दक्षिण भारत के तटीय इलाकों में एक बार फिर कुदरत का कहर देखने को मिल रहा है। भीषण चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ (Cyclone Murasu) ने दक्षिण आंध्र प्रदेश के तट पर दस्तक दे दी है। मौसम विभाग (IMD) के अनुमान के मुताबिक, यह चक्रवात नेल्लोर और नरसापुर के बीच (ओंगोल के पास) तट को पार कर रहा है, जिसके चलते हवा की रफ्तार 120 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच गई है। भारी बारिश और तेज आंधी-तूफान के खतरे को देखते हुए पूरे तटीय इलाके में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है।
चक्रवात ‘मुरासु’ का तांडव: कहां और कितना असर?
मौसम विभाग और आपदा प्रबंधन प्राधिकरण से मिली जानकारी के अनुसार, इस चक्रवाती तूफान का दायरा काफी व्यापक है:
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लैंडफॉल और हवा की रफ्तार: चक्रवात मुरासु के प्रभाव से तटीय क्षेत्रों में 100 से 110 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चल रही हैं, जो झोकों के साथ 120 किमी प्रति घंटा तक पहुंच रही हैं।
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भारी मूसलाधार बारिश: नेल्लोर, ओंगोल और आसपास के तटीय जिलों में लगातार मूसलाधार बारिश हो रही है, जिससे निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई है।
जनजीवन अस्त-व्यस्त: स्कूल-कॉलेज बंद और उड़ानें रद्द
तूफान की गंभीरता को भांपते हुए राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन ने युद्धस्तर पर एहतियाती कदम उठाए हैं:
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शैक्षणिक संस्थान बंद: सुरक्षा के मद्देनजर प्रभावित जिलों में सभी स्कूलों, कॉलेजों और शैक्षणिक संस्थानों को बंद कर दिया गया है ताकि बच्चों और शिक्षकों को किसी तरह का जोखिम न उठाना पड़े।
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उड़ानों पर ब्रेक: खराब मौसम और विजिबिलिटी कम होने के कारण आंध्र प्रदेश के हवाई अड्डों पर 19 से अधिक उड़ानें (Flights) रद्द कर दी गई हैं, जिससे आवागमन बाधित हुआ है।
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NDRF और SDRF की तैनाती: किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की टीमों को संवेदनशील इलाकों में तैनात कर दिया गया है। राहत और बचाव कार्य तेजी से चलाए जा रहे हैं।
प्रशासन ने तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों से अपील की है कि वे बेहद जरूरी होने पर ही अपने घरों से बाहर निकलें और सुरक्षित स्थानों पर शरण लें।
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