ईरानी मिसाइलों से अमेरिकी डिस्ट्रॉयर को नुकसान, भारत के जलक्षेत्र के करीब पहुंची US Navy, एक्सपर्ट ने दी दिल्ली को चेतावनी

वॉशिंगटन/नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच बड़ा दावा सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान की ओर से दागी गई मिसाइलों ने अमेरिका के एक युद्धपोत को निशाना बनाया है। हमलों के बाद अमेरिकी नेवी के जहाज भारतीय समुद्री सीमा के करीब पहुंच गए हैं। अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञों ने भी स्वीकार किया है कि ईरान की जवाबी कार्रवाई के चलते उनके नौसैनिक संसाधनों को रणनीतिक रूप से पीछे हटना पड़ा है, जिससे वे भारत के जलक्षेत्र के नजदीक आ गए हैं। इस घटनाक्रम ने नई दिल्ली की रणनीतिक स्थिति को संवेदनशील बना दिया है।

भारतीय जलसीमा के करीब अमेरिकी युद्धपोत, बढ़ी रणनीतिक हलचल

विदेश नीति मामलों के जानकार जोरावर दौलत सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक रिपोर्ट साझा करते हुए संकेत दिया कि ईरानी हमलों का सामना कर रहा अमेरिकी युद्धपोत भारत के पानी के बेहद करीब पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि यह वही परिस्थिति है, जिसकी आशंका को देखते हुए वॉशिंगटन ने नई दिल्ली के साथ LEMOA (Logistics Exchange Memorandum of Agreement) पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं को लॉजिस्टिक सहयोग उपलब्ध कराना है।

जोरावर दौलत सिंह के अनुसार मौजूदा हालात में वॉशिंगटन की ओर से भारत पर यूएस-इंडिया मैरीटाइम लॉजिस्टिक्स एग्रीमेंट को सक्रिय करने का दबाव डाला जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो अमेरिकी नौसैनिक संपत्तियों को भारतीय क्षेत्रीय जल में प्रवेश का अवसर मिल सकता है।

‘सेफ हेवन’ बनने से बचे भारत, एक्सपर्ट की दो टूक सलाह

विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि भारत को इस पूरे घटनाक्रम में बेहद संतुलित और सतर्क रुख अपनाने की जरूरत है। उनका कहना है कि यदि भारतीय जलक्षेत्र अमेरिकी नेवी के लिए सुरक्षित पनाहगाह बनता है तो भारत अनजाने में ही अमेरिका-ईरान संघर्ष का पक्षकार बन सकता है। ऐसी स्थिति में भारत के सामरिक और कूटनीतिक हित प्रभावित हो सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान में किसी भी रूप में शामिल होना भारत के लिए दीर्घकालिक रणनीतिक जोखिम पैदा कर सकता है। इसलिए केंद्र सरकार को हर कदम बेहद सोच-समझकर उठाना होगा।

अमेरिकी रक्षा विश्लेषक ने मानी मुश्किलें

उधर अमेरिकी रक्षा विश्लेषक और पूर्व आर्मी कर्नल डगलस मैकग्रेगर ने भी स्वीकार किया है कि ईरान की ओर से हो रहे हमले असर डाल रहे हैं। एक टीवी इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि अमेरिकी ठिकानों और हार्बर इंस्टॉलेशन को नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि मौजूदा परिस्थितियों में अमेरिका को भारत और उसके नौसैनिक बंदरगाहों पर निर्भर रहना पड़ सकता है।

ईरान के आसपास अमेरिकी नेवी का जमावड़ा, हालात तनावपूर्ण

गौरतलब है कि हाल के दिनों में अमेरिका और उसके सहयोगियों की ओर से ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की खबरें सामने आई थीं, जिसके बाद तेहरान की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमले तेज कर दिए गए। लगातार हो रहे इन हमलों ने दुनिया की सबसे ताकतवर मानी जाने वाली अमेरिकी नेवी के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ता यह टकराव अब हिंद महासागर क्षेत्र की रणनीतिक गणनाओं को भी प्रभावित करता दिख रहा है।

अब नजर इस बात पर है कि भारत इस जटिल भू-राजनीतिक स्थिति में किस तरह संतुलन साधता है और अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करते हुए वैश्विक दबावों का सामना कैसे करता है।

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