न्यूयॉर्क/मॉस्को: सनसनीखेज खुलासों के लिए कुख्यात जेफरी एपस्टीन की फाइलों ने एक बार फिर वैश्विक राजनीति में भूचाल ला दिया है। अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा सार्वजनिक किए गए 35 लाख पन्नों के नए पत्राचार ने एक ऐसा राज खोला है, जो सीधे क्रेमलिन की दहलीज तक जा रहा है। इन दस्तावेजों में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का नाम एक या दो बार नहीं, बल्कि पूरे 1,005 बार आया है। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या बच्चों के यौन शोषण का दोषी यह बदनाम फाइनेंसर असल में मॉस्को के लिए जासूसी कर रहा था?
पुतिन से मिलने की बेताबी और ‘ट्रंप’ कनेक्शन
दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि एपस्टीन रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिलने के लिए छटपटा रहा था। 2017 तक, संयुक्त राष्ट्र में रूस के तत्कालीन राजदूत विटाली चुरकिन उसके मुख्य संपर्क सूत्र थे। चुरकिन के निधन के बाद, एपस्टीन ने यूरोप परिषद के महासचिव थोरब्योर्न जगलैंड के जरिए रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव तक पहुंच बनाने की कोशिश की।
एक ईमेल में एपस्टीन ने लिखा था, “लावरोव मुझसे बात करके महत्वपूर्ण जानकारी हासिल कर सकते हैं। चुरकिन पहले ऐसा ही करते थे।” एपस्टीन ने यहां तक दावा किया कि उसकी बातचीत के बाद चुरकिन ‘ट्रंप’ को समझने लगे थे। यह उस दौर की बात है जब अमेरिका में 2016 के चुनावों में रूसी हस्तक्षेप के आरोप चरम पर थे।
बिल गेट्स का नाम और ‘स्पुतनिक’ वाला दांव
एपस्टीन ने खुद को रूस की नजरों में बेहद प्रभावशाली दिखाने के लिए बड़े नामों का सहारा लिया। उसने जगलैंड से कहा कि वह पुतिन को बताए कि वह और बिल गेट्स करीबी हैं और वह गेट्स को सलाह देता है। एपस्टीन ने पुतिन के साथ कम से कम 2 से 3 घंटे की लंबी बैठक की मांग की थी और दावा किया था कि वह रूस के लिए वैसा ही कुछ बड़ा कर सकता है जैसा ‘स्पुतनिक’ ने स्पेस रेस के दौरान किया था।
इतना ही नहीं, 2014 के एक ईमेल से संकेत मिलते हैं कि एपस्टीन ने पुतिन के साथ एक बैठक तय कर ली थी और इसमें शामिल होने के लिए लिंक्डइन के संस्थापक रीड हॉफमैन को भी आमंत्रित किया था, हालांकि उन्होंने आने से मना कर दिया।
जासूसी के जाल में फंसा ‘सैंडलवुड’ कांड?
एपस्टीन की रूस और पूर्वी यूरोप की मॉडल्स में दिलचस्पी तो पुरानी थी, लेकिन नए दस्तावेजों ने जासूसी के एंगल को हवा दे दी है। पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने इस मामले में कड़ी प्रतिक्रिया दी है। टस्क ने कहा है कि पोलैंड इस बात की जांच शुरू करेगा कि क्या एपस्टीन का यह काला साम्राज्य रूसी खुफिया एजेंसियों द्वारा संचालित या समर्थित था।
क्रेमलिन ने उड़ाया मजाक, कहा- यह गंभीर नहीं
इन गंभीर आरोपों के बीच रूस ने अपना रुख साफ कर दिया है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने एपस्टीन के रूसी जासूस होने के दावों को सिरे से खारिज कर दिया। पेस्कोव ने तंज कसते हुए कहा, “इस थ्योरी को किसी भी तरह से लिया जा सकता है, लेकिन गंभीरता से नहीं। इस पर कई चुटकुले सुनाए जा सकते हैं, पर समय बर्बाद करने का कोई फायदा नहीं।”
फिलहाल, 35 लाख पन्नों का यह पुलिंदा उन राजों को उगल रहा है जो व्हाइट हाउस से लेकर क्रेमलिन तक की नींद उड़ाने के लिए काफी हैं।
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