भारत की ‘सेवन सिस्टर्स’ के पास अमेरिकी सेना की हलचल, बांग्लादेश में शुरू हुआ ‘टाइगर लाइटनिंग 2026’ सैन्य अभ्यास, जानें क्यों बढ़ी रणनीतिक चर्चा

ढाका: भारत की पूर्वोत्तर सीमा के बेहद करीब स्थित बांग्लादेश के सिल्हट क्षेत्र में अमेरिका और बांग्लादेश की सेनाओं के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘टाइगर लाइटनिंग 2026’ शुरू हो गया है। 13 दिनों तक चलने वाले इस अभ्यास को दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रक्षा सहयोग बढ़ाने की दिशा में अहम कदम बताया है। भारत की सीमा के निकट अमेरिकी सैन्य मौजूदगी को लेकर इस अभ्यास पर क्षेत्रीय रणनीतिक हलकों की भी नजर बनी हुई है।

भारत की सीमा से सटे सिल्हट में हो रहा सैन्य अभ्यास

बांग्लादेश सशस्त्र बलों के जनसंपर्क विभाग (ISPR) के अनुसार, टाइगर लाइटनिंग 2026 की शुरुआत रविवार से हुई और इसका समापन 31 जुलाई को होगा। इस संयुक्त अभ्यास का आयोजन पूर्वोत्तर बांग्लादेश के सिल्हट सैन्य क्षेत्र में किया जा रहा है। अभ्यास की जिम्मेदारी बांग्लादेश सेना की विशेष पैरा कमांडो ब्रिगेड के पास है, जबकि इसमें अमेरिकी सेना की यूएस आर्मी पैसिफिक कमांड भी हिस्सा ले रही है।

उद्घाटन समारोह में दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद

सैन्य अभ्यास के उद्घाटन कार्यक्रम में बांग्लादेश सेना के चीफ ऑफ जनरल स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद मैनुर रहमान और बांग्लादेश में अमेरिका के राजदूत ब्रेंट टी. क्रिस्टेंसन शामिल हुए। दोनों देशों के अधिकारियों ने इस अभ्यास को आपसी सैन्य सहयोग, क्षमता निर्माण और संयुक्त अभियानों की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण बताया।

2017 से जारी है ‘टाइगर लाइटनिंग’ अभ्यास

अमेरिका और बांग्लादेश के बीच टाइगर लाइटनिंग नामक यह द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास पहली बार वर्ष 2017 में शुरू किया गया था। कोविड-19 महामारी के दौरान इसमें अस्थायी विराम आया, लेकिन उसके बाद इसे फिर से शुरू किया गया। हर संस्करण का उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाना, विशेष अभियानों की तैयारी को मजबूत करना और आधुनिक सैन्य तकनीकों का साझा अभ्यास करना रहा है।

भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है सिल्हट?

सिल्हट का भौगोलिक महत्व भारत के लिए काफी अहम माना जाता है। यह इलाका मेघालय और असम की अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटा हुआ है। ऐसे में भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र के बेहद करीब अमेरिका और बांग्लादेश की संयुक्त सैन्य गतिविधियां स्वाभाविक रूप से रणनीतिक चर्चाओं का विषय बन गई हैं। सुरक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि पूर्वोत्तर भारत की भौगोलिक स्थिति और क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों के कारण सिल्हट लंबे समय से संवेदनशील क्षेत्र माना जाता रहा है।

बांग्लादेश सेना प्रमुख के तुर्की दौरे के बीच शुरू हुआ अभ्यास

यह सैन्य अभ्यास ऐसे समय शुरू हुआ है, जब बांग्लादेश सेना प्रमुख वकार-उज-जमां तुर्की के दौरे पर हैं। ऐसे में एक ओर सेना प्रमुख की विदेश यात्रा और दूसरी ओर भारत की सीमा के निकट अमेरिका-बांग्लादेश का संयुक्त सैन्य अभ्यास क्षेत्रीय कूटनीतिक और सुरक्षा विश्लेषकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, अमेरिका और बांग्लादेश दोनों ने इस अभ्यास को नियमित द्विपक्षीय रक्षा सहयोग का हिस्सा बताया है।

इंडो-पैसिफिक रणनीति के संदर्भ में बढ़ा महत्व

विशेषज्ञों का मानना है कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बदलते सामरिक समीकरणों के बीच अमेरिका लगातार अपने साझेदार देशों के साथ रक्षा सहयोग को मजबूत करने पर जोर दे रहा है। बांग्लादेश के साथ आयोजित टाइगर लाइटनिंग 2026 भी इसी व्यापक रणनीतिक सहयोग का हिस्सा माना जा रहा है। वहीं, भारत की सीमा के निकट इसका आयोजन होने के कारण इस अभ्यास पर क्षेत्रीय सुरक्षा एजेंसियों और रणनीतिक विशेषज्ञों की विशेष नजर बनी हुई है।

Check Also

ईरान-अमेरिका तनाव के बीच सऊदी पहुंचे NSA अजीत डोभाल, विदेश मंत्री से अहम बैठक; ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी पर हुई चर्चा

रियाद। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ईरान-अमेरिका के बीच तेज हुए टकराव के …