
खाने की थाली में सबसे आम दिखने वाला चावल अब तकनीक के साथ बदलता नजर आ रहा है। वैज्ञानिकों ने ऐसा चावल तैयार किया है जो खेतों में नहीं, बल्कि लैब में बनाया जा रहा है। दावा है कि यह पारंपरिक चावल की तुलना में ज्यादा हेल्दी हो सकता है। खास बात यह है कि इसमें ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) कम और प्रोटीन की मात्रा ज्यादा रखी गई है, जिससे यह डायबिटीज और फिटनेस को लेकर सजग लोगों के लिए एक बेहतर विकल्प बन सकता है।
क्या है लैब में बना चावल?
यह चावल पारंपरिक खेती से नहीं उगाया जाता, बल्कि आधुनिक फूड टेक्नोलॉजी की मदद से लैब में तैयार किया जाता है। इसे एक्सट्रूजन तकनीक के जरिए बनाया जाता है, जिसमें विभिन्न पोषक तत्वों को मिलाकर चावल जैसा आकार और बनावट दी जाती है। इसका उद्देश्य ऐसा भोजन तैयार करना है जो स्वाद में चावल जैसा हो, लेकिन पोषण में अधिक बेहतर हो।
पारंपरिक चावल से कितना अलग?
लैब में बने इस चावल और सामान्य चावल के बीच सबसे बड़ा अंतर इसके पोषण स्तर में है। जहां सामान्य चावल में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक होती है और प्रोटीन कम, वहीं इस नए चावल में प्रोटीन को बढ़ाया गया है। साथ ही इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम रखा गया है, जिससे यह ब्लड शुगर को तेजी से नहीं बढ़ाता।
क्या यह हेल्दी है?
विशेषज्ञों के अनुसार, कम GI वाले फूड्स शरीर में शुगर के स्तर को नियंत्रित रखने में मदद करते हैं। ऐसे में यह चावल डायबिटीज के मरीजों और वजन नियंत्रित करने वालों के लिए फायदेमंद हो सकता है। इसके अलावा, अधिक प्रोटीन होने के कारण यह मसल्स हेल्थ और ऊर्जा के लिए भी अच्छा माना जा रहा है।
स्वाद और बनावट में कैसा है?
हालांकि इसे इस तरह से तैयार किया गया है कि यह दिखने और पकने में बिल्कुल सामान्य चावल जैसा लगे, लेकिन स्वाद में हल्का अंतर महसूस हो सकता है। फिर भी वैज्ञानिकों का दावा है कि लगातार सुधार के साथ इसे और बेहतर बनाया जा रहा है ताकि यह आम लोगों के बीच आसानी से स्वीकार किया जा सके।
क्या भविष्य में बदलेगी हमारी थाली?
बढ़ती जनसंख्या और पोषण की जरूरतों को देखते हुए ऐसे इनोवेशन को भविष्य का भोजन माना जा रहा है। अगर यह तकनीक बड़े स्तर पर सफल होती है, तो आने वाले समय में हमारी थाली में पारंपरिक चावल के साथ-साथ लैब में तैयार चावल भी जगह बना सकता है।
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