
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी सियासी घमासान के बीच पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बागी नेताओं पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पार्टी का चुनाव चिह्न किसी भी कीमत पर नहीं जाएगा और अगर उन्हें रोकना है तो उन्हें मारना पड़ेगा। ममता ने बागी नेताओं को खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनमें हिम्मत है तो वे खुलकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होकर दिखाएं।
‘मेरी आवाज कोई नहीं दबा सकता’
ममता बनर्जी ने कहा कि कुछ लोगों को यह भ्रम हो गया है कि उनका राजनीतिक सफर खत्म हो चुका है, लेकिन ऐसा नहीं है। उन्होंने कहा कि वह जनता के बीच पार्टी के चुनाव चिह्न के साथ जाएंगी और उनकी आवाज को कोई दबा नहीं सकता। उन्होंने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस का असली जनाधार आज भी उनके साथ है।
बागी नेताओं पर लगाया गद्दारी का आरोप
पूर्व मुख्यमंत्री ने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि गद्दारी की भी एक सीमा होती है। जिन नेताओं ने तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर चुनाव जीतकर अपनी राजनीतिक पहचान बनाई, वही अब पार्टी के अस्तित्व पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ये नेता अब खुले तौर पर भाजपा के लिए काम कर रहे हैं।
ममता ने कहा कि यदि बागी नेताओं को भाजपा की विचारधारा पर भरोसा है तो उन्हें पर्दे के पीछे राजनीति करने के बजाय खुलकर भाजपा का दामन थाम लेना चाहिए।
TMC में बगावत के बाद बढ़ा राजनीतिक संकट
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस में बड़े स्तर पर बगावत देखने को मिली। 3 जून को पार्टी के 80 में से 58 विधायक ममता बनर्जी के नेतृत्व से अलग हो गए और उन्होंने अलग गुट बनाकर पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर दावा भी पेश किया।
इसके बाद 15 जून को पार्टी के 20 लोकसभा सांसदों ने भी तृणमूल कांग्रेस छोड़कर त्रिपुरा की नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी (NCPI) में विलय कर लिया। इन घटनाओं के बाद पार्टी के भीतर राजनीतिक संकट और गहरा गया।
चंद्रिमा भट्टाचार्य के इस्तीफे से बढ़ी हलचल
सियासी घटनाक्रम के बीच शनिवार को टीएमसी की पश्चिम बंगाल अध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे के बाद उनकी मौजूदगी बागी गुट के नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के साथ देखी गई, जिससे राजनीतिक अटकलें और तेज हो गईं।
तृणमूल भवन को लेकर भी लगाए गंभीर आरोप
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने केंद्रीय बलों की मदद से तृणमूल भवन पर कब्जा कर लिया है। उन्होंने कहा कि भवन का किराया अक्टूबर 2027 तक जमा है और पार्टी हर महीने एक लाख रुपये किराया देती है। उनके मुताबिक यह किसी व्यक्ति की संपत्ति नहीं बल्कि ‘मां, माटी, मानुष’ की विचारधारा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इमारत पर कब्जा किया जा सकता है, लेकिन लोगों के दिलों पर नहीं।
भाजपा पर चुनाव प्रक्रिया प्रभावित करने का आरोप
ममता बनर्जी ने भाजपा पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि भाजपा ने वोटिंग, मतदाता सूची और मतगणना प्रक्रिया को प्रभावित कर सत्ता हासिल की है। उनका दावा है कि केंद्रीय बलों की मदद से मतगणना केंद्रों पर कब्जा किया गया और पूरी चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित किया गया। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक परंपरा का सम्मान करते हुए नई सरकार को स्वीकार किया गया है।
ऋतब्रत बनर्जी बने बागी गुट के नेता
टीएमसी में बगावत सामने आने के बाद 58 बागी विधायकों ने पार्टी से निकाले गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुना। इसके लिए विधानसभा स्पीकर रथींद्र बोस को समर्थन पत्र सौंपा गया था, जिसमें ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष घोषित करने की मांग की गई। बाद में स्पीकर ने इस मांग को मंजूरी भी दे दी।
22 जून को आयोजित प्रतिनिधि बैठक में नए अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और 30 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी के गठन का भी फैसला लिया गया।
अब ममता के पास कितने सांसद और विधायक बचे?
तृणमूल कांग्रेस के भीतर टूट के बाद पार्टी की संख्या में बड़ा बदलाव आया है। लोकसभा में पार्टी के कुल 28 सांसदों में से 20 सांसद अलग हो चुके हैं, जिसके बाद अब ममता बनर्जी के साथ केवल 8 लोकसभा सांसद बचे हैं। वहीं राज्यसभा में 13 में से 4 सांसद इस्तीफा दे चुके हैं और अब पार्टी के पास 9 राज्यसभा सांसद हैं।
विधानसभा में भी स्थिति बदली है। चुनाव में 80 सीटें जीतने वाली टीएमसी के 58 विधायक अलग गुट में चले गए हैं। इसके बाद ममता बनर्जी के समर्थन में अब केवल 22 विधायक बचे हैं।
असली TMC होने का दावा, चुनाव आयोग से की मांग
बागी गुट के 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने 2 जुलाई को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात कर खुद को असली तृणमूल कांग्रेस के रूप में मान्यता देने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग को पार्टी में हुए संगठनात्मक बदलावों और नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी से जुड़ी जानकारी भी सौंपी। अब इस पूरे घटनाक्रम पर चुनाव आयोग के फैसले पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
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