड़ी केंद्रों की मैपिंग पूरी की जा चुकी है। इनमें से 1,64,480 केंद्र पहले ही परिषदीय विद्यालय परिसरों के साथ एकीकृत किए जा चुके हैं। अब शेष पात्र केंद्रों को भी निर्धारित समयसीमा के भीतर विद्यालय परिसरों में स्थानांतरित किया जाएगा।
जारी किए गए आवश्यक दिशा-निर्देश
इस अभियान को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग और बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से सभी पात्र आंगनबाड़ी केंद्रों का स्थानांतरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि बच्चों को जल्द से जल्द बेहतर शैक्षणिक वातावरण का लाभ मिल सके।
प्रारंभिक शिक्षा को मिलेगा नया आधार
सरकार का मानना है कि आंगनबाड़ी केंद्रों को विद्यालय परिसरों में स्थानांतरित करने से बच्चों को शुरुआती शिक्षा के साथ बेहतर संसाधन, सुरक्षित वातावरण और गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं मिलेंगी। साथ ही प्राथमिक शिक्षा में प्रवेश से पहले बच्चों की सीखने की क्षमता विकसित करने में भी यह पहल महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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