NSA Ajit Doval को मिलेगा ‘लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार’, देश की सुरक्षा और कूटनीति में ऐतिहासिक योगदान का मिलेगा बड़ा सम्मान

नई दिल्ली। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल को राष्ट्रीय सुरक्षा, रणनीतिक नीति और कूटनीतिक नेतृत्व में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए इस वर्ष के प्रतिष्ठित ‘लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार’ से सम्मानित किया जाएगा। इस सम्मान की आधिकारिक घोषणा सोमवार को तिलक स्मारक ट्रस्ट ने की। लंबे समय से देश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में निभाई गई उनकी भूमिका को देखते हुए यह सम्मान बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

एक अगस्त को पुणे में होगा सम्मान समारोह

तिलक स्मारक ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. रोहित तिलक ने बताया कि पुरस्कार वितरण समारोह 1 अगस्त को महाराष्ट्र के पुणे में आयोजित किया जाएगा। इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अजीत डोभाल को सम्मानित करेंगे। समारोह में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार के भी शामिल होने की संभावना जताई गई है।

देश की सुरक्षा में निभाई कई अहम जिम्मेदारियां

81 वर्षीय अजीत डोभाल भारत के सबसे अनुभवी सुरक्षा रणनीतिकारों में गिने जाते हैं। उन्होंने अपने लंबे प्रशासनिक और सुरक्षा करियर के दौरान मिजोरम, सिक्किम, पंजाब और जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया। इसके अलावा उन्होंने इस्लामाबाद और लंदन स्थित भारतीय मिशनों में भी महत्वपूर्ण राजनयिक दायित्व संभाले, जहां उनके अनुभव और रणनीतिक सोच की व्यापक सराहना हुई।

भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले NSA

अजीत डोभाल देश के सबसे लंबे समय तक कार्यरत रहने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं। उनके कार्यकाल में भारत की सुरक्षा नीति को नई दिशा मिली और कई महत्वपूर्ण रणनीतिक फैसलों में उनकी प्रमुख भूमिका रही। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई संवेदनशील मामलों में उनकी विशेषज्ञता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी गंभीरता से देखा जाता है।

डोकलाम विवाद के समाधान में भी रही अहम भूमिका

भारत-चीन सीमा से जुड़े मामलों में भी अजीत डोभाल की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। वह भारत-चीन सीमा वार्ता के लिए भारत के विशेष प्रतिनिधि के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। वर्ष 2017 में डोकलाम गतिरोध को शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त कराने के लिए किए गए कूटनीतिक प्रयासों में उनकी भूमिका को विशेष रूप से उल्लेखनीय माना जाता है। राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति और रणनीतिक मामलों में उनके योगदान के कारण उन्हें देश के सबसे प्रभावशाली सुरक्षा विशेषज्ञों में शामिल किया जाता है।

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