इजरायल-सीरिया तनाव के बीच पाकिस्तान पहुंचे शैबानी, क्या ‘सुन्नी NATO’ में शामिल होगा सीरिया?

Israel-Syria-Turkey Tension: इजरायल और सीरिया के बीच बढ़ते तनाव के बीच पश्चिम एशिया की कूटनीति में एक नया मोड़ दिखाई दे रहा है। सीरिया के विदेश मंत्री असद हसन अल-शैबानी पाकिस्तान पहुंचे हैं। यह यात्रा ऐसे समय हुई है, जब इजरायल ने उत्तर-पश्चिमी सीरिया के अबू अल-दुहूर एयरबेस पर हवाई हमला किया है। इजरायल का कहना था कि इस सैन्य अड्डे पर तुर्की की सेना की संभावित तैनाती को रोकने के लिए कार्रवाई की गई। सीरिया और तुर्की ने इजरायल के इस आकलन को खारिज किया है।

17 साल बाद सीरिया के विदेश मंत्री की पाकिस्तान यात्रा

सीरियाई विदेश मंत्री असद हसन अल-शैबानी 20 अगस्त को इस्लामाबाद पहुंचे। यह सीरिया के मौजूदा प्रशासन के किसी शीर्ष राजनयिक की पाकिस्तान यात्रा को लेकर खास तौर पर महत्वपूर्ण है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने शैबानी के साथ बैठक में सीरिया की संप्रभुता, एकता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति समर्थन दोहराया। दोनों पक्षों के बीच द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ रक्षा और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर भी बातचीत हुई।

शैबानी की यह यात्रा ऐसे वक्त हुई है, जब सीरिया को लेकर इजरायल और तुर्की के बीच तनाव तेजी से बढ़ा है। 18 अगस्त को इजरायल ने सीरिया के इदलिब प्रांत में स्थित अबू अल-दुहूर एयरबेस पर हमला किया था। इजरायल ने दावा किया कि वह वहां तुर्की सैनिकों की संभावित तैनाती को रोकना चाहता था। हालांकि, सीरिया ने कहा कि एयरबेस पर स्थायी तुर्की सैन्य मौजूदगी स्थापित करने की कोई योजना नहीं थी।

इजरायल के हमले के बाद क्यों अहम है शैबानी का पाकिस्तान दौरा?

शैबानी का पाकिस्तान दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि कुछ दिन पहले ही सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने मक्का में एक संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। 7 अगस्त को हुए इस समझौते को Makkah Joint Defence Agreement नाम दिया गया है। इसके तहत तीनों देशों ने सामूहिक सुरक्षा और रक्षा सहयोग मजबूत करने पर सहमति जताई है। समझौते में कहा गया है कि तीनों में से किसी एक देश पर सशस्त्र हमला होने की स्थिति में उसे तीनों के खिलाफ हमला माना जाएगा।

इसी वजह से शैबानी की पाकिस्तान यात्रा को क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों के लिहाज से देखा जा रहा है। सीरिया इस समझौते में शामिल नहीं है, लेकिन शैबानी ने संकेत दिया है कि उनका देश मक्का रक्षा समझौते में शामिल होने या किसी रूप में उसका सहयोग करने के विकल्प पर विचार कर रहा है। हालांकि, अभी यह नहीं कहा जा सकता कि सीरिया इस समझौते का औपचारिक सदस्य बनने जा रहा है।

क्या बन रहा है ‘सुन्नी NATO’ जैसा नया सुरक्षा ढांचा?

सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच हुआ रक्षा समझौता पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया के बदलते रणनीतिक समीकरणों के बीच बेहद अहम माना जा रहा है। तीनों देशों ने इसे किसी खास देश के खिलाफ सैन्य गठबंधन नहीं बताया है और पाकिस्तान ने इसे पूरी तरह रक्षात्मक समझौता बताया है।

फिर भी क्षेत्रीय स्तर पर इसे एक ऐसे सुरक्षा ढांचे के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें मुस्लिम बहुल देशों के बीच रक्षा सहयोग बढ़ सकता है। यही वजह है कि सीरिया के इस समझौते के साथ जुड़ने की संभावना ने अटकलों को जन्म दिया है। अगर भविष्य में दमिश्क इसमें शामिल होता है तो इजरायल-तुर्की-सीरिया के बीच पहले से तनावपूर्ण समीकरणों पर इसका असर पड़ सकता है।

पाकिस्तान में शैबानी ने किन मुद्दों पर की बात?

इस्लामाबाद में शैबानी ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और विदेश मंत्री इशाक डार से मुलाकात की। बातचीत में दोनों देशों के संबंधों को आगे बढ़ाने के साथ सीरिया की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे। पाकिस्तान ने सीरिया के साथ रक्षा और सुरक्षा सहयोग को भी मजबूत करने की इच्छा जताई है।

शैबानी की यात्रा को ऐसे समय में और अहम माना जा रहा है जब सीरिया एक तरफ अपनी सुरक्षा व्यवस्था को दोबारा मजबूत करने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ इजरायल और तुर्की के बीच उसके क्षेत्र को लेकर रणनीतिक प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है।

इजरायल-तुर्की टकराव का केंद्र बनता सीरिया

बशर अल-असद सरकार के पतन के बाद सीरिया में तुर्की का प्रभाव बढ़ा है। तुर्की सीरिया के नए नेतृत्व के साथ सैन्य और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, जबकि इजरायल सीरिया में तुर्की की बढ़ती सैन्य भूमिका को लेकर चिंतित है। अबू अल-दुहूर एयरबेस पर इजरायली हमला इसी व्यापक तनाव की एक बड़ी कड़ी माना जा रहा है।

सीरियाई विदेश मंत्री ने इजरायल के हमले को अनुचित बताते हुए कहा है कि दमिश्क ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि एयरबेस पर किसी स्थायी तुर्की सैन्य अड्डे या स्थायी तुर्की सैन्य मौजूदगी की योजना नहीं थी। सीरिया का कहना है कि एयरबेस पर चल रहा पुनर्वास कार्य सीरियाई वायुसेना से संबंधित था।

क्या पाकिस्तान और सीरिया के बीच बढ़ेगा रक्षा सहयोग?

शैबानी की यात्रा से यह संकेत जरूर मिलता है कि पाकिस्तान और सीरिया के बीच राजनीतिक और सुरक्षा संपर्क बढ़ रहा है। खासकर मक्का रक्षा समझौते के बाद सीरिया की संभावित भागीदारी या सहयोग की चर्चा ने इस दौरे को और महत्वपूर्ण बना दिया है।

हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि सीरिया औपचारिक तौर पर किसी नए सैन्य गठबंधन में शामिल हो गया है या पाकिस्तान के साथ मिलकर इजरायल के खिलाफ किसी सैन्य कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। मौजूदा घटनाक्रम में सबसे स्पष्ट बात यही है कि सीरिया क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग के विकल्पों पर विचार कर रहा है और पाकिस्तान उसके साथ संबंध मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

Check Also

बांग्लादेश का ‘मक्का पैक्ट’ पर बड़ा संकेत, चीन-पाकिस्तान के करीब आता ढाका; भारत की बढ़ सकती है रणनीतिक चिंता

बांग्लादेश ने सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच हुए मक्का रक्षा समझौते में शामिल …