
Trump-Xi Meeting: ताइवान से दूरी बनाकर चीन को साध रहे ट्रंप? हथियारों की सप्लाई पर रोक, भारत के लिए क्या हैं मायने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कथित तौर पर ताइवान के साथ संपर्क सीमित कर दिया है। शी जिनपिंग की संभावित अमेरिका यात्रा से पहले इस रणनीति के कई भू-राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। जानिए पूरी रिपोर्ट।
वॉशिंगटन: अमेरिका और चीन के बीच संभावित कूटनीतिक समीकरणों ने एक बार फिर वैश्विक राजनीति की दिशा को लेकर चर्चाएं तेज कर दी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कथित तौर पर ताइवान के साथ अपने प्रशासन के संपर्क को सीमित रखा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के संभावित अमेरिका दौरे से पहले किसी भी तरह के विवाद से बचना हो सकता है। इस घटनाक्रम को केवल अमेरिका-चीन संबंधों तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसके भारत समेत पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
शी जिनपिंग की संभावित यात्रा से पहले बदली रणनीति
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन लंबे समय से ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते (विलियम लाई) के साथ प्रत्यक्ष बातचीत से बच रहा है। माना जा रहा है कि यह फैसला चीन के साथ संबंधों में तनाव कम रखने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। हालांकि अभी तक बीजिंग की ओर से शी जिनपिंग की अमेरिका यात्रा की आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गई है, लेकिन सितंबर में वॉशिंगटन में दोनों नेताओं के बीच संभावित शिखर बैठक की चर्चा तेज है।
ताइवान के राष्ट्रपति से बातचीत फिलहाल टली
मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि अमेरिकी प्रशासन को आशंका है कि यदि ट्रंप, ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते से बातचीत करते हैं तो चीन इसे गंभीर मुद्दा बना सकता है। इससे सितंबर में प्रस्तावित ट्रंप-शी जिनपिंग शिखर बैठक की तैयारियों और दोनों देशों के बीच बनी सहमति पर असर पड़ सकता है। इसी वजह से फिलहाल ताइवान के साथ उच्चस्तरीय संवाद को सीमित रखने की नीति अपनाई गई है।
पहले भी ताइवान को लेकर भड़क चुका है चीन
ताइवान को लेकर चीन हमेशा बेहद संवेदनशील रुख अपनाता रहा है। वर्ष 2016 में अपने पहले कार्यकाल के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने ताइवान की तत्कालीन नवनिर्वाचित राष्ट्रपति त्साई इंग-वेन को फोन पर बधाई दी थी। उस समय चीन ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी और औपचारिक राजनयिक विरोध दर्ज कराया था। बीजिंग ने उस बातचीत को अपनी संप्रभुता से जुड़े मुद्दे के रूप में देखा था।
ताइवान को लेकर अमेरिका के कदमों पर दुनिया की नजर
हाल के दिनों में यह भी चर्चा रही है कि अमेरिका ने ताइवान को कुछ सैन्य उपकरणों और हथियारों की आपूर्ति से जुड़े फैसलों में सतर्क रुख अपनाया है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि वॉशिंगटन और बीजिंग के बीच बातचीत आगे बढ़ती है तो ताइवान से जुड़े कई मुद्दों पर अमेरिका संतुलित रणनीति अपना सकता है। हालांकि इस संबंध में अमेरिकी प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह घटनाक्रम?
भारत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अमेरिका का प्रमुख रणनीतिक साझेदार माना जाता है। ऐसे में यदि अमेरिका और चीन के बीच संबंधों में नरमी आती है तो इसका असर क्षेत्रीय रणनीति, सुरक्षा सहयोग और शक्ति संतुलन पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि नई दिल्ली आने वाले समय में अमेरिका-चीन संबंधों की दिशा पर करीबी नजर बनाए रखेगी, क्योंकि इसका प्रभाव क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है।
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