
गणेश चतुर्थी का पर्व भगवान गणेश की आराधना और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन भक्त विधि-विधान से गणपति की पूजा करते हैं, व्रत रखते हैं और उन्हें मोदक, दूर्वा सहित कई प्रिय चीजें अर्पित करते हैं। लेकिन गणेश चतुर्थी से जुड़ी एक ऐसी धार्मिक मान्यता भी है, जिसके बारे में जानना बेहद जरूरी है। मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा के दर्शन नहीं करने चाहिए। धार्मिक कथाओं में कहा गया है कि गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा को देखने से व्यक्ति पर झूठे आरोप या कलंक लगने की स्थिति बन सकती है। इसी वजह से इस तिथि को कई जगहों पर ‘कलंकित चतुर्थी’ भी कहा जाता है।
आखिर गणेश चतुर्थी पर चंद्रमा को देखना क्यों माना गया है वर्जित?
पौराणिक कथा के अनुसार एक बार भगवान गणेश को देखकर चंद्रदेव ने उनके स्वरूप और शरीर का उपहास किया। कथा में बताया जाता है कि चंद्रमा को अपने रूप और सुंदरता पर अभिमान था। उन्होंने गणेश जी के बड़े पेट, सूंड और उनके स्वरूप को लेकर उनका मजाक उड़ाया। चंद्रमा की इस बात से भगवान गणेश नाराज हो गए और उन्होंने उन्हें श्राप दे दिया।
कथा के अनुसार गणेश जी ने कहा कि जो भी व्यक्ति चंद्रमा के दर्शन करेगा, उसे कलंक या झूठे आरोप का सामना करना पड़ सकता है। गणेश जी के श्राप के बाद चंद्रमा परेशान हो गए। उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की।
चंद्रमा ने गणेश जी से मांगी क्षमा, फिर क्या हुआ?
पौराणिक मान्यता के अनुसार चंद्रमा ने गणेश जी की आराधना की और उनसे अपने अपराध के लिए क्षमा मांगी। चंद्रमा की तपस्या से प्रसन्न होकर गणेश जी ने अपना श्राप पूरी तरह वापस तो नहीं लिया, लेकिन उसके प्रभाव को सीमित कर दिया।
कथा के मुताबिक गणेश जी ने कहा कि गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा के दर्शन करने से व्यक्ति को मिथ्या कलंक का सामना करना पड़ सकता है। वहीं अन्य चतुर्थी तिथियों पर चंद्र दर्शन की परंपरा अलग मानी जाती है। इसी मान्यता ने गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा न देखने की परंपरा को जन्म दिया।
गलती से दिख जाए चांद तो क्या करें?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यदि गणेश चतुर्थी के दिन किसी व्यक्ति को अनजाने में चंद्रमा दिखाई दे जाए तो घबराने की जरूरत नहीं मानी जाती। इसके लिए शास्त्रीय परंपराओं में ‘स्यमंतक मणि’ की कथा पढ़ने या सुनने का उल्लेख मिलता है। कुछ धार्मिक स्रोतों में श्रीमद्भागवत के दसवें स्कंध के 56वें और 57वें अध्याय से जुड़ी कथा का पाठ करने की परंपरा बताई गई है।
कुछ पंचांग स्रोतों में चंद्र दर्शन से जुड़े मिथ्या दोष के निवारण के लिए एक विशेष मंत्र के जाप का भी उल्लेख मिलता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस मंत्र का जाप निर्धारित संख्या में किया जाता है।
2026 में कब है गणेश चतुर्थी?
साल 2026 में गणेश चतुर्थी का पर्व 14 सितंबर, सोमवार को मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार चतुर्थी तिथि 14 सितंबर की सुबह शुरू होकर 15 सितंबर की सुबह तक रहेगी। महाराष्ट्र के लिए उपलब्ध पंचांग जानकारी के अनुसार गणेश पूजा का मध्याह्न मुहूर्त 14 सितंबर को सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:29 बजे तक बताया गया है। इसी दिन चंद्र दर्शन से बचने का समय भी पंचांग में दिया गया है।
इसलिए गणेश चतुर्थी के दिन पूजा-पाठ करने वाले श्रद्धालु चंद्र दर्शन से जुड़ी इस पारंपरिक मान्यता का विशेष ध्यान रखते हैं। हालांकि अलग-अलग स्थानों और पंचांगों के अनुसार समय में अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग के अनुसार समय देखना उचित माना जाता है।
क्यों कहा जाता है ‘कलंकित चतुर्थी’?
गणेश चतुर्थी को ‘कलंकित चतुर्थी’ कहे जाने के पीछे मुख्य रूप से गणेश जी और चंद्रदेव से जुड़ी यही पौराणिक कथा बताई जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार चंद्रमा के दर्शन के कारण भगवान कृष्ण पर भी स्यमंतक मणि से जुड़ा मिथ्या आरोप लगा था। इसी प्रसंग को गणेश चतुर्थी के चंद्र दर्शन और मिथ्या कलंक की मान्यता से जोड़ा जाता है।
इस कथा का मूल संदेश अहंकार से बचने और किसी के रूप या शारीरिक विशेषता का उपहास न करने से भी जोड़ा जाता है। यही वजह है कि गणेश चतुर्थी पर चंद्र दर्शन की यह मान्यता आज भी धार्मिक परंपराओं में चर्चा का विषय बनी हुई है |
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