Health News: महिलाओं में बढ़ती हार्मोनल समस्याओं के पीछे केवल खराब खानपान और अनियमित दिनचर्या ही जिम्मेदार नहीं हैं, बल्कि खराब नींद भी एक बड़ा कारण बन सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि रात में बार-बार नींद टूटती है या पर्याप्त नींद नहीं मिलती, तो PMOS (पहले जिसे PCOS कहा जाता था) के लक्षण अधिक गंभीर हो सकते हैं। इसका असर हार्मोनल संतुलन, मेटाबॉलिज्म और प्रजनन स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।
PMOS क्या है और क्यों बढ़ रही है यह समस्या?
PMOS महिलाओं में होने वाली एक सामान्य हार्मोनल समस्या है, जिसे पहले PCOS के नाम से जाना जाता था। बदलती जीवनशैली, तनाव, अनियमित खानपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण यह समस्या तेजी से बढ़ रही है। इस स्थिति में शरीर में हार्मोनल असंतुलन पैदा होने लगता है, जिससे मासिक धर्म अनियमित होना, वजन बढ़ना, बाल झड़ना, चेहरे और शरीर पर अनचाहे बाल आना, मुंहासे और अत्यधिक थकान जैसी परेशानियां सामने आ सकती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार दवा, संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली के साथ-साथ अच्छी और पर्याप्त नींद भी PMOS को नियंत्रित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
नींद और PMOS का क्या है गहरा संबंध?
नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन (NCBI) में प्रकाशित शोध के मुताबिक PMOS केवल प्रजनन स्वास्थ्य तक सीमित बीमारी नहीं है, बल्कि यह पूरे शरीर के हार्मोनल सिस्टम और मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करती है।
शोध में यह भी सामने आया कि PMOS से जूझ रही महिलाओं में सामान्य महिलाओं की तुलना में नींद से जुड़ी समस्याएं अधिक देखने को मिलती हैं। इनमें कम समय की नींद, रात में बार-बार जागना, नींद की गुणवत्ता खराब होना और स्लीप डिसऑर्डर जैसी समस्याएं शामिल हैं। ये सभी स्थितियां हार्मोनल असंतुलन और मेटाबॉलिक दिक्कतों को और बढ़ा सकती हैं।
नींद की कमी से बढ़ सकता है एंड्रोजन हार्मोन
विशेषज्ञों के अनुसार पर्याप्त नींद न मिलने पर शरीर में एंड्रोजन हार्मोन का स्तर बढ़ सकता है। यह हार्मोन सामान्य से अधिक होने पर महिलाओं में चेहरे और शरीर पर अनचाहे बाल बढ़ना, मुंहासे निकलना और सिर के बाल तेजी से झड़ने जैसी समस्याएं गंभीर हो सकती हैं। इसलिए नियमित और अच्छी नींद हार्मोनल संतुलन बनाए रखने के लिए जरूरी मानी जाती है।
इंसुलिन रेजिस्टेंस और डायबिटीज का बढ़ सकता है खतरा
PMOS से प्रभावित कई महिलाओं में इंसुलिन रेजिस्टेंस पहले से मौजूद होती है। यदि लगातार नींद पूरी नहीं होती, तो शरीर ग्लूकोज का सही तरीके से उपयोग नहीं कर पाता। इससे ब्लड शुगर बढ़ने के साथ इंसुलिन संवेदनशीलता कम हो सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसी स्थिति लंबे समय में टाइप-2 डायबिटीज, मोटापा और मेटाबॉलिक समस्याओं का खतरा बढ़ा सकती है।
खराब नींद बढ़ा सकती है स्ट्रेस हार्मोन
शोध के अनुसार पर्याप्त नींद न लेने से शरीर की जैविक घड़ी यानी सर्कैडियन रिद्म प्रभावित होती है। इसके कारण कोर्टिसोल हार्मोन, जिसे स्ट्रेस हार्मोन भी कहा जाता है, का स्तर बढ़ सकता है।
कोर्टिसोल अधिक होने पर पेट के आसपास चर्बी जमा होने, वजन तेजी से बढ़ने और इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ने की संभावना रहती है। ये सभी बदलाव PMOS के लक्षणों को और अधिक जटिल बना सकते हैं।
PMOS में अच्छी नींद क्यों है जरूरी?
विशेषज्ञों का मानना है कि PMOS से पीड़ित महिलाओं के लिए केवल दवा और डाइट ही पर्याप्त नहीं होती। रोजाना 7 से 9 घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद, नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और तनाव को नियंत्रित रखना भी उतना ही आवश्यक है। यदि लंबे समय तक नींद की समस्या बनी रहती है, तो डॉक्टर से सलाह लेकर उचित उपचार कराना चाहिए।
Disclaimer: यह खबर उपलब्ध चिकित्सा जानकारी और शोध के आधार पर तैयार की गई है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या उपचार को लेकर अंतिम निर्णय लेने से पहले योग्य चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।
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