ईरान-अमेरिका तनाव के बीच सऊदी पहुंचे NSA अजीत डोभाल, विदेश मंत्री से अहम बैठक; ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी पर हुई चर्चा

रियाद। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ईरान-अमेरिका के बीच तेज हुए टकराव के बीच भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने सोमवार को सऊदी अरब की राजधानी रियाद में सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान से महत्वपूर्ण मुलाकात की। ऐसे समय में हुई यह बैठक बेहद अहम मानी जा रही है, जब होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) में बढ़ती अस्थिरता के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा को लेकर दुनिया भर में चिंता बढ़ गई है।

रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने पर हुआ मंथन

सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच हुई बैठक में भारत और सऊदी अरब के द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने के साथ-साथ रणनीतिक साझेदारी को नई गति देने पर विस्तार से चर्चा हुई। इसके अलावा पश्चिम एशिया में तेजी से बदल रहे हालात, ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में सऊदी विदेश मंत्रालय के राजनीतिक मामलों के उप-मंत्री डॉ. सऊद अल-साती भी मौजूद रहे। मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा कि दोनों देशों ने साझा हितों से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

पश्चिम एशिया के हालात के बीच बढ़ी दौरे की अहमियत

अजीत डोभाल का यह दौरा ऐसे समय हुआ है, जब ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति को प्रभावित किया है। क्षेत्र में जारी घटनाक्रमों का असर वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक समुद्री मार्गों पर भी पड़ रहा है। ऐसे में भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देश के लिए सऊदी अरब के साथ लगातार संपर्क बनाए रखना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

तीन महीने में दूसरी बार सऊदी पहुंचे डोभाल

यह करीब तीन महीनों के भीतर अजीत डोभाल का दूसरा सऊदी दौरा है। इससे पहले अप्रैल 2026 में भी उन्होंने रियाद का आधिकारिक दौरा किया था। उस दौरान भी उन्होंने सऊदी नेतृत्व के साथ ऊर्जा सहयोग, क्षेत्रीय सुरक्षा और द्विपक्षीय संबंधों को लेकर उच्च स्तरीय वार्ता की थी।

लगातार हो रही इन बैठकों को भारत और सऊदी अरब के बीच मजबूत होते रणनीतिक संबंधों का संकेत माना जा रहा है।

भारत-सऊदी संबंधों में लगातार बढ़ रहा सहयोग

बीते कुछ वर्षों में भारत और सऊदी अरब के रिश्तों में उल्लेखनीय मजबूती देखने को मिली है। दोनों देशों के बीच ऊर्जा, निवेश, रक्षा, व्यापार और सुरक्षा जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ रहा है।

पिछले वर्ष दिसंबर में भारत के राजदूत सुहेल एजाज खान और सऊदी विदेश मंत्रालय में प्रोटोकॉल मामलों के उप-मंत्री अब्दुलमजीद बिन राशिद अलस्मरी ने द्विपक्षीय वीजा छूट समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते का उद्देश्य भारत-सऊदी अरब रणनीतिक साझेदारी परिषद के तहत आधिकारिक यात्राओं और सहयोग को अधिक सुगम बनाना है।

ऊर्जा क्षेत्र में भारत के लिए अहम साझेदार है सऊदी अरब

सऊदी अरब भारत के प्रमुख ऊर्जा साझेदारों में शामिल है। भारत अपनी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की बड़ी जरूरत सऊदी अरब से पूरी करता है। वैश्विक ऊर्जा बाजार में किसी भी प्रकार की अस्थिरता का सीधा प्रभाव भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है। यही कारण है कि दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में समन्वय लगातार मजबूत किया जा रहा है।

भारतीय समुदाय भी रिश्तों की बड़ी कड़ी

सऊदी अरब में करीब 27 लाख भारतीय निवास और कार्य करते हैं। यह भारतीय समुदाय दोनों देशों के बीच आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सऊदी नेतृत्व भी कई बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार कर चुका है कि देश के विकास में भारतीय समुदाय का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।भारत और सऊदी अरब के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी, ऊर्जा सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा पर लगातार हो रही उच्च स्तरीय वार्ताएं इस बात का संकेत हैं कि दोनों देश बदलते वैश्विक हालात में अपने संबंधों को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

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