
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद अब सबसे बड़ा सवाल विभागों के बंटवारे को लेकर खड़ा हो गया है। कैबिनेट विस्तार को लगभग 6 दिन यानी 144 घंटे पूरे होने वाले हैं, लेकिन अब तक नए मंत्रियों को विभाग नहीं सौंपे गए हैं। राजनीतिक गलियारों में इस देरी को लेकर चर्चाएं तेज हैं। विपक्षी दल समाजवादी पार्टी लगातार सरकार पर निशाना साध रही है, जबकि बीजेपी इसे सामान्य प्रक्रिया बता रही है।
विभागों के बंटवारे में क्यों हो रही देरी?
सूत्रों के मुताबिक मंत्रियों के बीच अहम विभागों को लेकर अंदरूनी मंथन जारी है। कई वरिष्ठ नेताओं की दावेदारी मजबूत मानी जा रही है, जिसके चलते संतुलन साधने में समय लग रहा है। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पार्टी हाईकमान हर समीकरण को ध्यान में रखते हुए अंतिम फैसला करना चाहते हैं।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी कोई भी ऐसा फैसला नहीं लेना चाहती जिससे संगठन या सरकार के भीतर असंतोष पैदा हो। यही वजह है कि विभागों के बंटवारे में सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों पर खास फोकस किया जा रहा है।
सपा का हमला, बीजेपी बचाव में
समाजवादी पार्टी ने इस मुद्दे पर योगी सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। सपा नेताओं का कहना है कि सरकार के भीतर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा, इसलिए विभागों का बंटवारा अटका हुआ है। विपक्ष का आरोप है कि बीजेपी में मंत्रियों के बीच खींचतान चल रही है।
वहीं बीजेपी नेताओं का कहना है कि कैबिनेट विस्तार के बाद विभागों का आवंटन एक संवेदनशील प्रक्रिया होती है और इसमें समय लगना सामान्य बात है। पार्टी का दावा है कि जल्द ही सभी मंत्रियों को जिम्मेदारियां सौंप दी जाएंगी।
दिल्ली से लेकर लखनऊ तक बढ़ी हलचल
राजनीतिक सूत्रों की मानें तो विभागों के बंटवारे को लेकर दिल्ली और लखनऊ के बीच लगातार चर्चा चल रही है। कुछ विभागों को लेकर आखिरी समय तक सहमति नहीं बन पाने की बात भी सामने आ रही है। ऐसे में अब सबकी नजर मुख्यमंत्री कार्यालय और बीजेपी हाईकमान के अगले कदम पर टिकी हुई है।
जनता के बीच भी उठने लगे सवाल
कैबिनेट विस्तार के बाद लंबे समय तक विभाग तय न होने से जनता के बीच भी सवाल उठने लगे हैं। कई सरकारी कामकाज और फैसलों पर इसका असर पड़ने की चर्चा है। विपक्ष इसे प्रशासनिक असमंजस बता रहा है, जबकि सरकार जल्द स्थिति साफ होने की बात कह रही है।अब देखना होगा कि योगी सरकार नए मंत्रियों को विभाग सौंपने का फैसला कब तक करती है और क्या यह देरी आगे चलकर राजनीतिक मुद्दा बनती है या नहीं।
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