वॉशिंगटन। 12 अगस्त 2026 खगोल विज्ञान के लिहाज से बेहद खास और ऐतिहासिक दिन साबित होने वाला है। इस दिन दुनिया के कई हिस्सों में एक साथ दो दुर्लभ खगोलीय घटनाएं देखने को मिलेंगी। पहले दिन के समय पूर्ण सूर्य ग्रहण दिखाई देगा, जबकि रात होते ही साल की सबसे चर्चित उल्का वर्षा (Meteor Shower) आसमान को रोशनी से भर देगी। वैज्ञानिक इसे बेहद दुर्लभ “कॉस्मिक डबल इवेंट” मान रहे हैं, क्योंकि ऐसा संयोग सदियों या हजारों वर्षों में कभी-कभार ही देखने को मिलता है।
एक ही दिन दिखेंगी दो बड़ी खगोलीय घटनाएं
खगोलविदों के अनुसार 12 अगस्त को चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाएगा, जिससे कुछ क्षेत्रों में पूर्ण सूर्य ग्रहण दिखाई देगा। सूर्य पूरी तरह चंद्रमा की ओट में चला जाएगा और कुछ मिनटों के लिए दिन में ही अंधेरा छा जाएगा। इसके कुछ घंटे बाद रात में पृथ्वी स्विफ्ट-टटल धूमकेतु द्वारा छोड़े गए धूल और मलबे के क्षेत्र से गुजरेगी, जिसके कारण पर्सीड उल्का वर्षा अपने चरम पर होगी।
यही वजह है कि एक ही दिन सूर्य ग्रहण और शानदार उल्का वर्षा का एक साथ होना खगोल विज्ञान की सबसे दुर्लभ घटनाओं में गिना जा रहा है।
दिन में छाएगा अंधेरा, रात में टूटते तारों से जगमगाएगा आसमान
पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक देगा। जिन इलाकों में यह पूर्ण रूप से दिखाई देगा, वहां कुछ मिनटों के लिए दिन का उजाला शाम जैसी रोशनी में बदल जाएगा।
इसके बाद देर रात जब पृथ्वी धूमकेतु के छोड़े गए सूक्ष्म कणों से टकराएगी, तो ये कण वायुमंडल में प्रवेश करते ही जलने लगेंगे। इससे आसमान में चमकीली रोशनी की लकीरें बनेंगी, जिन्हें आम भाषा में “टूटते तारे” कहा जाता है। यही दृश्य पर्सीड उल्का वर्षा के रूप में देखा जाएगा।
अमावस्या की रात बनेगी सबसे बड़ा फायदा
सूर्य ग्रहण हमेशा अमावस्या के दिन ही होता है। अमावस्या होने के कारण रात में चंद्रमा का प्रकाश नहीं रहेगा, जिससे आसमान सामान्य दिनों की तुलना में अधिक अंधेरा होगा। ऐसे में छोटी से छोटी उल्का भी साफ और अधिक चमकदार दिखाई देगी। यही कारण है कि इस बार पर्सीड उल्का वर्षा का नजारा और भी शानदार रहने की संभावना जताई जा रही है।
किन देशों में दिखाई देगा पूर्ण सूर्य ग्रहण?
वैज्ञानिकों के अनुसार पूर्ण सूर्य ग्रहण का मुख्य मार्ग ग्रीनलैंड, आइसलैंड, अटलांटिक महासागर और उत्तरी स्पेन से होकर गुजरेगा। इन क्षेत्रों में कुछ मिनटों के लिए पूर्ण अंधेरा देखने को मिलेगा।
वहीं, यूनाइटेड किंगडम, आयरलैंड, यूरोप के कई हिस्सों, उत्तरी अफ्रीका, कनाडा और अमेरिका के उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में आंशिक सूर्य ग्रहण दिखाई देगा। यहां सूर्य का एक बड़ा हिस्सा चंद्रमा से ढका हुआ नजर आएगा।
क्या भारत में दिखाई देगा सूर्य ग्रहण?
भारत में इस बार पूर्ण या आंशिक सूर्य ग्रहण प्रत्यक्ष रूप से दिखाई नहीं देगा। इसकी वजह यह है कि ग्रहण के समय भारत में रात होगी। हालांकि, अंतरिक्ष और विज्ञान से जुड़ी विभिन्न संस्थाएं इस खगोलीय घटना का लाइव प्रसारण करेंगी, जिसे ऑनलाइन देखा जा सकेगा।
उल्का वर्षा का आनंद कहां लिया जा सकेगा?
पर्सीड उल्का वर्षा उत्तरी गोलार्ध के अधिकांश देशों से देखी जा सकेगी। यदि मौसम साफ रहा और आसपास कृत्रिम रोशनी कम हुई, तो 12 अगस्त की देर रात से 13 अगस्त की सुबह तक आसमान में बड़ी संख्या में चमकदार उल्काएं दिखाई देंगी। खगोल विशेषज्ञों का कहना है कि यह वर्ष की सबसे आकर्षक उल्का वर्षाओं में से एक होगी।
वैज्ञानिकों ने बताया क्यों है यह संयोग इतना खास
विशेषज्ञों के अनुसार पूर्ण सूर्य ग्रहण और पर्सीड उल्का वर्षा का एक ही दिन पड़ना अत्यंत दुर्लभ खगोलीय संयोग है। दोनों घटनाएं अपने-अपने समय पर नियमित रूप से होती हैं, लेकिन एक ही तारीख पर इनका इस तरह मेल होना बेहद असामान्य माना जाता है। यही वजह है कि दुनियाभर के खगोल वैज्ञानिक और अंतरिक्ष प्रेमियों की नजरें 12 अगस्त की इस अनोखी घटना पर टिकी हुई हैं।
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