
तेल अवीव: पश्चिम एशिया में पिछले पांच महीनों से जारी संकट अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां आगे की दिशा को लेकर तस्वीर कुछ हद तक साफ होती नजर आ रही है। लंबे समय से जारी तनाव के बीच फिलहाल सैन्य टकराव को आगे बढ़ाने की कोशिशों पर विराम लगता दिखाई दे रहा है। इसी बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच बातचीत हुई। बातचीत के बाद नेतन्याहू की ओर से भारत के समर्थन को लेकर की गई टिप्पणी ने नई बहस छेड़ दी है।
नेतन्याहू ने दावा किया कि इस संकट के दौरान इजरायल को भारत का पूरा समर्थन मिल रहा है। हालांकि, पूर्व राजनयिक महेश सचदेवा ने नेतन्याहू के इस बयान पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि इजरायली प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी भारत के वास्तविक रुख को सही तरीके से पेश नहीं करती।
‘भारत ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का समर्थन नहीं किया’
पूर्व राजनयिक महेश सचदेवा के मुताबिक, भारत ने ईरान के खिलाफ इजरायल की सैन्य कार्रवाई का समर्थन नहीं किया है। ऐसे में नेतन्याहू की ओर से भारत के ‘पूरे समर्थन’ की बात कहना स्थिति को एक अलग दिशा में ले जाने वाला बयान है। उनका मानना है कि भारत के रुख को इजरायल के समर्थन के तौर पर इस तरह पेश करना सही तस्वीर नहीं बताता।
सचदेवा ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय संकट इस समय बेहद अहम पड़ाव पर है और इससे जुड़े सभी पक्षों के सामने अब दो रास्ते हैं। पहला रास्ता तनाव और टकराव को और बढ़ाने का है, जबकि दूसरा रास्ता बातचीत के जरिए किसी समाधान तक पहुंचने का है।
क्या बातचीत की ओर बढ़ रहा है पश्चिम एशिया?
महेश सचदेवा के मुताबिक, मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए फिलहाल ऐसा प्रतीत हो रहा है कि तनाव को और बढ़ाने का सिलसिला थम गया है। अब घटनाक्रम बातचीत की दिशा में आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है। इससे पश्चिम एशिया में लंबे समय से बने सैन्य तनाव को कम करने की उम्मीद भी जगी है।
उन्होंने कहा कि संकट में शामिल पक्षों के सामने अब बातचीत के जरिए समाधान तलाशने का विकल्प मौजूद है। ऐसे समय में किसी भी देश के रुख को लेकर की गई टिप्पणी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि उससे कूटनीतिक संदेश और क्षेत्रीय समीकरण प्रभावित हो सकते हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी बातचीत की उम्मीद
पश्चिम एशिया के मौजूदा संकट के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य भी बेहद अहम मुद्दा बना हुआ है। इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को लेकर भी बातचीत जल्द पूरी होने की उम्मीद जताई जा रही है। यदि इस मुद्दे पर सहमति बनती है तो इससे क्षेत्र में तनाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।
फिलहाल पश्चिम एशिया में हालात पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। एक तरफ इजरायल और ईरान के बीच तनाव के प्रभाव दिखाई दे रहे हैं, तो दूसरी ओर कूटनीतिक स्तर पर बातचीत की संभावनाएं भी तलाश की जा रही हैं। ऐसे में नेतन्याहू का भारत के समर्थन को लेकर दिया गया बयान और उस पर पूर्व राजनयिक की प्रतिक्रिया आने वाले दिनों में चर्चा का विषय बनी रह सकती है।
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