तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन डीसी। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अगले हफ्ते संभावित बड़े सैन्य अभियान की तैयारी तेज कर दी है। अमेरिकी रक्षा मुख्यालय पेंटागन ने कई सैन्य विकल्प तैयार कर लिए हैं और अब पूरी दुनिया की नजर राष्ट्रपति Donald Trump के अंतिम फैसले पर टिकी हुई है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के सैन्य ठिकानों, रणनीतिक इंफ्रास्ट्रक्चर और परमाणु सुविधाओं को निशाना बनाने की योजना पर गंभीर स्तर पर विचार चल रहा है।
पेंटागन ने तैयार किए कई अटैक प्लान
अमेरिकी रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने संकेत दिए हैं कि जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई का दायरा और बढ़ाया जा सकता है। सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ईरान के कई संवेदनशील इलाकों पर बड़े हवाई हमलों की रणनीति बनाई है। इन हमलों में अत्याधुनिक फाइटर जेट, मिसाइल सिस्टम और नेवी स्ट्राइक ग्रुप का इस्तेमाल किया जा सकता है।
रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि अमेरिका के पास एक ऐसा विकल्प भी मौजूद है, जिसमें स्पेशल ऑपरेशन फोर्सेज को सीधे ईरान की जमीन पर उतारा जा सकता है। इस मिशन का मकसद इस्फहान स्थित परमाणु साइट तक पहुंच बनाना और वहां मौजूद एनरिच्ड यूरेनियम को कब्जे में लेना बताया जा रहा है। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने माना है कि ऐसा ऑपरेशन बेहद खतरनाक साबित हो सकता है और इसमें भारी सैन्य नुकसान का जोखिम रहेगा।
मिडिल ईस्ट में अमेरिकी ताकत का बड़ा जमावड़ा
तनावपूर्ण हालात के बीच अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी को और मजबूत कर दिया है। जानकारी के मुताबिक, क्षेत्र में इस समय 50 हजार से ज्यादा अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। इसके अलावा दो एयरक्राफ्ट कैरियर, एक दर्जन से अधिक नेवी डेस्ट्रॉयर और बड़ी संख्या में एडवांस लड़ाकू विमान भी रणनीतिक मोर्चों पर सक्रिय हैं।
अमेरिकी मरीन फोर्स के करीब 5 हजार जवान और 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के लगभग 2 हजार पैराट्रूपर्स भी हाई अलर्ट पर रखे गए हैं। सैन्य सूत्रों का कहना है कि अंतिम आदेश मिलते ही ये यूनिट्स तुरंत ऑपरेशन में शामिल हो सकती हैं।
ट्रम्प और जिनपिंग के बीच ईरान युद्ध पर अहम चर्चा
ईरान संकट को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और चीनी राष्ट्रपति Xi Jinping के बीच बातचीत भी हुई है। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि मौजूदा हालात को और बिगड़ने से रोकना जरूरी है और होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह खुला रहना चाहिए ताकि वैश्विक व्यापार प्रभावित न हो।
हालांकि चीन की ओर से युद्ध रोकने में किसी प्रत्यक्ष भूमिका के स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं। माना जा रहा है कि बीजिंग फिलहाल कूटनीतिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश में है।
BRICS बैठक में भी नहीं बनी सहमति
नई दिल्ली में हुई BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में भी ईरान मुद्दे पर सदस्य देशों के बीच एकमत नहीं बन सका। संयुक्त बयान में साफ कहा गया कि इस संघर्ष को लेकर सभी देशों की सोच अलग-अलग है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान संकट अब केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक रणनीतिक और आर्थिक चुनौती बन चुका है। खासतौर पर तेल सप्लाई और समुद्री व्यापार मार्गों पर इसका सीधा असर दिखाई दे रहा है।
अमेरिका बोला- चीन बढ़ा सकता है अमेरिकी तेल की खरीद
अमेरिकी ऊर्जा मंत्री Chris Wright ने दावा किया है कि मौजूदा तनाव के बीच चीन अमेरिका से तेल खरीद बढ़ा सकता है। उन्होंने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की सामान्य आवाजाही बनाए रखना पूरी दुनिया की आर्थिक स्थिरता के लिए बेहद जरूरी है।
उधर चीन के विदेश मंत्री Wang Yi ने अमेरिका और ईरान से बातचीत जारी रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि होर्मुज संकट का समाधान केवल स्थायी युद्धविराम और कूटनीतिक संवाद से ही संभव है।
जर्मनी ने ईरान को दी बातचीत की सलाह
जर्मन चांसलर Friedrich Merz ने ईरान से तुरंत बातचीत शुरू करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए संवाद ही सबसे बेहतर रास्ता है।
इसके साथ ही जर्मनी ने होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखने पर भी जोर दिया है, क्योंकि इस समुद्री मार्ग से दुनिया के बड़े हिस्से तक तेल सप्लाई होती है।
दुनिया की नजर अब ट्रम्प के फैसले पर
मिडिल ईस्ट में तेजी से बदलते हालात के बीच अब पूरी दुनिया की निगाहें व्हाइट हाउस पर टिकी हुई हैं। यदि अमेरिका ईरान पर दोबारा बड़ा हमला करता है तो इसका असर वैश्विक राजनीति, तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर व्यापक रूप से पड़ सकता है। आने वाले कुछ दिन दुनिया के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं।
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