
मॉस्को। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच रूस में कथित तौर पर एक नया और बेहद संवेदनशील मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ महिलाओं पर आरोप है कि वे युद्ध के लिए भेजे जा रहे या गंभीर रूप से घायल सैनिकों से जल्दबाजी में शादी कर रही हैं, ताकि उनकी मौत के बाद मिलने वाले सरकारी मुआवजे पर कानूनी दावा कर सकें। इन आरोपों के सामने आने के बाद अस्पतालों और सैन्य व्यवस्था की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं।
CNN रिपोर्ट के बाद तेज हुई चर्चा
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस में ऐसे मामलों को लेकर बहस लगातार तेज हो रही है। रूसी मीडिया और कुछ अधिकारियों ने इन मामलों में शामिल महिलाओं को ‘ब्लैक विडो’ (Black Widow) तक कहना शुरू कर दिया है। दावा किया जा रहा है कि कई सैनिकों ने युद्ध क्षेत्र में रवाना होने से ठीक पहले या अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान विवाह किया और बाद में उनकी मौत के बाद मुआवजे को लेकर विवाद सामने आए।
हालांकि, रूस सरकार की ओर से ऐसे मामलों की कोई आधिकारिक संख्या जारी नहीं की गई है। इसके बावजूद रूसी अदालतों में इस तरह के कई विवाद पहुंच चुके हैं, जिनकी वजह से पूरे मामले ने गंभीर रूप ले लिया है।
सैन्य अस्पताल की नर्स पर लगे गंभीर आरोप
सबसे चर्चित मामलों में एक सैन्य अस्पताल की नर्स का नाम सामने आया है। आरोप है कि उसने इलाज के दौरान अलग-अलग समय पर पांच घायल सैनिकों से विवाह किया। जांच में यह आशंका जताई गई कि सैनिकों की मौत के बाद मिलने वाले सरकारी मुआवजे पर दावा करने के उद्देश्य से ये शादियां की गई थीं।
मामला सार्वजनिक होने के बाद संबंधित नर्स को नौकरी से हटा दिया गया। हालांकि, आरोपों की अंतिम कानूनी स्थिति को लेकर आधिकारिक स्तर पर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
बेटी को पिता की मौत के बाद पता चली शादी
सेंट पीटर्सबर्ग निवासी मारिया का मामला भी इन दिनों चर्चा में है। मारिया के अनुसार, सेना ने उन्हें सूचना दी कि उनके 59 वर्षीय पिता यूरी की यूक्रेन युद्ध में गोली लगने से मौत हो गई है। लेकिन बाद में उन्हें पता चला कि युद्ध क्षेत्र में भेजे जाने से महज दो दिन पहले उनके पिता ने विवाह कर लिया था।
मारिया का दावा है कि वह महिला उनके पिता से 22 वर्ष छोटी थी और परिवार पहले कभी उसका नाम भी नहीं जानता था। शादी के बाद वही कानूनी रूप से यूरी की सबसे करीबी रिश्तेदार बन गई, जिससे सरकारी मुआवजे पर उसका अधिकार बन गया।
संपत्ति को लेकर भी लगाया धोखाधड़ी का आरोप
मारिया का आरोप है कि उनके पिता के साथ धोखा किया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि पिता का फ्लैट बेच दिया गया और अब उनके पास केवल उस घर की चाबियां बची हैं, जिनका कोई उपयोग नहीं रह गया है। यह मामला भी रूस में कथित फर्जी शादियों को लेकर चल रही बहस का हिस्सा बन गया है।
सैनिक की मौत पर कितना मिलता है मुआवजा?
रूस में युद्ध के दौरान मारे गए सैनिक के परिवार को सरकार की ओर से कम से कम 50 लाख रूबल (करीब 62 लाख भारतीय रुपये) की एकमुश्त आर्थिक सहायता दी जाती है। इसके अलावा बीमा और अन्य सरकारी लाभ भी दिए जाते हैं, जिससे कुल मुआवजे की राशि और अधिक हो सकती है। माना जा रहा है कि इसी बड़ी रकम के कारण कथित फर्जी शादियों के मामलों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है।
आधिकारिक आंकड़े नहीं, लेकिन बढ़ रही कानूनी लड़ाइयां
इन मामलों को लेकर अभी तक रूस की ओर से कोई आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया गया है। हालांकि, अदालतों में पहुंच रहे विवाद और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में सामने आई रिपोर्ट्स ने इस पूरे मुद्दे को वैश्विक चर्चा का विषय बना दिया है। अस्पतालों, सैन्य अधिकारियों और संबंधित लोगों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, जिनकी जांच की मांग लगातार बढ़ रही है।
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