
कोलंबो: भारत और श्रीलंका के बीच रक्षा और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में बुधवार को एक अहम घटनाक्रम सामने आया। श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात के दौरान स्पष्ट भरोसा दिलाया कि श्रीलंका की जमीन का इस्तेमाल भारत की सुरक्षा के खिलाफ किसी भी गतिविधि के लिए नहीं होने दिया जाएगा। दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत में रक्षा, समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।
भारत की सुरक्षा को लेकर श्रीलंका का स्पष्ट रुख
राष्ट्रपति दिसानायके ने कहा कि श्रीलंका भारत की सुरक्षा चिंताओं को गंभीरता से लेता है और अपनी धरती का इस्तेमाल ऐसी किसी गतिविधि के लिए नहीं होने देगा, जो भारत के सुरक्षा हितों के प्रतिकूल हो। यह आश्वासन ऐसे समय आया है जब हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक प्रतिस्पर्धा लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है।
बैठक में दोनों देशों ने खुद को सभ्यतागत रूप से जुड़े दो करीबी पड़ोसी और समुद्री साझेदार बताते हुए क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और समृद्धि के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
38 साल बाद श्रीलंका पहुंचे भारतीय रक्षा मंत्री
राजनाथ सिंह की श्रीलंका यात्रा कई मायनों में अहम है। यह करीब 38 वर्षों बाद किसी भारतीय रक्षा मंत्री की श्रीलंका की आधिकारिक यात्रा है। तीन दिवसीय दौरे के दौरान राजनाथ सिंह श्रीलंकाई नेतृत्व के साथ रक्षा और सुरक्षा सहयोग सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं।
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक भारत और श्रीलंका के संबंध गहरे सभ्यतागत रिश्तों, क्षेत्रीय सुरक्षा, रक्षा सहयोग, आर्थिक एवं व्यापारिक साझेदारी और दोनों देशों के लोगों के बीच मजबूत संपर्क पर आधारित हैं।
तीन अहम रक्षा समझौतों से बढ़ेगा सहयोग
राजनाथ सिंह और राष्ट्रपति दिसानायके की मौजूदगी में दोनों देशों के बीच तीन महत्वपूर्ण समझौतों से जुड़े दस्तावेजों का आदान-प्रदान भी हुआ। इनमें श्रीलंका वायुसेना के छह L70 एयर डिफेंस गनों के उन्नयन, दोनों देशों के नेशनल डिफेंस कॉलेज के बीच अकादमिक सहयोग और नेशनल कैडेट कॉर्प्स के बीच सहयोग से संबंधित समझौते शामिल हैं।
छह L70 गनों के अपग्रेड की परियोजना भारत सरकार की ओर से दिए गए अनुदान के तहत होगी। इन एयर डिफेंस गनों के आधुनिकीकरण से श्रीलंका में महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की वायु सुरक्षा क्षमता को मजबूत करने में मदद मिलेगी। ये हथियार पहले भारत की ओर से श्रीलंका वायुसेना को उपलब्ध कराए गए थे।
नेशनल डिफेंस कॉलेज और NCC सहयोग को भी मिली मजबूती
भारत और श्रीलंका के नेशनल डिफेंस कॉलेज के बीच हुए समझौते का उद्देश्य दोनों संस्थानों के बीच ज्ञान और अनुभव साझा करने को बढ़ावा देना है। इससे रक्षा अध्ययन और रणनीतिक विषयों पर दोनों देशों के बीच अकादमिक संपर्क और मजबूत होने की उम्मीद है।
वहीं, नेशनल कैडेट कॉर्प्स से जुड़े समझौते के जरिए दोनों देशों के युवा कैडेटों के बीच आदान-प्रदान कार्यक्रम को औपचारिक आधार मिलेगा। इससे युवाओं के स्तर पर भी दोनों देशों के रक्षा और मैत्री संबंधों को आगे बढ़ाने का रास्ता खुलेगा।
भारत ने श्रीलंका में बनवाए तीन बेली ब्रिज
बैठक के दौरान राजनाथ सिंह और राष्ट्रपति दिसानायके ने भारत की मदद से तैयार किए गए तीन बेली ब्रिज का वर्चुअल उद्घाटन भी किया। ये पुल श्रीलंका के कुरुनेगला और बट्टिकलोआ जिलों में बनाए गए हैं।
इनमें पंसियागामा-कुरुनेगला, काबेल्लावा-कुरुनेगला और पालुगामम-बट्टिकलोआ मार्गों पर बनाए गए पुल शामिल हैं। भारत सरकार के अनुदान के तहत तैयार किए गए इन पुलों को चक्रवात दितवाह के बाद जरूरी सड़क संपर्क बहाल करने और पुनर्वास सहायता के हिस्से के तौर पर विकसित किया गया है।
चक्रवात के बाद भारत की मदद को श्रीलंका ने सराहा
राष्ट्रपति दिसानायके ने चक्रवात दितवाह के बाद भारत की ओर से चलाए गए राहत अभियान और पुनर्व श्रीलंका की मदद करना महज कोई उपकार नहीं, बल्कि एक करीबी मित्र और पड़ोसी के तौर पर उसकी जिम्मेदारी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि संकट की स्थिति में भारत श्रीलंका केास सहायता के लिए आभार जताया। उन्होंने भारत की ओर से श्रीलंका के पुनर्निर्माण में दिए जा रहे सहयोग की भी सराहना की।
इसके जवाब में राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत के लिए पड़ोसी श्रीलंका की मदद करना महज कोई उपकार नहीं, बल्कि एक करीबी मित्र और पड़ोसी के तौर पर उसकी जिम्मेदारी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि संकट की स्थिति में भारत श्रीलंका के साथ खड़ा रहेगा।
समुद्री सुरक्षा और मछुआरों के मुद्दे पर भी चर्चा
बैठक में दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग को आगे बढ़ाने और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। भारत और श्रीलंका हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा को लेकर लगातार सहयोग बढ़ा रहे हैं।
दोनों पक्षों ने मछुआरों से जुड़े मुद्दे पर भी चर्चा की। श्रीलंका की ओर से अपने मछुआरा समुदाय की आजीविका से जुड़े हितों की रक्षा के लिए भारत के सहयोग की जरूरत पर जोर दिया गया। दोनों देशों ने इस विषय को सहयोग और बातचीत के जरिए आगे बढ़ाने पर चर्चा की।
भारत-श्रीलंका संबंधों में क्यों अहम है यह दौरा?
राजनाथ सिंह की यह यात्रा ऐसे समय हुई है जब हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग का महत्व तेजी से बढ़ रहा है। भारत के लिए श्रीलंका भौगोलिक और सामरिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण पड़ोसी है।
श्रीलंका पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि उसकी जमीन का इस्तेमाल भारत की सुरक्षा के लिए नुकसानदेह किसी गतिविधि में नहीं किया जाएगा। दोनों देशों के बीच रक्षा प्रशिक्षण, समुद्री सुरक्षा, सैन्य आदान-प्रदान और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग पहले से जारी है।
राजनाथ सिंह की मौजूदा यात्रा में हुए समझौते और राष्ट्रपति दिसानायके की ओर से भारत की सुरक्षा को लेकर दिया गया भरोसा इस बात का संकेत है कि नई दिल्ली और कोलंबो अपने रक्षा एवं समुद्री सहयोग को और व्यापक बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
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