सुप्रीम कोर्ट की सरकार को दो टूक, ‘युवाओं की आवाज सुनना सबसे बड़ा हथियार’, पत्थरबाजी पर भी की अहम टिप्पणी

CJP प्रदर्शन हिंसा मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने CJP प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए युवाओं और सरकार की भूमिका को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि युवाओं की बात सुनना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का सबसे प्रभावी और मजबूत हथियार है। यदि युवाओं की समस्याओं और भावनाओं को समय रहते समझा जाए तो उन्हें भटकने से रोका जा सकता है।

‘भटके हुए युवा ही पत्थरबाजी का रास्ता अपनाते हैं’

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब युवा खुद को उपेक्षित महसूस करते हैं या उनकी बात नहीं सुनी जाती, तब कुछ लोग गलत दिशा में चले जाते हैं और पत्थरबाजी जैसी घटनाओं में शामिल हो जाते हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों से निपटने के लिए केवल सख्ती ही समाधान नहीं हो सकती, बल्कि युवाओं के साथ संवाद भी उतना ही जरूरी है।

सरकार को आक्रामक रवैये से बचने की सलाह

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को भी संयम बरतने की सलाह देते हुए कहा कि प्रशासन को हर परिस्थिति में आक्रामक रुख अपनाने से बचना चाहिए। अदालत ने कहा कि लोकतंत्र में संवाद और संतुलित दृष्टिकोण सबसे प्रभावी तरीका होता है। यदि सरकार संवेदनशीलता के साथ युवाओं की बात सुनेगी तो कई विवाद और तनाव स्वतः कम हो सकते हैं।

हिंसा के मामलों में संतुलित दृष्टिकोण जरूरी

अदालत ने यह भी संकेत दिया कि हिंसा से जुड़े मामलों में कानून के तहत कार्रवाई आवश्यक है, लेकिन इसके साथ-साथ उन कारणों को भी समझना जरूरी है, जिनकी वजह से युवा भटककर हिंसक गतिविधियों की ओर बढ़ते हैं। अदालत का मानना है कि केवल दंडात्मक कार्रवाई की बजाय संवाद आधारित समाधान अधिक प्रभावी साबित हो सकता है।

लोकतंत्र में संवाद को बताया सबसे बड़ा समाधान

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद की अहमियत के रूप में देखा जा रहा है। अदालत ने दोहराया कि युवाओं का विश्वास बनाए रखना और उनकी बात सुनना किसी भी सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। इससे न केवल सामाजिक तनाव कम होगा बल्कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।

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