भारत और वियतनाम के बीच सामरिक और रणनीतिक रिश्तों को एक नई मजबूती मिली है। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल इन दिनों वियतनाम के दौरे पर हैं, जहां उन्होंने हनोई में वियतनाम के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री जनरल लुओंग ताम क्वांग के साथ उच्चस्तरीय और प्रतिनिधिमंडल स्तर की महत्वपूर्ण बातचीत की। इस बैठक के दौरान दोनों देशों ने आपसी सुरक्षा सहयोग को और अधिक गहरा करने तथा मौजूदा बहुआयामी संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने पर सहमति जताई है।
हनोई में उच्चस्तरीय बैठक और रणनीतिक साझेदारी
हनोई स्थित भारतीय दूतावास से मिली जानकारी के मुताबिक, एनएसए अजित डोभाल और वियतनामी नेतृत्व के बीच हुई यह चर्चा बेहद सकारात्मक रही:
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भरोसे पर आधारित साझेदारी: दोनों पक्षों ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और वियतनाम के बीच द्विपक्षीय सुरक्षा सहयोग दोनों देशों की गहरी, आपसी भरोसे और ऐतिहासिक सभ्यतागत साझेदारी का एक मजबूत प्रतीक है।
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क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर मंथन: बैठक के दौरान केवल द्विपक्षीय संबंधों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि मौजूदा क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी खुलकर विचारों का आदान-प्रदान किया गया। हिंद-प्रशांत क्षेत्र (Indo-Pacific) में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए दोनों देशों की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है।
कूटनीतिक मोर्चे पर भारत की सक्रियता
वियतनाम के साथ इस उच्चस्तरीय कूटनीति के अलावा कूटनीतिक गलियारों में भारत की सक्रियता लगातार बनी हुई है। इसी कड़ी में विदेश सचिव विक्रम मिस्री भी वर्तमान में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और नेपाल के आधिकारिक दौरे पर हैं, जो क्षेत्रीय कूटनीति के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एनएसए अजित डोभाल के वियतनाम दौरे से दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की सामरिक स्थिति और अधिक मजबूत होगी।
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