तमिलनाडु की सियासत में बड़ा उलटफेर! विजय ने चला गठबंधन का दांव, सरकार गिराने की चर्चाओं के बीच मजबूत किया मोर्चा

चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में बुधवार को बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया। मुख्यमंत्री और तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) प्रमुख थलपति विजय ने अपने सहयोगी दलों के साथ गठबंधन को नया नाम देते हुए ‘सेक्युलर सोशल जस्टिस विक्ट्री अलायंस’ की औपचारिक घोषणा कर दी। गठबंधन के इस ऐलान को आगामी राजनीतिक मुकाबलों के लिए विजय की रणनीति के अहम हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है।

सरकार गिरने की चर्चाओं से गठबंधन मजबूत करने तक

विजय की सरकार को लेकर पिछले कुछ महीनों से तमिलनाडु की सियासत में लगातार अटकलें लगती रही हैं। विपक्षी डीएमके की ओर से भी यह दावा किया गया था कि TVK सरकार बहुमत के लिहाज से कमजोर है और कभी भी संकट में आ सकती है। मई में डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन ने पार्टी कार्यकर्ताओं को नए चुनाव के लिए तैयार रहने को कहा था। उस समय TVK के पास अपने दम पर बहुमत से कम सीटें थीं और सरकार सहयोगी दलों के समर्थन से बनी थी।

हालांकि, इसके बाद विजय ने सहयोगी दलों का समर्थन जुटाकर अपनी सरकार की स्थिति मजबूत की। TVK के अनुसार कांग्रेस, वीसीके, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग और वाम दलों के समर्थन के बाद गठबंधन का आंकड़ा बहुमत के पार पहुंच गया था।

विजय ने क्यों बदला गठबंधन का नाम?

बुधवार को चेन्नई स्थित TVK मुख्यालय में गठबंधन की दूसरी समन्वय बैठक हुई। इसके बाद गठबंधन का नाम ‘Secular Social Justice Victory Alliance’ रखा गया। नाम में ‘धर्मनिरपेक्षता’ और ‘सामाजिक न्याय’ जैसे शब्दों को प्रमुखता देना तमिलनाडु की मौजूदा राजनीतिक विचारधारा और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखकर उठाया गया कदम माना जा रहा है।

इस गठबंधन में TVK के साथ कांग्रेस, विदुथलाई चिरुथैगल काची (VCK), मरुमलार्ची द्रविड़ मुनेत्र कझगम (MDMK) और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) शामिल हैं। गठबंधन के गठन से साफ है कि विजय केवल अपनी पार्टी के दम पर राजनीतिक लड़ाई लड़ने के बजाय व्यापक सामाजिक और राजनीतिक समर्थन का आधार तैयार करना चाहते हैं।

कांग्रेस के साथ आई, लेकिन 2029 को लेकर पेच

गठबंधन के विस्तार के बीच कांग्रेस और TVK के बीच भविष्य की राजनीति को लेकर मतभेद भी चर्चा में हैं। विजय को 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए प्रधानमंत्री पद के संभावित चेहरे के तौर पर पेश किए जाने की अटकलों के बीच कांग्रेस ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए राहुल गांधी को विपक्षी गठबंधन का प्रधानमंत्री पद का चेहरा बताया है।

यानी राज्य में विजय के नेतृत्व वाले गठबंधन की तस्वीर मजबूत होती दिख रही है, लेकिन राष्ट्रीय राजनीति में नेतृत्व को लेकर सहयोगी दलों के बीच अभी पूरी सहमति नहीं बनी है। यही वजह है कि तमिलनाडु की राजनीति में आने वाले दिनों में गठबंधन की भूमिका और उसके भीतर शक्ति संतुलन पर नजर रहेगी।

डीएमके और विजय के बीच बढ़ रही सीधी टक्कर

TVK सरकार और डीएमके के बीच टकराव भी लगातार तेज हो रहा है। हाल के विधानसभा सत्र में विजय ने डीएमके के शीर्ष नेताओं और पार्टी के पुराने राजनीतिक रिकॉर्ड पर तीखे सवाल उठाए। इसके जवाब में डीएमके ने विजय के बयानों के खिलाफ राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है।

डीएमके की ओर से विजय सरकार के कामकाज को लेकर भी लगातार निशाना साधा जा रहा है। उदयनिधि स्टालिन ने सरकार पर प्रशासनिक मोर्चे पर कमजोर प्रदर्शन करने और सोशल मीडिया प्रचार पर अधिक जोर देने का आरोप लगाया है।

क्या सच में गिर सकती है विजय सरकार?

फिलहाल उपलब्ध ताजा घटनाक्रम के आधार पर सरकार गिरने की अटकलों को पुख्ता राजनीतिक तथ्य नहीं माना जा सकता। इसके उलट, गठबंधन की औपचारिक संरचना और सहयोगी दलों के साथ विजय की बैठक यह संकेत देती है कि सत्तारूढ़ खेमा अपनी राजनीतिक स्थिति को और मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, गठबंधन में शामिल दलों के बीच नेतृत्व, सीट बंटवारे और भविष्य की राष्ट्रीय राजनीति जैसे मुद्दे आगे चुनौती बन सकते हैं।

विजय सरकार के सामने सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती अब विपक्ष के हमलों का जवाब देने के साथ-साथ सहयोगी दलों को एकजुट रखना होगी। खासकर कांग्रेस और वाम दलों के साथ अलग-अलग मुद्दों पर सामने आ रहे मतभेदों को देखते हुए गठबंधन प्रबंधन मुख्यमंत्री विजय के लिए अहम परीक्षा साबित हो सकता है।

AIADMK ने भी किया बड़ा दावा

दूसरी ओर AIADMK ने विजय और कांग्रेस दोनों की 2029 की राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाओं को खारिज करते हुए दावा किया है कि अगले लोकसभा चुनाव के बाद NDA का नेता प्रधानमंत्री बनेगा। पार्टी नेताओं ने साथ ही यह दावा किया कि एडप्पादी के. पलानीस्वामी (EPS) फिर से तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बनेंगे। इससे राज्य की राजनीति में TVK-DMK के अलावा AIADMK की चुनौती भी महत्वपूर्ण बनी हुई है।

अब किस दिशा में जाएगी तमिलनाडु की राजनीति?

तमिलनाडु की सियासत में फिलहाल तीन प्रमुख ध्रुव दिखाई दे रहे हैं—विजय के नेतृत्व वाला TVK गठबंधन, डीएमके और AIADMK। विजय के लिए नया गठबंधन नाम केवल राजनीतिक औपचारिकता नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे व्यापक सामाजिक आधार तैयार करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

ऐसे में आने वाले दिनों में सहयोगी दलों के बीच सीटों और नेतृत्व को लेकर बातचीत, डीएमके के साथ बढ़ता राजनीतिक टकराव और 2029 के लोकसभा चुनाव को लेकर राष्ट्रीय स्तर की रणनीति तमिलनाडु की राजनीति की दिशा तय कर सकती है। फिलहाल इतना जरूर साफ है कि जिन अटकलों में विजय सरकार के जल्द गिरने की बात कही जा रही थी, उनके बीच मुख्यमंत्री ने गठबंधन को और व्यवस्थित करने का दांव चलकर अपने राजनीतिक आधार को मजबूत करने की कोशिश की है।

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