यूरोप की जंगल की आग ने बढ़ाई नई टेंशन, जमीन में दबे WWII के बम तक पहुंचीं लपटें; धमाकों का खतरा

यूरोप में लगातार विकराल होती जंगल की आग अब सिर्फ पेड़-पौधों और आबादी के लिए खतरा नहीं रह गई है। कई इलाकों में आग की लपटें जमीन के भीतर दबे दशकों पुराने विस्फोटकों और गोला-बारूद तक पहुंच रही हैं। जर्मनी से लेकर फ्रांस तक सामने आई घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। हालात ऐसे हैं कि कुछ जगहों पर आग बुझाने के लिए दमकलकर्मियों के साथ बम निरोधक दस्तों को भी मैदान में उतरना पड़ा।

जर्मनी में जंगल की आग के साथ बम धमाकों का खतरा

जर्मनी के पूर्वोत्तर हिस्से में स्थित म्यूरित्ज नेशनल पार्क में जुलाई के दौरान जंगल में आग भड़क उठी। सामान्य तौर पर ऐसी स्थिति में दमकलकर्मी आग पर काबू पाने के लिए अभियान चलाते हैं, लेकिन यहां मामला अलग था। जंगल की जमीन के नीचे शीत युद्ध के दौर का गोला-बारूद दबा हुआ है। यही वजह रही कि आग बुझाने के अभियान में फायरफाइटर्स के साथ बम डिस्पोजल टीमों को भी तैनात करना पड़ा।

जमीन के भीतर मौजूद विस्फोटकों के कारण राहत और बचाव दलों के लिए आग तक सीधे पहुंचना भी आसान नहीं था। कुछ हिस्सों में धमाके की आशंका इतनी ज्यादा थी कि टीमों को बेहद सावधानी के साथ अभियान चलाना पड़ा।

फ्रांस में 42 हजार हेक्टेयर जंगल आग की चपेट में

जर्मनी की घटना के कुछ समय बाद दक्षिण-पश्चिमी फ्रांस के गिरोंड क्षेत्र में भीषण वनाग्नि ने बड़े इलाके को अपनी चपेट में ले लिया। इस आग ने करीब 42,000 हेक्टेयर क्षेत्र को प्रभावित किया। ले पोर्ज गांव के आसपास खेतों और खुले इलाकों में फैली आग ने एक और गंभीर खतरा सामने ला दिया।

आग की गर्मी और लपटों के बीच जमीन में दबा द्वितीय विश्व युद्ध के समय का गोला-बारूद बाहर आने लगा। अधिकारियों को मौके से कम से कम 75 गोले बरामद हुए। यानी जिस जमीन को सामान्य माना जा रहा था, उसके नीचे दशकों पहले दबाए गए विस्फोटक आज भी मौजूद थे।

आग के दौरान फटे कई गोले, एक ने मकान की दीवार भेदी

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आग के दौरान बरामद किए गए गोला-बारूद में से कई में धमाके हो गए। एक गोला इतनी ताकत से फटा कि वह एक मकान की दीवार को भेदता हुआ निकल गया। इससे आसपास रहने वाले लोगों के लिए आग के साथ-साथ अचानक होने वाले विस्फोट का खतरा भी पैदा हो गया।

ले पोर्ज इलाके के स्थानीय मेयर मार्शल जानीनेत्ती ने बताया कि प्रशासन के पास इस बात का कोई रिकॉर्ड नहीं था कि उस क्षेत्र में युद्धकालीन गोला-बारूद जमीन के भीतर दबा हुआ है। ऐसे में आग के दौरान सामने आए इन विस्फोटकों ने स्थानीय प्रशासन के सामने एक अप्रत्याशित चुनौती खड़ी कर दी।

यूरोप में दशकों पुराने दबे विस्फोटक बड़ी चुनौती

जर्मनी और फ्रांस में हुई ये घटनाएं यूरोप के सामने मौजूद एक व्यापक समस्या की ओर इशारा करती हैं। 20वीं सदी में हुए युद्धों के दौरान महाद्वीप के कई हिस्सों में भारी मात्रा में गोला-बारूद और दूसरे विस्फोटक जमीन में दब गए थे। इनमें से बड़ी संख्या आज भी अलग-अलग इलाकों में मौजूद हो सकती है।

पहले ये विस्फोटक जमीन के भीतर दबे रहने के कारण तत्काल खतरे के तौर पर सामने नहीं आते थे। लेकिन यूरोप के कई हिस्सों में बढ़ती गर्मी और लंबे समय तक चलने वाली भीषण जंगल की आग अब उन पुराने युद्धकालीन अवशेषों तक पहुंच रही है। आग की तीव्र गर्मी से ऐसे गोला-बारूद के सक्रिय होने और धमाका करने का खतरा बढ़ सकता है।

जलवायु संकट के बीच बढ़ती जंगल की आग ने बढ़ाई चिंता

यूरोप में जंगल की आग का बढ़ता दायरा अब पर्यावरण और जनजीवन के साथ-साथ सुरक्षा से जुड़ी चुनौती भी बनता जा रहा है। जब आग उन क्षेत्रों तक पहुंचती है जहां दशकों पुराने विस्फोटक दबे हुए हैं, तो अग्निशमन अभियान और भी जटिल हो जाता है।

म्यूरित्ज नेशनल पार्क में शीत युद्ध के समय के गोला-बारूद और गिरोंड में द्वितीय विश्व युद्ध के दौर के गोले मिलने की घटनाएं बताती हैं कि यूरोप की जमीन के भीतर मौजूद युद्धकालीन विरासत आज भी खतरा बन सकती है। जंगल की आग जितनी ज्यादा तीव्र और लंबे समय तक जारी रहेगी, उतना ही इन छिपे हुए विस्फोटकों के सामने आने का जोखिम भी बढ़ सकता है।

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