आंतों के आम बैक्टीरिया और कोलन कैंसर के बीच की 20 साल पुरानी गुत्थी सुलझी, वैज्ञानिकों ने खोज निकाला ट्यूमर बढ़ाने का पूरा सच

मेडिकल साइंस और गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के क्षेत्र में एक बहुत बड़ी और महत्वपूर्ण सफलता हाथ लगी है। वैज्ञानिकों ने आंतों (Gut) में पाए जाने वाले एक सामान्य बैक्टीरिया और कोलन कैंसर (Colon Cancer) के बीच पिछले 20 सालों से चले आ रहे अनसुलझे रहस्य को आखिरकार सुलझा लिया है। अमेरिका के प्रतिष्ठित जान्स हॉपकिंस विश्वविद्यालय (Johns Hopkins University) के शोधकर्ताओं ने यह पता लगाया है कि किस प्रकार आंतों का एक खास बैक्टीरिया शरीर के भीतर ट्यूमर पनपने की प्रक्रिया को बढ़ावा देता है।

प्रसिद्ध वैज्ञानिक पत्रिका ‘नेचर’ (Nature) में प्रकाशित इस अध्ययन ने कैंसर रिसर्च में एक नई दिशा खोल दी है। आइए जानते हैं कि इस रिसर्च में वैज्ञानिकों को क्या-क्या अहम जानकारियां मिली हैं।

‘बैक्टेराइड्स फ्रैजिलिस’ बैक्टीरिया और उसका विषैला पदार्थ

अध्ययन के मुताबिक, हमारी आंतों में बैक्टेराइड्स फ्रैजिलिस (Bacteroides fragilis) नामक एक आम बैक्टीरिया पाया जाता है। इसकी कुछ खास किस्में या स्ट्रेन्स एक बेहद खतरनाक टॉक्सिन (विषैला पदार्थ) पैदा करती हैं, जिसे बीएफटी (BFT – Bacteroides fragilis Toxin) कहा जाता है:

  • सुरक्षात्मक परत को नुकसान: यह विषैला पदार्थ आंतों की अंदरूनी सुरक्षात्मक परत को कमजोर कर देता है, जिससे आंतों में लंबे समय तक सूजन (Chronic Inflammation) बनी रहती है और यही सूजन धीरे-धीरे कैंसर कोशिकाओं के विकास का मार्ग प्रशस्त करती है।

  • 20 साल पुरानी गुत्थी: पिछले दो दशकों से वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश कर रहे थे कि आखिर यह टॉक्सिन आंतों की स्वस्थ कोशिकाओं पर सटीक हमला कैसे करता है। अब जाकर इस सवाल का स्पष्ट जवाब मिल गया है।

क्लाडिन-4 प्रोटीन (Claudin-4 Protein) की अहम भूमिका

शोधकर्ताओं ने अपनी इस खोज में पाया कि बैक्टीरिया द्वारा छोड़ा जाने वाला यह विष सबसे पहले आंतों के एक विशेष प्रोटीन ‘क्लाडिन-4’ (Claudin-4) से जाकर जुड़ता है:

  • टाइट जंक्शन (Tight Junctions): क्लाडिन-4 प्रोटीन का मुख्य काम आंतों की कोशिकाओं के बीच मजबूत जोड़ (Tightly sealed junctions) बनाकर एक सुरक्षा कवच तैयार करना होता है ताकि हानिकारक तत्व अंदर न जा सकें।

  • कवच में सेंध: जब बीएफटी टॉक्सिन इस क्लाडिन-4 प्रोटीन पर हमला करता है, तो आंतों की दीवारें कमजोर और छिद्रयुक्त होने लगती हैं। इसके कारण हानिकारक बैक्टीरिया और सूजन पैदा करने वाले कारक आसानी से कोशिकाओं तक पहुंच जाते हैं, जिससे डीएनए क्षति और ट्यूमर बनने की प्रक्रिया तेज हो जाती है।

भविष्य के इलाज के लिए नई उम्मीद

वैज्ञानिकों का मानना है कि इस तंत्र (Mechanism) की पूरी जानकारी मिलने के बाद अब कोलन कैंसर के शुरुआती चरणों में पहचान करने और इसके जोखिम को रोकने के लिए नई दवाइयों तथा प्रिवेंटिव थेरेपी विकसित करने में मदद मिलेगी।

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