NATO Summit 2026: तुर्की दौरे पर डोनाल्ड ट्रंप, F110 फाइटर जेट इंजन डील पर एर्दोगन की टिकी निगाहें, क्या बनेगी बड़ी सहमति?

अंकारा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले सप्ताह होने वाले NATO Summit 2026 में भाग लेने के लिए तुर्की पहुंचेंगे। 7 और 8 जुलाई को आयोजित होने वाले इस अहम शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रंप और तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैय्यप एर्दोगन के बीच द्विपक्षीय वार्ता होने की संभावना है। अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक मामलों के जानकारों का मानना है कि यह मुलाकात दोनों देशों के रक्षा सहयोग को नई दिशा दे सकती है। खासतौर पर तुर्की की नजर अमेरिकी F110 Fighter Jet Engine हासिल करने पर टिकी हुई है।

NATO Summit पर दुनिया की नजर, कई अहम मुद्दों पर होगी चर्चा

तुर्की में आयोजित होने जा रहे नाटो शिखर सम्मेलन में सैन्य गठबंधन के सभी 32 सदस्य देशों के शीर्ष नेता हिस्सा लेंगे। बदलते वैश्विक सुरक्षा हालात, रक्षा सहयोग, क्षेत्रीय स्थिरता और सैन्य साझेदारी जैसे मुद्दे बैठक के प्रमुख एजेंडे में शामिल रहेंगे। इसी बीच ट्रंप और एर्दोगन की संभावित मुलाकात को सबसे महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकों में माना जा रहा है।

F110 इंजन डील से तुर्की को मिल सकती है बड़ी राहत

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यदि दोनों नेताओं के बीच सकारात्मक बातचीत होती है तो तुर्की को अमेरिकी F110 फाइटर जेट इंजन की आपूर्ति का रास्ता आसान हो सकता है। लंबे समय से तुर्की अपनी वायुसेना को आधुनिक बनाने के लिए इस इंजन को हासिल करने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में ट्रंप का यह दौरा रक्षा क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोल सकता है।

F-35 विवाद फिलहाल सुलझने के आसार कम

हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि F110 इंजन को लेकर प्रगति संभव है, लेकिन F-35 लड़ाकू विमान कार्यक्रम से जुड़े पुराने विवाद के जल्द खत्म होने की संभावना फिलहाल कम दिखाई दे रही है। इसी मुद्दे ने पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका और तुर्की के संबंधों में तनाव पैदा किया था। इसलिए दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग में सुधार के बावजूद F-35 पर तत्काल किसी बड़े फैसले की उम्मीद नहीं की जा रही है।

ट्रंप-एर्दोगन मुलाकात पर टिकी अंतरराष्ट्रीय नजर

राजनीतिक और रक्षा मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप और एर्दोगन की बैठक केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका असर नाटो की रणनीति और क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि इस मुलाकात को वैश्विक कूटनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में दोनों देशों के रक्षा और रणनीतिक संबंध किस दिशा में आगे बढ़ते हैं, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।

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