
आजकल हेल्थ अवेयरनेस बढ़ने के बावजूद शाकाहारी लोगों में एक खास पोषक तत्व की कमी तेजी से देखी जा रही है—विटामिन B12। यह समस्या धीरे-धीरे गंभीर रूप ले सकती है, क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण अक्सर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि सही खानपान और लाइफस्टाइल अपनाकर इस कमी से बचा जा सकता है।
शाकाहारियों को क्यों होता है B12 डेफिशिएंसी का ज्यादा खतरा?
विटामिन B12 मुख्य रूप से पशु-आधारित खाद्य पदार्थों जैसे मांस, मछली, अंडे में पाया जाता है। ऐसे में जो लोग पूरी तरह शाकाहारी होते हैं, उनमें इसकी कमी होने की संभावना अधिक रहती है। लंबे समय तक इसकी कमी रहने पर शरीर में कमजोरी, थकान, नसों से जुड़ी समस्याएं और मेमोरी लॉस जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।
दूध-दही बन सकते हैं आसान समाधान
शाकाहारी लोगों के लिए राहत की बात यह है कि दूध और दही जैसे डेयरी प्रोडक्ट्स विटामिन B12 के अच्छे स्रोत माने जाते हैं। रोजाना इनके सेवन से शरीर को जरूरी पोषण मिल सकता है। हालांकि, यह मात्रा हर व्यक्ति की जरूरत के हिसाब से अलग हो सकती है।
विटामिन D भी है जरूरी, धूप से मिलेगा फायदा
विटामिन B12 के साथ-साथ शरीर में विटामिन D का संतुलन भी बेहद जरूरी है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि रोजाना कम से कम 15-20 मिनट धूप में बैठना चाहिए। इससे न केवल विटामिन D मिलता है, बल्कि शरीर की इम्युनिटी भी मजबूत होती है।
कब लेना चाहिए सप्लीमेंट?
अगर खानपान के बावजूद शरीर में विटामिन B12 की कमी बनी रहती है या लक्षण गंभीर हो जाते हैं, तो डॉक्टर की सलाह पर सप्लीमेंट लेना जरूरी हो सकता है। बिना डॉक्टर की सलाह के सप्लीमेंट लेना नुकसानदायक भी हो सकता है, इसलिए जांच के बाद ही इसका निर्णय लें।
नजरअंदाज न करें ये लक्षण
- लगातार थकान रहना
- हाथ-पैरों में झुनझुनी
- याददाश्त कमजोर होना
- चक्कर आना
ये संकेत शरीर में B12 की कमी की ओर इशारा कर सकते हैं।
संतुलित जीवनशैली ही है बचाव
सही डाइट, नियमित धूप और समय-समय पर हेल्थ चेकअप से इस समस्या से बचा जा सकता है। खासकर शाकाहारियों को अपनी डाइट पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
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