बर्गेनस्टॉक (स्विट्जरलैंड)। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर वैश्विक सुर्खियों में आ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान को लेकर दिए गए ताजा सख्त बयान के बाद स्विट्जरलैंड में चल रही दोनों देशों की अहम वार्ता पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, तेहरान का प्रतिनिधिमंडल बातचीत के दौरान बैठक स्थल छोड़कर चला गया, जबकि अमेरिकी पक्ष का दावा है कि वार्ता प्रक्रिया अभी भी जारी है।
ट्रंप के बयान के बाद अचानक बदला माहौल
रिपोर्ट के मुताबिक, स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में अमेरिका और ईरान के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत चल रही थी। इसी दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक संदेश साझा करते हुए ईरान के खिलाफ अपनी पूर्व चेतावनियों और कड़े रुख को दोहराया। ट्रंप के इस बयान के बाद वार्ता का माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया।
सूत्रों का कहना है कि ट्रंप के संदेश ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल की नाराजगी को और बढ़ा दिया, जिसके बाद बातचीत की दिशा को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई।
कतर के प्रतिनिधियों से मुलाकात के बाद उठकर चला गया ईरानी दल
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए (IRNA) के अनुसार, इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान का प्रतिनिधिमंडल मध्यस्थ देशों में शामिल कतर के अधिकारियों से मुलाकात करने के बाद उस इमारत से बाहर निकल गया, जहां अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता चल रही थी।
एजेंसी का दावा है कि ईरानी प्रतिनिधियों ने यह कदम ट्रंप की नई धमकियों और भड़काऊ बयानों के विरोध में उठाया। इससे यह संकेत मिला कि दोनों देशों के बीच विश्वास का संकट अभी भी गहराया हुआ है।
अमेरिका ने किया अलग दावा, कहा- बातचीत बंद नहीं हुई
दूसरी ओर, अमेरिकी अधिकारियों ने ईरानी मीडिया के दावों को पूरी तरह सही मानने से इनकार किया है। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि वार्ता प्रक्रिया समाप्त नहीं हुई है और ईरानी प्रतिनिधिमंडल अभी भी बातचीत के लिए निर्धारित परिसर में मौजूद है।
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच संवाद के रास्ते खुले हुए हैं और मध्यस्थ देशों के जरिए संपर्क बनाए रखा जा रहा है। ऐसे में बातचीत के पूरी तरह टूटने की पुष्टि फिलहाल नहीं की जा सकती।
मध्य पूर्व में बढ़ सकता है तनाव
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच जारी यह वार्ता विफल होती है तो इसका असर पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता पर पड़ सकता है। पहले से ही दोनों देशों के बीच सैन्य और राजनीतिक तनाव चरम पर है। ऐसे में किसी भी तरह की बातचीत का रुकना अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा सकता है।
फिलहाल दुनिया की नजरें स्विट्जरलैंड में चल रही इस कूटनीतिक कवायद पर टिकी हैं। आने वाले घंटों में यह स्पष्ट हो सकेगा कि दोनों देशों के बीच संवाद आगे बढ़ेगा या फिर ट्रंप के कड़े रुख के कारण वार्ता पूरी तरह पटरी से उतर जाएगी।
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