
Purnagiri Shaktipeeth News: उत्तराखंड के चंपावत जिले की पर्वत श्रृंखलाओं के बीच स्थित माँ पूर्णागिरी धाम देश के सबसे प्रतिष्ठित और आस्था से जुड़े शक्तिपीठों में गिना जाता है। अन्नपूर्णा शिखर पर विराजमान यह पवित्र धाम हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह वही स्थान है जहां माता सती की नाभि गिरी थी। इसी वजह से पूर्णागिरी को अत्यंत सिद्ध, जाग्रत और चमत्कारी शक्तिपीठ माना जाता है।
108 शक्तिपीठों में विशेष स्थान रखता है पूर्णागिरी धाम
सनातन धर्म में पूर्णागिरी शक्तिपीठ का विशेष महत्व बताया गया है। यह शक्तिपीठ उन 108 प्रमुख शक्तिपीठों में शामिल है, जिनका उल्लेख विभिन्न धार्मिक ग्रंथों और पुराणों में मिलता है। मान्यता है कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और माता की कृपा से जीवन के कष्ट दूर हो जाते हैं।
माता सती की नाभि गिरने से बना पवित्र तीर्थ
पौराणिक कथा के अनुसार, जब राजा दक्ष के यज्ञ में अपमानित होकर माता सती ने योगाग्नि में अपने प्राण त्याग दिए थे, तब भगवान शिव शोक में डूबकर उनके पार्थिव शरीर को लेकर ब्रह्मांड में विचरण करने लगे। सृष्टि के संतुलन को बनाए रखने के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के कई भाग किए। माना जाता है कि माता की नाभि इस स्थान पर गिरी थी, जिसके कारण यह क्षेत्र शक्तिपीठ के रूप में पूजनीय बन गया।
क्यों कहा जाता है जाग्रत और सिद्ध शक्तिपीठ?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माँ पूर्णागिरी अपने भक्तों की पुकार शीघ्र सुनती हैं। यही कारण है कि इस धाम को जाग्रत शक्तिपीठ कहा जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना यहां अवश्य स्वीकार होती है। दूर-दूर से आने वाले भक्त माता के दर्शन कर सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और सफलता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
नवरात्र और चैत्र मेले में उमड़ता है आस्था का सैलाब
पूर्णागिरी धाम में विशेष रूप से चैत्र नवरात्र के दौरान विशाल मेले का आयोजन होता है। इस अवधि में लाखों श्रद्धालु कठिन पहाड़ी मार्गों को पार कर माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र भक्तिमय वातावरण से गूंज उठता है। श्रद्धालु माता के जयकारों के साथ अपनी श्रद्धा अर्पित करते हैं और मनोकामना पूर्ति की कामना करते हैं।
आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र माना जाता है पूर्णागिरी
उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल पूर्णागिरी धाम केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि श्रद्धा, विश्वास और आध्यात्मिक ऊर्जा का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा यह शक्तिपीठ भक्तों को आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव कराता है। यही कारण है कि हर वर्ष यहां श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
माँ पूर्णागिरी का यह दिव्य धाम आज भी करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है। माता के प्रति अटूट विश्वास और उनसे जुड़ी पौराणिक मान्यताएं इस शक्तिपीठ को देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में विशेष पहचान दिलाती हैं।
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