US-Iran Peace Deal: अब मिलेगी महंगाई से राहत? जानिए कब सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल, LPG और रोजमर्रा का सामान

US-Iran Peace Deal Impact on India: अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते ने वैश्विक बाजारों में बड़ा असर दिखाना शुरू कर दिया है। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आते ही भारत में भी राहत की उम्मीदें बढ़ गई हैं। रुपया मजबूत हुआ है, शेयर बाजार में उत्साह लौटा है और अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर आम लोगों को इसका फायदा कब मिलेगा? क्या पेट्रोल-डीजल सस्ता होगा, क्या LPG सिलेंडर के दाम घटेंगे और क्या महंगाई कम होगी? आइए समझते हैं पूरी तस्वीर।

शांति समझौते के बाद बाजार में दिखा पहला असर

अमेरिका-ईरान समझौते की खबर सामने आते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। इसका असर भारतीय बाजार पर भी तेजी से दिखाई दिया।

15 जून को रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत होकर 95.11 से 94.65 पर पहुंच गया। यह पिछले कई हफ्तों का सबसे बेहतर स्तर माना जा रहा है। मजबूत रुपये का सीधा फायदा यह होता है कि भारत को आयातित कच्चा तेल कम लागत में मिलता है।

दूसरी ओर शेयर बाजार में भी जबरदस्त तेजी देखने को मिली। तेल एवं गैस कंपनियों के शेयरों के साथ-साथ बैंकिंग, आईटी और मेटल सेक्टर में खरीदारी बढ़ी और प्रमुख सूचकांक करीब दो प्रतिशत तक उछल गए।

पेट्रोल-डीजल तुरंत सस्ता क्यों नहीं होगा?

हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता हुआ है, लेकिन इसका फायदा उपभोक्ताओं तक पहुंचने में समय लगेगा। हाल ही में तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए थे। ऐसे में नई वैश्विक कीमतों का असर आने वाली समीक्षा बैठकों में दिखाई देगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि तेल कंपनियां आमतौर पर 15 दिन के अंतराल पर लागत और बाजार परिस्थितियों की समीक्षा करती हैं। यदि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट लगातार बनी रहती है तो जुलाई की शुरुआत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी देखने को मिल सकती है।

2 से 4 हफ्तों में मिल सकती है पहली राहत

विशेषज्ञों के अनुसार सबसे पहले राहत पेट्रोल और डीजल के मोर्चे पर देखने को मिल सकती है। कच्चे तेल की लैंडेड कॉस्ट में कमी आने से तेल कंपनियों का खर्च घटेगा।

युद्ध और तनाव के दौरान कच्चे तेल की लागत काफी बढ़ गई थी, लेकिन शांति समझौते के बाद इसमें उल्लेखनीय गिरावट आई है। यदि यही रुझान जारी रहता है तो जुलाई के पहले सप्ताह तक पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 4 से 5 रुपये प्रति लीटर तक की कमी संभव मानी जा रही है।

LPG सिलेंडर पर कब मिलेगी राहत?

घरेलू रसोई गैस उपभोक्ताओं के लिए भी अच्छी खबर हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय LPG कीमतों में नरमी आने की संभावना जताई जा रही है।

पिछले कुछ महीनों में वैश्विक बाजार में LPG की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई थी, जिसका असर भारतीय उपभोक्ताओं पर भी पड़ा। अब यदि वैश्विक कीमतें नीचे आती हैं तो जुलाई के पहले सप्ताह से घरेलू LPG सिलेंडर 30 से 50 रुपये तक सस्ता हो सकता है।

जुलाई से सितंबर के बीच आएगा दूसरा बड़ा बदलाव

विशेषज्ञों का कहना है कि शांति समझौते का वास्तविक असर जुलाई के अंत से सितंबर तक देखने को मिलेगा। इस दौरान समुद्री मार्गों पर सामान्य गतिविधियां बहाल होंगी, शिपिंग लागत कम होगी और सप्लाई चेन धीरे-धीरे पटरी पर लौटेगी।

हालांकि इसके बावजूद कच्चे तेल की कीमतें पुराने स्तर पर लौटने की संभावना कम है। अनुमान है कि आने वाले वित्तीय वर्ष में तेल की कीमतें अपेक्षाकृत ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं। ऐसे में पेट्रोल और डीजल में राहत तो मिलेगी, लेकिन पुरानी सस्ती दरों की वापसी मुश्किल मानी जा रही है।

महंगाई पर कब दिखेगा असर?

तेल की कीमतें केवल ईंधन तक सीमित नहीं रहतीं। इनका असर परिवहन, खाद्य पदार्थों, कपड़ों, निर्माण सामग्री और रोजमर्रा की लगभग हर वस्तु पर पड़ता है।

अर्थशास्त्रियों के मुताबिक महंगाई में राहत तीन चरणों में देखने को मिल सकती है।

पहले चरण में कच्चे माल और कमोडिटी की कीमतों में नरमी आएगी। दूसरे चरण में उद्योगों की उत्पादन लागत घटेगी। तीसरे चरण में उपभोक्ताओं को पैकेज्ड फूड, साबुन, डिटर्जेंट, कपड़े और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुओं में कीमतों की नरमी का फायदा मिलेगा।

अक्टूबर से दिसंबर के बीच आम लोगों को दिख सकता है बड़ा फायदा

त्योहारी सीजन के दौरान बाजार में वास्तविक राहत महसूस की जा सकती है। यदि तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं और वैश्विक सप्लाई चेन पूरी तरह सामान्य हो जाती है, तो रोजमर्रा की कई वस्तुओं की कीमतों में गिरावट या स्थिरता देखने को मिल सकती है।इससे खुदरा महंगाई दर पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है और उपभोक्ताओं की जेब पर बोझ कुछ कम हो सकता है।

राहत की राह में अभी भी मौजूद हैं ये बड़े खतरे

हालांकि शांति समझौते ने उम्मीद जगाई है, लेकिन कुछ ऐसे कारक हैं जो पूरी तस्वीर बदल सकते हैं।

मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। इजरायल और क्षेत्रीय समूहों के बीच टकराव दोबारा बढ़ा तो तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

इसके अलावा ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर होने वाली आगामी वार्ताएं भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। यदि बातचीत सफल नहीं हुई तो नए प्रतिबंध और तनाव पैदा हो सकते हैं।

वैश्विक सप्लाई चेन को भी पूरी तरह सामान्य होने में समय लगेगा। युद्ध के दौरान प्रभावित हुए समुद्री मार्ग, बीमा लागत और परिवहन व्यवस्था को पटरी पर लौटने में कई सप्ताह लग सकते हैं।

क्या सचमुच सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल?

मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए यह कहना जल्दबाजी होगी कि पेट्रोल-डीजल पुराने स्तर पर पहुंच जाएंगे। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कुछ हफ्तों और महीनों में उपभोक्ताओं को चरणबद्ध तरीके से राहत जरूर मिल सकती है।

यदि अमेरिका-ईरान समझौता सफल रहता है, तेल आपूर्ति सामान्य बनी रहती है और वैश्विक बाजार स्थिर रहते हैं, तो जुलाई से दिसंबर के बीच भारत में ईंधन, LPG और कई जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है। फिलहाल बाजार उम्मीदों के सहारे आगे बढ़ रहा है और आम लोगों की नजर अब आने वाले हफ्तों पर टिकी हुई है।

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