Pakistan Russia Ukraine News: पाकिस्तान की विदेश नीति और रक्षा सहयोग को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। रूस के साथ संबंध मजबूत करने की कोशिशों के बीच पाकिस्तान पर यूक्रेन को हथियार और गोला-बारूद उपलब्ध कराने के आरोप फिर चर्चा में हैं। अब पाकिस्तान सेना के करीबी माने जाने वाले वरिष्ठ पत्रकार नजम सेठी के बयान ने इस बहस को और तेज कर दिया है।
यूक्रेन को तोप के गोले देने का दावा
इस्लामाबाद में दिए गए एक बयान में नजम सेठी ने दावा किया कि पाकिस्तान यूक्रेन को तोपों के गोले और सैन्य सामग्री उपलब्ध करा रहा है। उनका कहना है कि रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान पाकिस्तान की सैन्य उत्पादन इकाइयों में तैयार किए गए गोले यूक्रेनी सेना तक पहुंचाए गए हैं।
यह दावा ऐसे समय सामने आया है जब पाकिस्तान लगातार रूस के साथ ऊर्जा, व्यापार और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। ऐसे में दोनों पक्षों के साथ समानांतर संबंधों को लेकर पाकिस्तान की नीति पर सवाल उठने लगे हैं।
विदेश मंत्रालय करता रहा इनकार, लेकिन सामने आते रहे संकेत
पाकिस्तान का विदेश मंत्रालय लंबे समय से इस बात से इनकार करता रहा है कि उसने यूक्रेन को किसी प्रकार का हथियार या गोला-बारूद उपलब्ध कराया है। हालांकि बीते कुछ वर्षों में कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों, लीक दस्तावेजों और युद्ध क्षेत्र से सामने आई तस्वीरों में ऐसे संकेत मिले हैं, जिनसे पाकिस्तान की भूमिका पर संदेह गहराया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आधिकारिक इनकार के बावजूद विभिन्न स्रोतों से सामने आई जानकारियों ने इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है।
NATO देशों के साथ कथित गुप्त समझौते की चर्चा
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तान ने अमेरिका, ब्रिटेन और अन्य NATO सहयोगी देशों के साथ मिलकर एक कथित त्रिपक्षीय व्यवस्था के तहत यूक्रेन को सैन्य सामग्री पहुंचाने में भूमिका निभाई थी। बताया जाता है कि पाकिस्तान ऑर्डनेंस फैक्ट्री (POF) में निर्मित सोवियत मानक के 122 मिमी और 155 मिमी तोप के गोले यूरोप के कुछ देशों के माध्यम से यूक्रेन भेजे गए।
रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि इस रक्षा आपूर्ति से पाकिस्तान को करोड़ों डॉलर का आर्थिक लाभ हुआ। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
JF-17 लड़ाकू विमान के इंजन को लेकर नया खुलासा
नजम सेठी ने एक और महत्वपूर्ण दावा करते हुए कहा कि पाकिस्तान और यूक्रेन के बीच JF-17 लड़ाकू विमान के इंजन को लेकर भी बातचीत चल रही है। JF-17 पाकिस्तान और चीन का संयुक्त लड़ाकू विमान कार्यक्रम है, जिसके लिए अब तक रूस से जुड़े आपूर्ति नेटवर्क की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती रही है।
यदि यूक्रेन के साथ इंजन या उससे संबंधित तकनीकी सहयोग की दिशा में कोई समझौता होता है, तो इसे रूस के लिए रणनीतिक झटके के रूप में देखा जा सकता है। इससे क्षेत्रीय रक्षा समीकरणों पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
रूस-पाकिस्तान संबंधों पर उठे नए सवाल
रूस और पाकिस्तान के बीच पिछले कुछ वर्षों में ऊर्जा, रक्षा और व्यापार के क्षेत्र में नजदीकियां बढ़ी हैं। दोनों देशों ने कई उच्चस्तरीय बैठकें भी की हैं। लेकिन यूक्रेन को सैन्य सामग्री आपूर्ति से जुड़े आरोप यदि सही साबित होते हैं, तो इससे रूस-पाकिस्तान संबंधों में अविश्वास की स्थिति पैदा हो सकती है।
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि यूक्रेन युद्ध के दौरान किसी भी देश की सैन्य सहायता को बेहद संवेदनशील माना जाता है और ऐसे मामलों का असर द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ सकता है।
वैश्विक रणनीति के बीच पाकिस्तान की संतुलन साधने की कोशिश
विश्लेषकों के अनुसार पाकिस्तान एक ओर पश्चिमी देशों और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं के साथ अपने संबंध मजबूत रखना चाहता है, जबकि दूसरी ओर रूस और चीन जैसे देशों के साथ भी रणनीतिक साझेदारी बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। इसी कारण उसकी विदेश नीति को लेकर समय-समय पर विरोधाभासी तस्वीर सामने आती रही है।
फिलहाल नजम सेठी के दावों ने पाकिस्तान की भूमिका को लेकर नई बहस छेड़ दी है। हालांकि इन आरोपों पर पाकिस्तान सरकार की ओर से कोई नया आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
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